और रुलाएगा प्याज! नासिक की लासलगांव मंडी में 6 हजार तक पहुंचे प्याज के दाम

देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक जिले के लासलगांव में आज प्याज के दाम क्विंटल के लिए 6 हजार रुपए तक पहुंच गईं. 

और रुलाएगा प्याज! नासिक की लासलगांव मंडी में 6 हजार तक पहुंचे प्याज के दाम
रबी प्याज की आवक मंडियों में घट रही है.

नासिक: देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक जिले के लासलगांव में आज प्याज के दाम क्विंटल के लिए 6 हजार रुपए तक पहुंच गईं. रबी की प्याज की स्टोरेज खत्म हो रही है. रबी प्याज की आवक मंडियों में घट रही है. वहीं, बेमौसम बारिश ने लाल प्याज को बड़ा नुकसान हुआ है जिससे देसी प्याज की आवक मंडी में कम हो रही है. जिसके चलते मंडी में प्याज के दाम में बढ़ रहे हैं. रबी के प्याज के दाम प्रति क्विंटल 6 हजार 301 रुपए मिले, वहीं, लाल प्याज को 5 हजार 500 रुपए का दाम मिला है.

मंडियों में प्याज की आवक कम होने से किसानों को फायदा मिला है लेकिन इस साल बारिश अच्छी होने के कारण प्याज की अभी बोई जाने वाली फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा जिससे भविष्य में आवक बढ़ने से प्याज का दाम में भारी गिरावट आ सकती है. किसानों का कहना है कि एक-दो माह के लिए प्याज के दाम बढ़ रहे हैं, केंद्र सरकार भी प्याज की निर्यात बंद करने का फैसला न ले. 

प्याज उत्पाद करने वाले किसान प्रशांत शिंदे का कहना है कि प्याज के दाम हमेशा चर्चा का विषय होता है. किसानों की भावनाएं समझने वाला कोई नहीं है. प्याज की फसल के लिए हमें 40 से 50 हजार रुपए तक का खर्च होता है. जब मंडियों में प्याज पहुंचता है तो उसे दाम मिलता है, ऐसा नही. लाल प्याज इस बार 5500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका है. प्याज आयात करने से भी दाम पर असर पड़ता है. किसानों को मंडियों में दाम नहीं मिलता. हम चाहते हैं कि किसानों के हित का भी ख्याल रखे. 

प्याज व्यापारी उमेश अट्टल बताते हैं कि हमारे पास अभी प्याज 2-5फीसदी ही बचा है. रबी का पुराना प्याज है. बेमौसम बारिश ने लाल प्याज का नुकसान हुआ है. महाराष्ट्र के नासिक, अहमदनगर, धुले जिले में बेमौसेम पारिश से प्याज की फसल बर्बाद हई. आंध्रप्रदेश ,कर्नाटक से आने वाली प्याज भी बेमौसम बारिश से आवक घटी है जिसके चलते मंडियों में प्याज की आवक घटी है. आने वाले समय में प्याज के दाम बढ़ेंगे. पिछले साल 2018 में रबी के प्याज का उत्पाद बढ़ा था, जिसके चलेत रबी का प्याज भी 50 से 100 रुपए प्रति क्विंटल में बेचने के लिए किसान मजबूर थे. 

पहले इस साल सुखे के चलते टैंकर के पानी से रबी का प्याज उत्पाद लिया गया था लेकिन रबी का प्याज का उत्पाद आते ही किसानों ने स्टोरेज करने के बजाय प्रति क्विंटल 1500 रुपए के दाम पर मंडियों में बेच दिया था. पिछले साल मिले कम दाम के के कारण शुरुआत में आए प्याज को किसानों ने बेच दिया था और रबी का प्याज जरूरत के हिसाब से ही स्टोरेज किया था. लेकिन बेमौसम बारिश से स्टोरेज किया प्याज भी सड़ गया. खेत में लगाया बारिश के मौसम का लाल प्याज भी बेमौसम बारिश में बर्बाद हुआ. आवक घटनेसे प्याज के दाम बढ रहे हैं.