PAK आर्मी चीफ महज 1 मिनट के लिए मिले, बाद में कोई मीटिंग नहीं हुई: सिद्धू

उन्होंने कहा उनका पाकिस्तान दौरा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि है, जो दोनों देशों के बीच शांति चाहते थे.

PAK आर्मी चीफ महज 1 मिनट के लिए मिले, बाद में कोई मीटिंग नहीं हुई: सिद्धू
अपनी पाकिस्‍तान यात्रा पर नवजो‍त सिंह सिद्धू ने मीडिया के समक्ष सफाई पेश की.(फोटो: ANI)

चंडीगढ़: पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख को गले लगाने के मामले में आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कहा कि जनरल कमर जावेद बाजवा, प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह से पहले उनसे मुश्किल से एक मिनट के लिए ही मिले थे. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं उनसे बाद में नहीं मिला था." सिद्धू ने कहा कि 18 अगस्त को इस्लामाबाद में शपथ ग्रहण समारोह में उनके स्थान को अंतिम समय में बदल दिया गया था और उन्हें नहीं पता था कि कौन उनके पास बैठा है. उन्होंने कहा उनका पाकिस्तान दौरा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि है, जो दोनों देशों के बीच शांति चाहते थे.

सिद्धू ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में बहुत सारा प्यार और स्नेह मिला और भारत में मिली कुछ प्रतिक्रियाओं ने उन्हें निराश किया. सिद्धू कहा कि वह आमंत्रण और इमरान खान के बार-बार आग्रह करने पर पाकिस्तान गए थे. सिद्धू ने कहा, "हमारी सरकार ने भी मुझे पाकिस्तान जाने की इजाजत दी थी. पाकिस्तान द्वारा मुझे वीजा दिए जाने के दो दिन बाद हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुझे फोन किया और बताया कि मुझे वहां जाने की इजाजत मिल गई है."

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सिद्धू की सफाई
पंजाब मंत्रिमंडल के सदस्य नवजोत सिंह सिद्धू ने आज अपनी पाकिस्तान यात्रा पर स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि यह ‘‘राजनीतिक’’ नहीं एक दोस्त की ओर से महज गर्मजोशी भरा आमंत्रण था. क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू ने कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने मुझे बताया कि वे भारत के डेरा बाबा नानक करतारपुर साहिब के गरुद्वारे के लिए रास्ता खोलने का प्रयास कर रहे हैं और इसके बाद जो हुआ वह भावुक क्षण था.

उल्‍लेखनीय है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे सिद्धू पड़ोसी देश के सेना प्रमुख को गले लगाने के बाद विवादों में घिर गए थे और विपक्ष सहित पंजाब के मुख्यमंत्री ने भी सिद्धू की आलोचना की थी.

संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में उन्होंने कहा, ‘‘मेरा पाकिस्तान दौरा चर्चा का मुद्दा बन गया है. इस संबंध में, मैं निश्चित तौर पर कुछ चीजें स्पष्ट करना चाहूंगा. पाकिस्तान का मेरा दौरा राजनीतिक नहीं एक दोस्त (इमरान खान) की ओर से महज गर्मजोशी भरा आमंत्रण था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह दोस्त, जिसने अपने जीवन में कड़ी मेहनत और संघर्ष किया. वह जो आज उस मुकाम पर पहुंच गया है कि वह करोड़ों लोगों की किस्मत बदल सकता है.’’ जनरल बाजवा के साथ अपनी बैठक पर सिद्धू ने कहा,‘‘मैं एक बार फिर यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि जनरल बाजवा के साथ मेरी बैठक उनके शपथ समारोह स्थल पर पहुंचने के बाद हुई.’’

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इस बीच पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सिद्धू को अमन का दूत कहा.(फाइल फोटो)

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सिद्धू ने कहा, ‘‘मुझे पहली पंक्ति में बैठा देख वह गर्मजोशी से मिले और तुरंत ही उन्होंने मुझे बताया कि वे करतारपुर साहिब (जो करीब 3 से 3.5 किलोमीटर पाकिस्तान में है) के लिए रास्ता खोलने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि गुरु नानक देव जी के 550वें ‘प्रकाश दिवस’ पर श्रद्धालु उसके दर्शन कर सकें.’’ कांग्रेस नेता ने दावा किया कि करोड़ों श्रद्धालु पवित्र करतारपुर साहिब के दर्शन करने का इंतजार कर रहे हैं, जहां गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के करीब 18 वर्ष बिताए थे. उन्होंने कहा, ‘‘जनरल बाजवा के यह कहने के बाद, वह एक भावुक क्षण बन गया,जिसका नतीजा (एक दूसरे को गले लगाना) सभी ने देखा. उस छोटी मुलाकात के बाद, जनरल बाजवा के साथ मेरी कोई मुलाकात नहीं हुई.’’

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बहरहाल, सिद्धू ने अचानक हुई बैठक के भावुक क्षण में बदलने की निंदा होने पर दुख भी व्यक्त किया. इस मुद्दे पर विपक्षी भाजपा और अकाली दल के साथ-साथ पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी सिद्धू की आलोचना की थी. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पत्रकारों से कहा था, ‘‘मुझे लगता है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख के लिए जो प्यार दिखाया वह गलत था.’’

इस बीच, सिद्धू ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान अगर बातचीत के जरिए अपने मतभेद दूर कर लें, अच्छे दोस्त बन जाएं और व्यापार एवं अन्य क्षेत्रों में आपसी अदान-प्रदान को बढ़ावा दें, तो दक्षिण एशिया के लिए यह एक बड़ी उम्मीद और संदेश होगा. वर्ष 1992 में विश्व कप जीती पाकिस्तान टीम के कप्तान इमरान खान पर सिद्धू ने कहा, ‘‘वह एक दोस्त हैं, जो दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्ते कायम करने के लिए काम कर सकते हैं.’’

इनपुट: एजेंसियां