ओआरओपी: अनशन कर रहे पूर्व सैनिक को अस्पताल में भर्ती कराया गया

‘एक रैंक एक पेंशन’ को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से आमरण अनशन कर रहे कर्नल पुष्पेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) को सोमवार को सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी चिकित्सकीय रिपोर्ट में केटोन का स्तर बढ़ा हुआ पाए जाने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

नई दिल्ली : ‘एक रैंक एक पेंशन’ को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से आमरण अनशन कर रहे कर्नल पुष्पेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) को सोमवार को सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी चिकित्सकीय रिपोर्ट में केटोन का स्तर बढ़ा हुआ पाए जाने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट के अध्यक्ष मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा, ‘जिस डॉक्टर ने आज उनकी जांच की उन्होंने कहा कि केटोन का स्तर बढ़ गया है और उन्हें जल्द अस्पताल में भर्ती किए जाने की जरूरत है। कर्नल सिंह अस्पताल जाने को इच्छुक नहीं थे लेकिन हमने उन्हें भर्ती होने के लिए मनाया।’केटोन की अधिकता शरीर के लिए जहरीली साबित होती है।

जब उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था तो एक अन्य पूर्व सैनिक हवलदार साहेब सिंह (सेवानिवृत्त) उनके स्थान पर आए और आमरण अनशन शुरू कर दिया। दो अन्य हवलदार मेजर सिंह (सेवानिवृत्त) और हवलदार अशोक चौहान (सेवानिवृत्त) भी आमरण अनशन कर रहे हैं।

कर्नल पुष्पेन्द्र ने कहा, ‘मैं वापस लौटूंगा और अपना अनशन जारी रखूंगा। मैं जाने को तैयार नहीं हूं लेकिन यहां के लोग चाहते हैं कि मैं अस्पताल में भर्ती होउं क्योंकि उनका कहना है कि उच्च केटोन स्तर से दिमाग के कामकाज पर असर पड़ता है।’ उन्होंने कहा कि सरकार को लंबित ओआरओपी मुद्दे को यथाशीघ्र लागू करना चाहिए ताकि भूख हड़ताल कर रहे सैनिक अपना विरोध खत्म करें।

पुष्पेन्द्र को पहले रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया जाना था।

यूनाइटेड फ्रंट ऑफ एक्स सर्विसमैन के मीडिया सलाहकार कर्नल अनिल कौल :सेवानिवृत्त: ने कहा, ‘दिल्ली प्रशासन और दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने एंबुलेंस को बंधक बनाने का प्रयास किया और उन्हें आरएमएल अस्पताल ले गए। हम उन्हें निजी कार में आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल ले गए। हमने सेना प्रमुख से आग्रह किया है कि उनकी बेहतरीन चिकित्सा सुनिश्चित की जाए।’ पुष्पेन्द्र की बेटी ने कहा, ‘सैनिक अब क्रोधित हैं और सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि सैनिकों को उनके अधिकार दिए जाएं और उनसे इस तरीके से बर्ताव नहीं किया जाए।’