BJP News: नितिन नबीन अब तक के बीजेपी के सबसे युवा कार्यकारी अध्यक्ष हैं. वो सिर्फ 45 साल के हैं. उन्हें शीर्ष पर बिठाना पार्टी के लिए अगली पीढ़ी के नेताओं को तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है. नितिन नबीन के जरिए नौजवानों को जोड़ने की कोशिश है.
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नितिन नबीन भारतीय जनता पार्टी के नए कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं. दिल्ली पहुंचकर उन्होंने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है. और जल्द ही वो पार्टी के अध्यक्ष भी बनेंगे. मित्रो, नितिन नबीन का बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष बनना सबके लिए अप्रत्याशित है. कई बड़े नेताओं के बारे में चर्चा थी कि उन्हें बीजपी का अध्यक्ष बनाया जाएगा. स्वयं नितिन नबीन को भी कल तक पता नहीं था कि उन्हें संगठन के शीर्ष पर बिठाया जा रहा है. जब उनके पास दिल्ली से फोन गया, तब उन्हें भी पता चला कि वो अब दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के सर्वेसर्वा बनने वाले हैं.
नितिन नबीन की ताजपोशी के बारे में किसी ने प्रश्न नहीं उठाया. ना पार्टी के अंदर से. ना पार्टी के बाहर से ही. लेकिन एक प्रश्न का जवाब हर कोई जानना चाहता है कि जिस दौर में राजनीति में जाति अहम फैक्टर है. विपक्षी गठबंधन जातियों के दम पर जब बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए गोलबंदी कर रहा है. तब बीजेपी ने कैसे और क्यों उस जाति के नेता को पार्टी में शीर्ष स्थान पर बिठा दिया, जिसकी आबादी देश में एक प्रतिशत भी नहीं है. इसलिए आज हम बीजेपी की इस 'कायस्थ-पॉलिटिक्स' का विश्लेषण करेंगे.
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— Zee News (@ZeeNews) December 15, 2025
नितिन नबीन अब तक के बीजेपी के सबसे युवा कार्यकारी अध्यक्ष हैं. वो सिर्फ 45 साल के हैं. उन्हें शीर्ष पर बिठाना पार्टी के लिए अगली पीढ़ी के नेताओं को तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है. नितिन नबीन के जरिए नौजवानों को जोड़ने की कोशिश है. ये बताया गया है कि पार्टी में अगर कोई कार्यकर्ता पूरी निष्ठा से काम करेगा तो वो शीर्ष पर पहुंच सकता है. इसमें भी कहीं से कोई प्रश्न नहीं है कि वो ईमानदार हैं. निर्विवाद हैं. कर्मठ हैं. विश्वासपात्र हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ और सिक्किम में अपनी क्षमता साबित की है. लेकिन देश की राजनीति जब जाति और धर्म में उलझी हुई दिख रही है. जब देश में कोई मुख्यमंत्री कायस्थ नहीं है. केंद्र में कोई मंत्री कायस्थ नहीं है.
14 राज्य और आबादी महज सवा करोड़!
देशभर के करीब 14 राज्यों में जरूर कायस्थ रहते हैं. फिर भी इनकी आबादी करीब एक करोड़ के आसपास ही है. जो देश की आबादी के एक प्रतिशत भी नहीं है.
फिर भी बीजेपी ने नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है तो अवश्य इसके पीछे कोई बड़ी सोच है. बड़ी रणनीति है. मित्रो हम आपको बीजेपी की उसी रणनीति के बारे में बताना चाहेंगे.
आप जानते हैं कि विपक्षी गठबंधन की राजनीति जातियों की ईर्द-गिर्द घूम रही है. राहुल गांधी तो खुलकर 90 बनाम 10 की बात करते हैं. अखिलेश यादव हों, तेजस्वी यादव हों, स्टालिन हों या फिर विपक्षी गठबंधन के दूसरे नेता. ये सभी ओबीसी और दलित वाली पॉलिटिक्स कर रहे हैं, तब बीजेपी ने एक प्रतिशत से कम आबादी वाली जाति के नेता को बड़ी जिम्मेदारी देकर ये संदेश देने की कोशिश है कि उसके लिए सिर्फ एक जाति नहीं, बल्कि सब अहम हैं.
मित्रो कायस्थ के बारे में कहा जाता है वो बुद्धीजीवी होते हैं. उनकी आबादी भले ही कम हो, लेकिन वो बौद्धिक रूप से नैरेटिव सेट करने में अहम भूमिका निभाते हैं. ये नैरेटिव वोट बदलाव में अहम भूमिका में होता है. आने वाले समय में पश्चिम बंगाल में चुनाव है. उसके बाद यूपी में भी चुनाव है. दोनों राज्यों में कायस्थ की आबादी ठीकठाक है.
पश्चिम बंगाल में करीब 27 लाख कायस्थ वोटर हैं. जो 20 से 40 सीटों पर अहम हैं. यह समुदाय भद्रलोक का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए कायस्थों का महत्व वहां बढ़ जाता है. यही कारण है कि वहां 37 सालों तक कायस्थ मुख्यमंत्री रहे.
यूपी में भी कायस्थों की आबादी 1.5 से 2 करोड़ के बीच है, जो प्रदेश की जनसंख्या का 3 से 4 फीसदी तक है. राज्य की 25 सीटों पर वो निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
लेकिन इससे अहम ये है कि बाकी सीटों पर उनके नैरेटिव का बहुत असर होगा. मित्रो, बीजेपी ने नितिन नबीन के जरिए पावर बैलेंस करने की कोशिश भी की है. उनके अध्यक्ष बनने से उन अगड़ों की नाराजगी खत्म होगी, जिन्हें लगता है कि बीजेपी में उनकी पूछ कम हुई है. सरकार में शीर्ष पर ओबीसी हैं. संगठन में अगड़े को लाया गया है. ब्राह्मण पहले से अध्यक्ष हैं. अगर फिर से ब्राह्मण को अध्यक्ष बनाया जाता तो बाकी जातियों में असंतोष हो सकता था. लेकिन कायस्थ नेता से किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी.
ये भी जानना आवश्यक है कि कायस्थ बीजेपी के कोर वोटर रहे हैं. बीजेपी में इससे पहले ग्यारह अध्यक्ष हुए. ब्राह्मण. दलित. ओबीसी. राजपूत. सब संगठन में शीर्ष पर रहे. लेकिन पहली बार कायस्थ को शीर्ष स्थान दिया गया है. बीजेपी ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि वो अपने कोर वोटर का ख्याल रखती है.