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बिजली तैयार होने में अब नहीं आएगी अड़चन! सरकार ने लांच किया 'PRAKASH' पोर्टल

सरकार बिजली समस्या से निपटने की लिए 'PRAKASH' पोर्टल लाई है. PRAKASH का फुलफॉर्म है- 'Power Rail Koyla Availibility through Supply Harmony. 

बिजली तैयार होने में अब नहीं आएगी अड़चन! सरकार ने लांच किया 'PRAKASH' पोर्टल

नई दिल्ली: आपके घर में बार-बार बिजली गुल होने की समस्या या अंधेरा होने की दिक्कत है तो अब यह कम हो सकती है. सरकार इस समस्या से निपटने की लिए 'PRAKASH' पोर्टल लाई है. PRAKASH का फुलफॉर्म है- 'Power Rail Koyla Availibility through Supply Harmony. 'इस पोर्टल के जरिए कोयले की लगातार सप्लाई की निगरानी होगी, जिससे कोयले की कमी से थर्मल पावर बंद होने की कगार पर नहीं आयेंगे और नहीं और बिजली लगातार तैयार होती रहेगी.

थर्मल पावर बनाने में कोयले की अहम भूमिका है. इसकी सप्लाई का काम कोयला मंत्रालय का है. कोयले की ढुलाई का काम रेलवे का है और बिजली बनाने का काम ऊर्जा मंत्रालय का है. ऐसा देखने में आया है कि कभी रेलवे की ढुलाई की वजह से तो कभी कोयले की कमी की वजह से पावर प्लांट में ऐसी नौबत आ जाती है कि कोयले का बहुत कम दिन का स्टॉक ही बचता है. या फिर प्लांट से बिजली उत्पादन ठप्प करने की नौबत आ जाती है. इससे बिजली उत्पादन में कमी आती है.

ऊर्जा मंत्रालय और कोयला मंत्रालय का मानना है कि प्रकाश पोर्टल की वजह से बिजली उत्पादन में समस्या खड़ी नहीं होगी. दावा किया जा रहा है कि इससे कोयले की सटीक सप्लाई का रियल टाइम डेटा पोर्टल पर मौजूद होगी. कोयले की खदान से कितना निकला, रेलवे रेक पर कितना गया और पावर प्लांट में कितना आया और कितना स्टॉक बचा है इन सभी बातों का रियल टाइम जवाब होगा. अधिकारी इसे देखकर पहले से ही निर्णय लेंगे और बिजली की कमी के बाद एक दूसरे पर दोष लगाने जैसे मामले नहीं आयेंगे. वहीं रेलवे भी ढुलाई के लिए रेक मैनेजमेंट ज्यादा ठीक तरह से कर पायेगा. इस पोर्टल की देख देख NTPC के जिम्मे होगी.

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देश में थर्मल पावर से बनने वाली बिजली में कोयला आधारित बिजली उत्पादन का हिस्सा करीब 88% है. कुल 2,27644 मेगावाट थर्मल पावर में 1,95,810 मेगावाट हिस्सा कोयले का है. बिजली उत्पादन के आधार पर सालाना 698 MT कोयले की ज़रुरत होती है.

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि इस पोर्टल पर डेटा हमेशा अपडेट होते रहना चाहिए जिससे फैसले लेने में आसानी हो. पोर्टल पर मौजूद रियल टाइम डेटा की वजह से बिजली उत्पादक कंपनियों को संबंधित जगह बिजली भेजने के लिए वहां के पास वाले प्लांट से बिजली देने का विकल्प चुनने में आसानी होगी. वहीं घरों में पीछे से चले आ रहे तकनीकी कारण से बार बार बिजली गुल होने की समस्या से राहत मिलेगी.