NGT ने दी चारधाम महामार्ग विकास परियोजना को मंजूरी, निगरानी समिति की गठित

एनजीटी का यह फैसला विभिन्न एनजीओ द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है.

NGT ने दी चारधाम महामार्ग विकास परियोजना को मंजूरी, निगरानी समिति की गठित

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने चारधाम महामार्ग विकास परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके तहत उत्तराखंड के इन चार स्थानों के लिए बारहमासी सड़क संपर्क मुहैया करने का प्रस्ताव है हालांकि, परियोजना की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया गया है.

एनजीटी ने कहा कि लोगों के हित में और देश की सुरक्षा के लिए राजमार्ग के निर्माण के मद्देनजर वह इस परियोजना को जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ मंजूरी देने के प्रति इच्छुक है इस परियोजना के तहत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने का प्रस्ताव है 

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने 26 सितंबर के अपने आदेश में कहा, 'हमारा यह विचार है कि सभी पर्यावरणीय चिंताओं को एक जिम्मेदार और स्वतंत्र निगरानी प्रणाली के जरिए दूर किया जा सकता है जो इस परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान पर्यावरण संबंधी सुरक्षा उपायों की निगरानी कर सकती है' पीठ में न्यायमूर्ति जे. रहीम और न्यायमूर्ति एस पी वांगडी भी शामिल थे. 

पीठ ने स्पष्ट किया कि 22 अगस्त, 2013 की अधिसूचना के जरिए मिली छूट के मुताबिक पर्यावरण संरक्षण कानून, 1986 के तहत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की आवश्यकता नहीं है.

पीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यू सी ध्यानी की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की है, ताकि परियोजना की पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) के कार्यान्वयन की निगरानी की जा सके.

समिति में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, राष्ट्रीय आपदा आपदा प्रबंधन संस्थान, केंद्रीय मृदा संरक्षण अनुसंधान संस्थान, वन अनुसंधान संस्थान, वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव और संबंद्ध जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं.

एनजीटी ने अधिकारियों को यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थानों की पदयात्रा करने वालों के लिए भी एक तंत्र बनाने को कहा. प्रशासन को ऐसी नीति तैयार करने के लिए भी कहा गया, जिससे 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहन इस परियोजना की सड़कों पर नहीं चल सकें.

एनजीटी का यह फैसला विभिन्न एनजीओ द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है दरअसल, याचिकाओं में कहा गया था कि परियोजना के कार्यान्वयन की पर्यावरण मंजूरी जरूरी थी और हो रहे कार्य ‘पूरी तरह से अवैध' हैं.

(इनपुट - भाषा)