OBC विधेयक पर संशोधन लाना कांग्रेस की चाल : बीरेंद्र सिंह

ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के संशोधनों के पारित हो जाने से सरकार और भाजपा के असहज स्थिति का सामना करने के बीच केंद्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि जब प्रवर समिति में कांग्रेस सहित सभी दलों के सदस्यों ने इस पर एकमत से सहमति व्यक्त की थी तब सदन में अंतिम समय में संशोधन लाना कांग्रेस की सोची समझी चाल है और इससे उसकी राजनीतिक मंशा ही जाहिर होती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब प्रवर समिति ने रिपोर्ट दे दी है और इस समिति में सभी दलों के सदस्यों ने एकमत से सहमति व्यक्त की थी, फिर राज्यसभा में संशोधन पेश करने का क्या औचित्य था. यह राजनीतिक मकसद से किया गया. इससे कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक मंशा जाहिर होती है.

OBC विधेयक पर संशोधन लाना कांग्रेस की चाल : बीरेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने काग्रेस की आलोचना की. (FILE PHOTO PTI)

नई दिल्ली: ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के संशोधनों के पारित हो जाने से सरकार और भाजपा के असहज स्थिति का सामना करने के बीच केंद्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि जब प्रवर समिति में कांग्रेस सहित सभी दलों के सदस्यों ने इस पर एकमत से सहमति व्यक्त की थी तब सदन में अंतिम समय में संशोधन लाना कांग्रेस की सोची समझी चाल है और इससे उसकी राजनीतिक मंशा ही जाहिर होती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब प्रवर समिति ने रिपोर्ट दे दी है और इस समिति में सभी दलों के सदस्यों ने एकमत से सहमति व्यक्त की थी, फिर राज्यसभा में संशोधन पेश करने का क्या औचित्य था. यह राजनीतिक मकसद से किया गया. इससे कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक मंशा जाहिर होती है.

'नहीं हुई बीजेपी की किरकिरी'

सिंह ने इस बात से साफ इंकार किया कि इसके कारण उच्च सदन में सत्तारूढ़ भाजपा की किरकिरी हुई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि इसकी मांग लंबे समय से थी. काफी समय से मांग की जा रही थी कि इसे संवैधानिक दर्जा दिया जाए. उनकी (कांग्रेस) राजनीतिक मंशा जाहिर हुई है. उन्होंने कहा कि इस बारे में क्या होगा, इस पर कानूनविद चर्चा करेंगे. मुझे लगता है कि विधेयक को लोकसभा में ले जाना होगा. 

अमित शाह ने जाहिर की नाराजगी

उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी सोमवार को उच्च सदन में पार्टी सदस्यों की अनुपस्थिति पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है. कल ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष के संशोधनों के पारित हो जाने से सरकार और भाजपा को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा.

सोमवार को क्या हुआ राज्यसभा में 

उच्च सदन में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों की संख्या 88 है और राज्यसभा ने विधेयक के तीसरे महत्वपूर्ण खंड (क्लॉज) तीन को खारिज करते हुए शेष विधेयक को जरूरी मतों से पारित कर दिया. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान (123वां संशोधन) विधेयक लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी थी. सोमवार को राज्य सभा में चर्चा के बाद इसके तीसरे खंड में कांग्रेस के संशोधनों को संसद ने 54 के मुकाबले 75 मतों से मंजूरी दे दी. इन संशोधनों में प्रस्ताव किया गया है कि प्रस्तावित आयोग में एक सदस्य अल्पसंख्यक वर्ग से और एक महिला सहित पांच सदस्य होने चाहिए. मूल विधेयक में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित तीन सदस्यीय आयोग का प्रस्ताव किया गया है.