Breaking News
  • कोरोना से मृत्यु दर 1% से कम करने का लक्ष्य: PM मोदी
  • आरोग्य सेतु ऐप के जरिए संक्रमित लोगों के करीब पहुंच सकते हैं: PM मोदी
  • 72 घंटे में संक्रमण की जानकारी से खतरा कम: PM मोदी
  • देश में फिलहाल हर रोज 7 लाख टेस्टिंग: PM मोदी

निर्भया के गुनहगारों को होगी फांसी, जानिए क्या है फांसी की सजा का प्रावधान और अपील की प्रक्रिया

निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape) के दोषियों के खिलाफ कोर्ट ने सजा का ऐलान कर दिया है.

निर्भया के गुनहगारों को होगी फांसी, जानिए क्या है फांसी की सजा का प्रावधान और अपील की प्रक्रिया
निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा

नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape) के दोषियों के खिलाफ कोर्ट ने सजा का ऐलान कर दिया है. गैंगरेप के चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी. ये फांसी तिहाड़ जेल में दी जाएगी. दोषी अक्षय, मुकेश, पवन और विनय 22 जनवरी को फांसी पर लटाकाए जाएंगे. 

बता दें कि फांसी की सजा देश के कानूनी प्रावधानों में दुर्लभ है. भारत में सबसे दुर्लभ मामलों में (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर ) मौत या फांसी की सजा दी जाती है. कोर्ट में जब मुकदमे की सुनवाई होती है तब जज को फैसले में यह लिखना पड़ता है कि मामले को दुर्लभतम (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर) क्यों माना जा रहा है. 

किसी भी अपराधी को मौत की सजा तभी मिल सकती है जब सेशन कोर्ट भी उस मामले को 'द रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' माने और उसके बाद हाईकोर्ट भी मामले को वैसा ही मानकर सजा दे. क्योंकि इस सजा का आधार तभी तय होता है जब दोषी या अपराधी का गुनाह क्रूर या फिर बेहद घिनौना हो और वह दुर्लभतम श्रेणी में आता हो.

ये भी देखें-

सेशन कोर्ट में जब फांसी की सजा सुनाई गई हो तो उक्त अपराधी के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने को रिफ्रेंस कहते हैं. रिफ्रेंस के दौरान दो जज सभी सबूतों को दोबारा से देखते हैं. अगर दोनों जज मानते हैं कि यह एक ऐसा जुर्म है जिसके लिए मृत्युदंड (फांसी) के अलावा कोई दूसरी सजा काफी नहीं है, तभी मौत की सजा सुनाई जाती है. इस स्थिति में अभियुक्त हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी अपील कर सकता है. 

राष्ट्रपति को मृत्युदंड की सजा माफ कर सकते हैं. साथ ही जिस राज्य की कोर्ट ने उक्त अपराधी या दोषी को मौत की सजा सुनाई है वहां के राज्यपाल के पास भी माफी देने का कानूनी अधिकार होता है. साथ ही देश की कानूनी व्यवस्था के तहत फांसी उसी व्यक्ति को दी जा सकती है जो पूरी तरह से सेहतमंद हो.

जो दिमागी रूप से ठीक नहीं हो उसे मौत की सजा देना सही नहीं माना जाता. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जिस इंसान का दिमाग सामान्य नहीं है उसे मौत की सजा देना क्रूरता है.