जेटली की श्रद्धांजलि सभा में PM मोदी ने कहा, "कभी सोचा नहीं था कि मुझे दोस्त को श्रद्धांजलि देने आना पड़ेगा'

बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की श्रद्धांजलि सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा मेरे मन में हमेशा बोझ बना रहेगा कि मैं उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पाया. 

जेटली की श्रद्धांजलि सभा में PM मोदी ने कहा, "कभी सोचा नहीं था कि मुझे दोस्त को श्रद्धांजलि देने आना पड़ेगा'
पीएम मोदी ने कहा कि जेटली जी का मन-मतिष्क हमेशा देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए रम गया था.

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया है. दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में श्रद्धांजलि सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि कभी सोचा नहीं था कि कभी ऐसा भी दिन आएगा कि मुझे अपने दोस्त को श्रद्धांजलि देने के लिए आना पड़ेगा. इतने लंबे कालखंड तक अभिन्न मित्रता और फिर भी मैं उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पाया. मेरे मन में इसका बोझ हमेशा बना रहेगा. वे सर्वमित्र थे, वे सर्वप्रिय थे और वे अपनी प्रतिभा, पुरुषार्थ के कारण जिसको जहां भी उपयोगी हो सकते थे, वे हमेशा उपयोगी होते थे.

पीएम मोदी ने कहा, "पिछले दिनों अरुण जी के लिए जो लिखा गया है, उनके लिए जो कहा गया है और अभी भी अनेक महानुभावों ने जिस प्रकार से अपनी स्मृतियों को यहां ताजा किया है, इस सबसे अनुभव कर सकते हैं कि उनका व्यक्तित्व कितना विशाल था, कितनी विविधताओं से भरा हुआ था. वे लंबे समय तक बीमार थे, लेकिन आखरी दिन तक अगर उनसे सामने से पूछा जाए तो भी, वे अपनी बात बताने में या अपने स्वास्थ्य के बारे में बताने में समय खर्च नहीं करते थे." 

उन्होंने आगे कहा, "जेटली जी का मन-मतिष्क हमेशा देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए रम गया था. यही उनकी ऊर्जा, उनका सामर्थ्य था. उनका जीवन इतनी विविधताओं से भरा हुआ था कि दुनिया की किसी भी नई चीज की बात निकालिये, वो उसका पूरा कच्चा चिट्ठा खोल देते थे, उनके पास जानकारियों का भंडार था. मैं हमेशा एक कमी महसूस करूंगा, क्योंकि उनके (अरुण जेटली) पास हिंदुस्तान के संसदीय इतिहास की शासन व्यवस्था की एक तरह की मेमरी की डिक्शनरी भरी पड़ी थी. मीडिया वालों को भी जेटली काफी पसंद आते थे, वे उनके मददगार थे."

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पीएम मोदी ने कहा, "छात्र राजनीति की नर्सरी में पैदा हुआ पौधा हिंदुस्तान की राजनीति के विशाल फलक में एक वट वृक्ष बनकर उभर आए ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है. प्रतिभा को एक निश्चित दिशा में ढाल करके उन्होंने हर काम में एक नई ऊर्जा और एक नई सोच दी."