गर्भवती के पास नहीं था 'आधार' इसलिए नहीं किया भर्ती, अस्पताल के बाहर दिया बच्चे को जन्म

जी मीडिया की टीम जब अस्पताल में पहुंची उसके बाद महिला को डॉक्टरों ने किया एडमिट

गर्भवती के पास नहीं था 'आधार' इसलिए नहीं किया भर्ती, अस्पताल के बाहर दिया बच्चे को जन्म
महिला एमपी की रहने वाली है और सुबह 8 बजे से परेशान थी लेकिन, अस्पताल से उसे कोई मदद नहीं मिली (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गुरुग्राम (आलोक उपाध्याय): हमेशा सुर्खियों में रहने वाला साइबर सिटी का सिविल अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है. आधार कार्ड न होने के कारण सिविल हॉस्पिटल (नागरिक अस्पताल) के डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों की इस लापरवाही के चलते गर्भवती महिला ने बच्चे को हॉस्पिटल के गेट के बाहर जन्म दिया. जानकारी के मुताबिक महिला एमपी की रहने वाली है और सुबह 8 बजे से परेशान थी लेकिन, अस्पताल से उसे कोई मदद नहीं मिली.

अस्पताल के बाहर दिया बच्चे को जन्म
जानकारी के मुताबिक यह मामला शुक्रवार सुबह का है जब एमपी की रहने वाली एक गर्भवती महिला अपने इलाज के लिए अपने अपने पति के साथ गुरुग्राम के सिविल अस्पताल पहुंची. लेकिन, डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में भर्ती करने के लिए आधार कार्ड की मांग की. महिला के पास आधार कार्ड न होने के कारण डॉक्टरों ने महिला को बाहर निकाल दिया. जिसके बाद दर्द से तड़पती महिला ने अस्पताल के गेट के सामने अपने बच्चे को जन्म दिया.

आधार कार्ड का नंबर दिया लेकिन नहीं माने डॉक्टर
बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे गर्भवती महिला अपने पति के साथ अस्पताल पहुंची थी. लेकिन डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया क्योंकि उसके पास आधार कार्ड नहीं था. महिला के पति ने आधार कार्ड का नंबर दिया लेकिन फिर भी डॉक्टर नहीं माने और उन्हें अस्पताल के बाहर निकाल दिया.

जी मीडिया की टीम पहुंची तो अस्पताल ने किया एडमिट
अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो महिला ने हॉस्पिटल के अंदर एमरजेंसी के गेट के पास लोगों के सामने ही अपने बच्चे को जन्म दिया. इस दौरान आसपास खड़ी कुछ महिलाओं ने गर्भवती महिला की मदद की. लेकिन, कोई डॉक्टर बाहर नहीं आया. बच्चे के जन्म के बाद महिला अपने पति और नवजात शिशु के साथ धरती पर लेटकर रोती रही. जब जी मीडिया की टीम अस्पताल में पहुंची उसके बाद डॉक्टरों ने महिला को एडमिट किया.

अस्पताल प्रबंधन ने दिया गोलमोल जवाब
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का चौंकाने वाला बयान सामने आया है. अस्पताल के PMO (प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर) का कहना है कि उनकी तरफ से कोई लापरवाही नहीं हुई है. बल्कि उन्होंने पीड़िता को अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा था.

अस्पताल प्रबंधन के जवाब ने ही खड़े किए सवाल
अस्पताल प्रबंधन ने पीछा छुडाने के लिए अल्ट्रासाउंड की बात तो कह दी है लेकिन यदि उनके इस तथ्य पर गौर किया जाए तो सबसे पहले अस्पताल प्रबंधन के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि महिला का दाखिला हुआ या नहीं. और यदि दाखिला हुआ तो अल्ट्रासाउंड अस्पताल के अंदर ही होता है बाहर नहीं और वो भी नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी में. इन प्रश्नों ने एक बार फिर से अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की भी पोल-खोलकर रख दी है. ताजा जानकारी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में एक डॉक्टर और एक नर्स को सस्पेंड कर दिया है.