महाराष्‍ट्र: NCP का दावा- राज्‍यपाल ने राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश नहीं की, हमारे पास अभी भी वक्‍त

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि इस संबंध में राजभवन ने खुलासा करते हुए कहा है कि राज्‍यपाल की तरफ से ऐसी कोई सिफारिश नहीं की गई है.

महाराष्‍ट्र: NCP का दावा- राज्‍यपाल ने राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश नहीं की, हमारे पास अभी भी वक्‍त

मुंबई: महाराष्‍ट्र में राज्‍यपाल के राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश संबंधी खबरों के बीच एनसीपी ने दावा करते हुए कहा है कि ऐसी खबर बेबुनियाद है. एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि इस संबंध में राजभवन ने खुलासा करते हुए कहा है कि राज्‍यपाल की तरफ से ऐसी कोई सिफारिश नहीं की गई है. उन्‍होंने दावा करते हुए कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार राजभवन ने नोट जारी कर स्‍पष्‍ट किया है कि राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश नहीं की गई है. हमारे पास अभी भी रात 8.30 बजे तक का समय है.

24 अक्‍टूबर को विधानसभा चुनाव नतीजे के 19 दिन बाद भी अभी तक कोई दल बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े को राज्‍यपाल के समक्ष पेश नहीं कर पाया. महाराष्‍ट्र की 288 सदस्‍यीय विधानसभा में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं. चुनाव पूर्व के भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्‍पष्‍ट जनादेश मिला था. लेकिन शिवसेना के 50-50 फॉर्मूले की मांग के कारण ये गठबंधन टूट गया. उसके बाद शिवसेना ने एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिशें कीं लेकिन अंतिम समय तक कांग्रेस के समर्थन को लेकर असमंजस में बने रहने के कारण सियासी गतिरोध बना रहा.

उल्‍लेखनीय है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल बी.एस. कोश्यारी ने सोमवार देर शाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को राज्य में अगली सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने मीडियाकर्मियों से कहा था, "राज्यपाल ने हमारे प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया है और संकेत है कि एक आमंत्रण पत्र हमें दिया जाएगा. कल हम अगली सरकार बनाने के तौर-तरीकों पर कांग्रेस के साथ चर्चा करेंगे."

इसके पहले राकांपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने मीडिया को बताया कि राज्यपाल ने उन्हें रात 8.30 बजे बुलाया और वह आधा दर्जन अन्य नेताओं के साथ उनसे मिलने के लिए राजभवन जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है कि उन्होंने क्यों बुलाया है.

मलिक ने कहा कि 24 घंटे की छोटी अवधि के कारण कांग्रेस-राकांपा सरकार बनाने के लिए जरूरी चीजों का बंदोबस्त नहीं कर सकीं, जिससे शिवसेना अपने दावे को अंतिम रूप दे पाती. उन्होंने कहा, "राज्यपाल को हस्ताक्षर, नाम, विधानसभा सीटों के नाम और समर्थन करने वाले सभी विधायकों की संख्या के साथ पत्र चाहिए था, जो इतने कम समय में संभव नहीं था. सेना ने अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन राज्यपाल ने समय देने से इंकार कर दिया."

इसके पहले रविवार को भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाने से इंकार कर दिया था. और सोमवार को शिवसेना कांग्रेस और राकांपा के समर्थन के पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी, यद्यपि उसने दोनों दलों से सैद्धांतिक रूप से समर्थन प्राप्त होने का दावा किया. उसके बाद अब राकांपा को मौका दिया गया है.