तेलंगाना सरकार का तुगलकी फरमान, सिर्फ कुंवारी लड़कियों को ही मिलेगा एडमिशन

तेलंगाना सरकार एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के भगवान वेंकटेवश्वर मंदिर में लगभग पांच करोड़ रुपए के स्वर्ण आभूषण चढ़ाने वाले विवाद के बाद सरकार अपने एक तुगलकी फरमान को लेकर चर्चा में आ गई है। दरअसल, तेलंगाना सरकार ने सामाजिक कल्याण आवासीय महिला कॉलेजों में एडमिशन के लिए एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। इस फरमान के मुताबिक, इन कॉलेजों में केवल कुंवारी लड़कियों को ही एडमिशन मिल सकता है। इस नियम के पीछे सरकार ने दलील दी है कि शादीशुदा महिलाओं के कॉलेजों में होने से कुंवारी लड़कियों का ध्यान भटक सकता है।

 तेलंगाना सरकार का तुगलकी फरमान, सिर्फ कुंवारी लड़कियों को ही मिलेगा एडमिशन

नई दिल्ली :  तेलंगाना सरकार एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के भगवान वेंकटेवश्वर मंदिर में लगभग पांच करोड़ रुपए के स्वर्ण आभूषण चढ़ाने वाले विवाद के बाद सरकार अपने एक तुगलकी फरमान को लेकर चर्चा में आ गई है। दरअसल, तेलंगाना सरकार ने सामाजिक कल्याण आवासीय महिला कॉलेजों में एडमिशन के लिए एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। इस फरमान के मुताबिक, इन कॉलेजों में केवल कुंवारी लड़कियों को ही एडमिशन मिल सकता है। इस नियम के पीछे सरकार ने दलील दी है कि शादीशुदा महिलाओं के कॉलेजों में होने से कुंवारी लड़कियों का ध्यान भटक सकता है।

तेलंगाना सामाजिक कल्याण आवासीय शिक्षण संस्थान सोसायटी के एक अधिकारी बी वेंकट राजू का कहना है कि इस नियम के पीछे का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अन्य लड़कियों का ध्यान पढ़ाई से न भटके क्योंकि शादीशुदा युवतियों के पतियों की सप्ताह में एक बार या 15 दिन में एक बार उनसे मिलने कॉलेज आने की पूरी संभावना है। ऐसे में छात्राओं में किसी भी तरह का भटकाव वे नहीं चाहते हैं।

सोसायटी ने हाल ही में साल 2017-18 के लिए नामांकन संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया है। उसमें कहा गया है कि बीए, बीकॉम और बीएससी में प्रथम वर्ष के लिए (अविवाहित) लड़कियों के लिए आवेदन आमंत्रित किया जाता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार, सोसायटी के सचिव डॉ. आर एस प्रवीण कुमार का कहना है कि इन कॉलेजों की स्थापना का मकसद बाल विवाह के दुष्चक्र को भी तोड़ना है। वे लोग शादीशुदा युवतियों के आत्मविश्वास को कम नहीं करना चाहते हैं, लेकिन कोई एडमिशन के लिए आवेदन करता है तो वे नहीं रोकेंगे। किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की उनका इरादा नहीं है।

आपको बता दें कि यह नियम पिछले एक साल से कॉलेजों में लागू है। राज्य में ऐसे कुल 23 आवासीय कॉलेज हैं, हर कॉलेज में हर साल 280 स्टूडेंट्स का नामांकन होता है। इन कॉलेजों में सभी स्टूडेंट्स को शिक्षा से लेकर भोजन तक मुफ्त में दी जाती है। इन कॉलेजों में 75 फीसदी सीट एससी के लिए और बाकी 25 फीसदी एसटी और सामान्य के लिए है।

सरकार के इस नोटिफिकेशन का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह न सिर्फ दुखद कदम है, बल्कि यह शादी जैसे पवित्र बंधन का भी अपमान है। महिलाओं के एक संगठन का कहना है कि राज्य सरकार का एक संस्थान शादीशुदा महिलाओं को शिक्षा पाने से कैसे रोक सकता है, जबकि तेलंगाना में शहर और ग्रामीण दोनों में बाल विवाह इतने बड़े पैमाने पर हो रहे हैं।