तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे Nepal के विदेश मंत्री, India ने स्पष्ट किया ‘सीमा विवाद पर नहीं होगी कोई बात’

नेपाल द्वारा विवादित नक्शा प्रकाशित करने के बाद यह पहला मौका है जब नेपाल का कोई मंत्री आधिकारिक यात्रा पर भारत आया है. इसलिए माना जा रहा है कि दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल सकती है. नेपाल ने पिछले साल नया नक्शा जारी करके भारतीय भूभाग को अपना बताया था.  

तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे Nepal के विदेश मंत्री, India ने स्पष्ट किया ‘सीमा विवाद पर नहीं होगी कोई बात’
फाइल फोटो

नई दिल्ली: नेपाल-भारत संयुक्त आयोग (JCM) की छठी बैठक से ठीक पहले भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा विवाद (Border Dispute) पर कोई बात नहीं होगी. नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली (Pradeep Kumar Gyawali) तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच चुके हैं और आज होने वाली नेपाल-भारत संयुक्त आयोग की बैठक में हिस्सा लेंगे. अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश में लगे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने हाल ही में कहा था कि विदेश मंत्री ग्यावली भारत यात्रा के दौरान सीमा विवाद का मुद्दा उठाएंगे. उन्होंने कहा था कि कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख नेपाल के हैं और हम उन्हें वापस लेकर रहेंगे.  

‘दोनों मुद्दे अलग हैं’

नेपाल (Nepal) के प्रधानमंत्री के बयान के इतर भारत ने साफ कर दिया है कि नेपाल के नए नक्शे से उत्पन्न हुए सीमा विवाद को लेकर कोई बातचीत नहीं की जाएगी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव (Anurag Srivastava) ने गुरुवार को कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर हमारी स्थिति स्पष्ट है. मैं बताना चाहूंगा कि JCM की बैठक और सीमा विवाद दो अलग-अलग बातें हैं. श्रीवास्तव के इस बयान से स्पष्ट है कि JMC की बैठक में सीमा विवाद पर कोई बात नहीं होगी. 

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Corona Vaccine पर होगी चर्चा

बैठक के एजेंडे की ओर इशारा करते हुए श्रीवास्तव ने कहा, ‘नेपाल-भारत संयुक्त आयोग एक महत्वपूर्ण तंत्र है, जो उच्च स्तर पर हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा करने और हमें विशेष और अद्वितीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करने का अवसर देता है. लिहाजा हम अपने द्विपक्षीय एजेंडे में शामिल कई क्षेत्रों पर रचनात्मक चर्चा के लिए तत्पर हैं’. JCM में कोविड-19 सहयोग पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. क्योंकि नेपाल भारत से कोरोना वैक्सीन की 12 मिलियन डोज चाहता है.

रिश्तों में बेहतरी की आस

नेपाल द्वारा विवादित नक्शा प्रकाशित करने के बाद यह पहला मौका है कि नेपाल का कोई मंत्री आधिकारिक भारत यात्रा पर आया है. इसलिए माना जा रहा है कि दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल सकती है. नेपाल ने पिछले साल नया नक्शा जारी करके कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख के भारतीय भूभाग को अपना बताया था. जिसके बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया था. कोरोना काल में नेपाल ने भारत से लगी अपनी सीमा को भी बंद कर दिया था, जिसकी वजह से संबंधों में खटास और बढ़ गई थी. 

 

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