जत्थेदार नन्दगढ़ को हटाने की मुहिम तेज, SGPC सदस्यों ने अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंत सिंह नन्दगढ़ को हटाने के रणनीति बना ली है। गुरुवार को एसजीपीसी के करीब 150 सदस्यों के दस्तखत वाले ज्ञापन एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह को सौंपा गया कमेटी सदस्य अमरजीत सिंह चावला की अगुवाई में दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जत्थेदार नन्दगढ़ ने एक नगर कीर्तन के दौरान सत्कार नहीं किया था। उन्होंने  पंच प्यारे का अपमान भी किया था, इसलिए उन्हें हटाना जरूरी हो गया है।

चंडीगढ़ : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंत सिंह नन्दगढ़ को हटाने के रणनीति बना ली है। गुरुवार को एसजीपीसी के करीब 150 सदस्यों के दस्तखत वाले ज्ञापन एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह को सौंपा गया कमेटी सदस्य अमरजीत सिंह चावला की अगुवाई में दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जत्थेदार नन्दगढ़ ने एक नगर कीर्तन के दौरान सत्कार नहीं किया था। उन्होंने  पंच प्यारे का अपमान भी किया था, इसलिए उन्हें हटाना जरूरी हो गया है।

इस बारे में एसजीपीसी प्रमुख अवतार सिंह ने बातचीत में बताया कि 17 जनवरी को एसजीपीसी की बैठक में जत्थेदार नन्दगढ़ पर फैसला लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ वकीलों का पैनल बनाया गया है जो सिख कैदियों की रिहाई के लिए केस लड़ेंगे।  एसजीपीसी प्रमुख ने यह भी कहा कि नानकशाही कैलेन्डर से कौम जिस तरह की दुविधा में फंसी हुई है उसे दूर करना एसजीपीसी का फर्ज है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जत्थेदार नन्दगढ़ नानकशाही कैलेंडर के हक में होते थे, लेकिन इस समय यह चर्चा जोरों पर है कि एसजीपीसी दबाव में नानकशाही कैलेंडर की बजाय बिक्रमी कैलेंडर को लागु करना चाहती है। ज्ञापन में संविधान की धारा 25-बी में संशोधन करने की भी मांग की गई। सदस्यों ने जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई की भी मांग की है। ज्ञापन से इतर अमरजीत सिंह चावला ने कहा कि नानकशाही कैलेंडर को लेकर कौम में बहुत बड़ी दुविधा है जिसे दूर करने की जरूरत है।