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'स्‍मार्ट पेट्रोल' के जरिये एक सींग वाले गैंडा को बचाने की कोशिश कर रहा एक मुल्‍क

नेपाल स्थित बर्दिया नेशनल पार्क ने एक सींग वाले गैंडा के संरक्षण के लिए मोबाइल ऐप का प्रयोग शुरू किया है.

'स्‍मार्ट पेट्रोल' के जरिये एक सींग वाले गैंडा को बचाने की कोशिश कर रहा एक मुल्‍क

काठमांडू: नेपाल स्थित बर्दिया नेशनल पार्क ने एक सींग वाले गैंडा के संरक्षण के लिए मोबाइल ऐप का प्रयोग शुरू किया है. द काठमांडू पोस्ट ने सूचित किया कि पार्क के अधिकारियों के अनुसार, ऐप स्मार्टफोन, गैंडा की तस्वीर से ही उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने में मदद करेगा. इसे 'स्मार्ट पेट्रोल' नाम दिया गया है.

अतीत में पार्क ने लुप्त हो रहे जानवरों की निगरानी सख्त करने के लिए बाबाई घाटी में गैंडों पर सेटेलाईट-जीपीएस कॉलर का प्रयोग किया था. लेकिन, अब वह तकनीक बेकार थी. पार्क के मुख्य संरक्षण अधिकारी अनानाथ बराल ने कहा कि बाबाई घाटी में गैंडों पर सेटेलाईट-जीपीएस कॉलर काम नहीं कर रहे थे.

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बराल ने कहा, "सेटेलाईट-जीपीएस अब जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे थे. या तो वे खो गए होंगे, या खराब हो गए होंगे." द डिपार्टमेंट ऑफ नेशनल पार्क एवं वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन, नेशनल ट्रस्ट फॉर नेचर कंजर्वेशन, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ नेपाल और स्थानीय समुदाय पार्क में गैंडों और बाघों सहित लुप्त हो रहे वन्यजीवों की सेटेलाईट ट्रैकिंग में शामिल रहे हैं.

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2016 और 2017 में चितवन नेशनल पार्क से बर्दिया नेशनल पार्क में स्थानांतरित किए हए आठ गैंडों के गले में सफलतापूर्वक रेडियो ट्रांसमीटर कॉलर लगाए गए थे. वहीं पार्क के रिकॉर्ड के अनुसार, बाबाई घाटी में केवल छह गैंडे थे. बराल ने कहा कि उनमें से एक गैंडे की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी.

2015 की गणना के अनुसार, नेपाल 645 गैंडों का घर था, जिसमें 605 चित्तवन में, 29 बर्दिया में, शुक्लाफॉन्ट में आठ और पारसा में तीन गैंडे थे. 1950 और 60 के दशक में गैंडों की संख्या में तेजी से गिरावट आई. इसके बाद 1973 में चितवन सैंक्चुरी की स्थापना के बाद उनकी संख्या संभलने लगी.

(इनपुट: एजेंसी आईएएनएस से)