स्मार्ट फोन्स के दौर में युवाओं ने बनाया खत लिखने को पेशा, चिट्ठियों से जोड़ते हैं टूटे रिश्ते

ई-मेल, मोबाइल, वॉट्सएप और सोशल मीडिया के दौर में चिट्ठी लिखना बेमानी सी चीज हो गई है. अब चिट्ठी लिखने की जहमत कोई नहीं उठाना चाहता. लेकिन आधुनिक तकनीक और संचार क्रांति के इस दौर में चिट्ठियां लिखने को यदि कोई पेशा बना ले तो यह हैरान करने वाली बात लगेगी. जी, हां बेंगलुरू स्थित द इंडियन हैंड रिटन लैटर्स कंपनी (टीआईएचएलसी) दूसरों के लिए चिट्ठियां लिखने का काम करती है. ढेर सारे लोग इस कंपनी से अपने चाहने वालों और करीबियों के लिए चिट्ठियां लिखवाते हैं.    

स्मार्ट फोन्स के दौर में युवाओं ने बनाया खत लिखने को पेशा, चिट्ठियों से जोड़ते हैं टूटे रिश्ते
बेंगलुरु की कंपनी लोगों के लिए लिखती है चिट्ठियां. फाइल फोटो

नई दिल्ली : ई-मेल, मोबाइल, वॉट्सएप और सोशल मीडिया के दौर में चिट्ठी लिखना बेमानी सी चीज हो गई है. अब चिट्ठी लिखने की जहमत कोई नहीं उठाना चाहता. लेकिन आधुनिक तकनीक और संचार क्रांति के इस दौर में चिट्ठियां लिखने को यदि कोई पेशा बना ले तो यह हैरान करने वाली बात लगेगी. जी, हां बेंगलुरू स्थित द इंडियन हैंड रिटन लैटर्स कंपनी (टीआईएचएलसी) दूसरों के लिए चिट्ठियां लिखने का काम करती है. ढेर सारे लोग इस कंपनी से अपने चाहने वालों और करीबियों के लिए चिट्ठियां लिखवाते हैं.    

युवाओं का समहू है टीआईएचएलसी

टीआईएचएलसी युवाओं का एक ऐसा समूह है जो लोगों के लिए चिट्ठियां लिखता है और इस काम के लिए लोग कंपनी को पैसे भी देते हैं. टीआईएचएलसी चलाने वाले अंकित अनुभव बताते हैं कि छोटी सी चिठ्ठी लिखना दो पेज का लंबा मेल लिखने से कहीं ज्‍यादा मुश्‍किल है. अपनों के लिए किसी की भावनाओं को शब्‍द देना कभी-कभी रुला देता है. अक्‍सर ऐसे खत लिखने के निवेदन आते हैं कि कोई पिता सालों से रूठे हुए अपने बेटे को मनाने के लिए चि‍ठ्ठी लिखवाता है तो कोई लड़का पिछले एक दशक से दिल में छुपाए हुए प्‍यार का इजहार इस खत के माध्‍यम से करने की हिम्‍मत जुटाता है.

देनी होती है चिट्ठी के बारे में थोड़ी जानकारी

अंकित का कहना है कि चिट्ठी लिखवाने के लिए लोगों को यह बताना होता है कि वह किसके लिए चिट्ठी लिखवाना चाहते हैं. चिट्ठी भेजने और पाने वाले के बारे में थोड़ी जानकारी मांगी जाती है. साथ ही चिट्ठी लिखवाने वाले को यह बताना होता है कि वे अपनी चिट्ठी में किन बातों को रखना चाहते हैं. चिट्ठी के लिए टीआईएचएलसी को या तो पूरी बात बतानी होती है या उसे केवल प्वाइंटर्स देने होते हैं. कंपनी इस आधार पर चिट्ठी का खाका तैयार कर देती है. इसके बाद लिखी गई चिट्ठी को उसके गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है.

'रिश्तों में आई दरार को दूर करते हैं खत'

अंकित का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग चिट्ठी लिखवाने के लिए उनकी कंपनी के पास अनुरोध भेजते हैं. उनकी कंपनी की तरफ से प्रेम निवेदन से लेकर पिता-बेटे के बीच दूरी खत्म करने वाली चिट्ठियां भी लिखी जा चुकी हैं. अंकित का कहना है कि रिश्तों में आई कड़वाहट को चिट्ठियां दूर कर देती हैं और उनकी तरफ से लिखी गयीं चिट्ठियों से जब भी ऐसा कुछ होता है तो उनको अपना प्रयास सार्थक लगता है. 

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