पी चिदंबरम ने कहा, 'नोटबंदी को समर्थन RBI के इतिहास का काला दिन था'

पूर्व वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘आरबीआई की बैठक का ब्यौरा नोटबंदी को सरकार द्वारा सही ठहराने को पूरी तरह गलत साबित करता है.'

पी चिदंबरम ने कहा, 'नोटबंदी को समर्थन RBI के इतिहास का काला दिन था'
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने नोटबंदी के लिए सरकार की ओर से दी गई तर्कों से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड द्वारा असहमति जताने से जुड़ी खबर को लेकर शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा. पी चिदंबरम ने कहा कि विरोध के बावजूद नोटबंदी का समर्थन करना आरबीआई के इतिहास का काला दिन था.

पूर्व वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘आरबीआई की बैठक का ब्यौरा नोटबंदी को सरकार द्वारा सही ठहराने को पूरी तरह गलत साबित करता है.' उन्होंने कहा, ‘आठ नवंबर, 2016 को शाम 5.30 बजे आारबीआई बोर्ड की बैठक हुई जिसमें कई सदस्य मौजूद नहीं थे. बोर्ड ने सरकार की ओर से दिए गए प्रमुख कारणों से असहमति जताई, लेकिन फिर भी नोटबंदी का समर्थन किया. यह आरबीआई के इतिहास का काला दिन था.’

दरअसल, एक अखबार की खबर में कहा गया है कि नोटबंदी से कुछ घंटे पहले आरबीआई बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी और बोर्ड ने नोटबंदी के पक्ष में सरकार की ओर से दी गई कुछ प्रमुख तर्कों को खारिज कर दिया था.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे.

राहुल ने नोटबंदी को लेकर साधा केंद्र पर निशाना
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबंदी के दो साल पूरा होने के मौके पर गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि मोदी सरकार का यह कदम खुद से पैदा की गई ‘त्रासदी’ और ‘आत्मघाती हमला’ था जिससे प्रधानमंत्री के ‘सूट-बूट वाले मित्रों’ ने अपने कालेधन को सफेद करने का काम किया. उन्होंने यह भी दावा किया कि नोटबंदी की पूरी सच्चाई अभी सामने नहीं आई है और देश की जनता पूरा सच जानने तक चैन से नहीं बैठेगी.

राहुल गांधी ने एक बयान में कहा,‘भारत के इतिहास में आठ नवंबर की तारीख को हमेशा कलंक के तौर पर देखा जाएगा. दो साल पहले आज के दिन प्रधानमंत्री मोदी ने देश पर नोटबंदी का कहर बरपाया. उनकी एक घोषणा से भारत की 86 फीसदी मुद्रा चलन से बाहर हो गई जिससे हमारी अर्थव्यवस्था थम गई.’

(इनपुट - भाषा)

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