विपक्ष की एकता में दरार, राष्ट्रपति से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल से दूर रहे कुछ राजनीतिक दल

विपक्ष की एकता में शुक्रवार को उस समय दरार उभरकर सामने आया जब कांग्रेस के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में कुछ दल शामिल नहीं हुए। नोटबंदी के बाद लोगों को आ रही समस्याओं और संसद के अंदर विपक्ष की आवाज को ‘दबाने’ के मुद्दे पर यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने गया था।

विपक्ष की एकता में दरार, राष्ट्रपति से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल से दूर रहे कुछ राजनीतिक दल
फोटो सौजन्‍य: एएनआई ट्वीटर

नई दिल्ली : विपक्ष की एकता में शुक्रवार को उस समय दरार उभरकर सामने आया जब कांग्रेस के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में कुछ दल शामिल नहीं हुए। नोटबंदी के बाद लोगों को आ रही समस्याओं और संसद के अंदर विपक्ष की आवाज को ‘दबाने’ के मुद्दे पर यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने गया था।

विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और शिकायत की कि सरकार संसद नहीं चलने दे रही है और नोटबंदी के कारण लोगों को आ रही समस्याओं को उजागर करने से उन्हें रोक रही है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में जहां तृणमूल कांग्रेस, राजद, जद यू, एआईयूडीएफ और कुछ अन्य दलों के नेता शामिल हुए वहीं राकांपा, द्रमुक, वामपंथी दल, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इससे अलग रहे।

किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के संसद भवन में प्रधानमंत्री से अलग से मुलाकात करने के बाद यह दरार उभरा। किसानों के ऋण माफ करने के मुद्दे पर प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की।

सूत्रों ने कहा कि राकांपा के माजिद मेमन राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे लेकिन पार्टी नेतृत्व ने अंतिम क्षण में अलग रहने का निर्णय किया और उन्हें वापस बुला लिया गया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया और दूसरे विभिन्न दलों के कई नेता इसमें शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया, ‘हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को इस तरीके से कुचलने और संसद के अंदर हमारी आवाज दबाने और विचार व्यक्त करने के अधिकार से रोकने पर हम काफी दुखी हैं। हम काफी चिंतित हैं कि हमारे संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को काफी खतरा है।’ इसमें कहा गया है, ‘नोटबंदी के कदम से देश में खतरनाक स्थिति उभरी है। हम आपको संविधान के रक्षक के तौर देखते हैं इसलिए आप आर्थिक आपदा से लोगों को बचाने के लिए कृपया हस्तक्षेप करें।’ 

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘हम संसद में बहस चाहते थे लेकिन सरकार ने सभी लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन किया और इसे बाधित किया।’ संसद के शीत सत्र के पूरी तरह बर्बाद होने के तरीके पर उन्होंने कहा, ‘संसदीय कार्यवाहियों के संचालन में सरकार पूरी तरह विफल रही। मंत्री हाथों में तख्तियां लेकर संसद नहीं चलने दे रहे।’ उन्होंने कहा, ‘संसद नहीं चलने के लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने सभी नियम ताक पर रख दिए हैं।’ 

तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि राष्ट्रपति से मिलने का उद्देश्य उन्हें यह बताना था कि नोटबंदी के बाद जनप्रतिनिधि अपने विचार व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं। जद यू के शरद यादव ने कहा कि सरकार ने संसद के अंदर लोगों की समस्याओं पर चर्चा नहीं होने दी। बाद में कांग्रेस प्रवक्ता कपिल सिब्बल से जब विपक्ष की एकता में दरार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नोटबंदी के मुद्दे पर कांग्रेस विपक्ष के साथ एकजुट है।

उन्होंने कहा, ‘हम सब एकजुट हैं। जहां तक दूसरे मुद्दों की बात है तो राहुल गांधी जब उत्तर प्रदेश गए थे तो पूरे अभियान का एजेंडा कृषि ऋण को माफ करना था। जहां तक नोटबंदी पर विपक्ष की एकजुटता का सवाल है तो यह बना हुआ है और बना रहेगा।’