निर्भया केस: दोषी मुकेश की अर्जी, डेथ वारंट पर रोक लगाई जानी चाहिए

मुकेश की तरफ से कहा गया कि इसीलिए हम निचली अदालत में आए हैं कि डेथ वारंट पर रोक लगाई जाए.

निर्भया केस: दोषी मुकेश की अर्जी, डेथ वारंट पर रोक लगाई जानी चाहिए

नई दिल्‍ली: निर्भया केस (Nirbhaya Case) में पटियाला हाउस कोर्ट में दोषी मुकेश की तरफ से पेश वकील ने कहा कि हमारी दो मांग हैं. पहली-डेथ वारंट पर रोक लगाई जानी चाहिए. दूसरी- डेथ वारंट रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि दोषियों की दया याचिका पर फैसले के पहले यह जारी किया गया है. मुकेश की तरफ से कहा गया कि इसीलिए हम निचली अदालत में आए हैं कि डेथ वारंट पर रोक लगाई जाए. मुकेश की तरफ से कहा गया कि क्‍यूरेटिव याचिका इसलिए दाखिल नहीं कर पाए क्योंकि कुछ दस्तावेज हमारे पास नहीं थे. मुकेश की तरफ से वकील वृंदा गोवर ने कहा कि जब राष्‍ट्रपति की तरफ से दया याचिका पर निपटारा नहीं हो जाता तब तक दोषी को फांसी नहीं दी जा सकती.

जज ने कहा- यह देखना जेल प्रशासन का काम है कि अगर दया याचिका पर फैसला नहीं हुआ है तो फांसी की सजा न हो.

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वृंदा ग्रोवर- हम इस बात को जेल प्रशासन पर नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि यह किसी की ज़िंदगी का सवाल है. कोर्ट को इस मामले में साफ-साफ निर्देश देना चाहिए. मौजूदा डेथ वारंट Unenforceable है. इसलिए जब तक राष्ट्रपति दया याचिका पर फैसला नहीं करते इस वारंट पर अमल नहीं होना चाहिए और इसके लिए कोर्ट को आदेश पारित करना चाहिए. हम जेल प्रशासन पर भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि जेल प्रशासन हमें दया याचिका दायर करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं दे रहा. हम किसी व्यक्ति की जिंदगी को ऐसे जेल प्रशासन के भरोसे नहीं छोड़ सकते.

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वृंदा ग्रोवर ने कहा कि जब तक दया याचिका पर निपटारा नहीं हो जाता तब तक ब्‍लैक वारंट को रोका जाना चाहिए. हम ब्‍लैक वारंट को चुनौती नहीं दे रहे बल्कि सिर्फ इस बात की गुजारिश कर रहे हैं कि जब तक दया याचिका पर फैसला नहीं हो जाता तब तक फांसी को रोका जाना चाहिए. कानून कहता है कि अंतिम निर्णय के बाद दोषी को 14 दिनों का समय दिया जाना चाहिए.

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इस पर सरकारी वकील ने दलील दी कि इस कोर्ट के पास डेथ वारंट पर रोक नहीं लगाने का अधिकार नहीं है. यह जेल सुपरिडेंट का अधिकार है. निर्भया के माता-पिता के वकील ने इसका विरोध किया. उन्‍होंने कहा कि 22 जनवरी को ही फांसी होनी चाहिए.

जज- जब जेल सुपरिटेंडेंट ने हमें लिखा कि दया याचिका लगाई गई है तो इसका मतलब क्या है? क्या इसका मतलब ये नहीं है कि कानून के मुताबिक फांसी का समय दिया जाना चाहिए.

कोर्ट ने संकेत दिया कि 22 जनवरी की फांसी टल सकती है. जज ने कहा कि इस मामले में जेल ऑथोरिटी जब रिपोर्ट दाखिल करेगी उसके बाद फिर से नया डेथ वारंट जारी करने की मांग करेंगे. जज ने कहा कि अगर आज या कल भी दया याचिका पर फैसला आता है तो फिर उनको 14 दिन का समय मिलेगा और दोषी फिर कोर्ट आएगा डेथ वांरट की तारीख बदलने की मांग को लेकर.

पटियाला हाउस कोर्ट ने उसके बाद तिहाड़ जेल से दया याचिका के स्‍टेटस पर कल दोपहर 3:30 बजे तक रिपोर्ट देने को कहा. कोर्ट ने जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी. जेल प्रशासन को बताना होगा कि मर्सी पेटिशन दायर होने के बाद क्या जेल मैन्युअल के मुताबिक फांसी की तारीख में बदलाव कर रहा है. जेल मैन्युअल के मुताबिक मर्सी पेटिशन खारिज होने के 14 दिन बाद ही फांसी हो सकती है. कल 3.30 बजे फिर सुनवाई होगी.

(इनपुट: जितेंद्र शर्मा के साथ)