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Pahalgam Attack: पोनी ऑपरेटर्स को QR कोड, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की नजर...पहलगाम अटैक के एक साल बाद कैसा है बैसरन घाटी का हाल?

Pahalgam Attack: सुरक्षा और पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए, प्रशासन ने QR कोड-आधारित ट्रैकिंग के तरीके शुरू किए हैं. ये कोड टैक्सी ड्राइवरों, दुकानदारों, होटल स्टाफ और टूरिस्ट गाइडों को दिए गए हैं. यह सिस्टम GPS-आधारित मॉनिटरिंग की भी सुविधा देता है, जिससे सुरक्षा की एक और परत जुड़ जाती है. 

Pahalgam Attack: पोनी ऑपरेटर्स को QR कोड, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की नजर...पहलगाम अटैक के एक साल बाद कैसा है बैसरन घाटी का हाल?

Pahalgam News: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए उस दुखद आतंकवादी हमले के एक साल बाद, उस घटना की पहली बरसी नजदीक आते ही घाटी में पर्यटन में एक जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी. 2025 में उस घटना के कारण पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई थी. वहीं अब पहलगाम और अन्य मशहूर पर्यटन स्थल फिर से लोगों की चहल-पहल से गूंज रहे हैं, जो पर्यटन के मजबूत वापसी को दर्शाता है.

जैसे-जैसे 22 अप्रैल 2025 के आतंकवादी हमले की पहली बरसी नजदीक आ रही है. एक खास स्मारक पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए उन 26 पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने का एक मुख्य केंद्र बनता जा रहा है.

यह  स्मारक सरकार ने बनवाया है, जिसे अक्सर 'शहीद मार्ग' कहा जाता है. पहलगाम के मशहूर 'सेल्फी पॉइंट' के पास, लिद्दर नदी के किनारे यह बनाया गया है. यह उन 25 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनी वाले की याद में एक स्थायी जगह के तौर पर बनाई गई है, जो बैसरन के मैदान में हुए घात लगाकर किए गए आतंकी हमले में मारे गए थे. 

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इस स्मारक पर उन सभी 26 पीड़ितों के नाम लिखे हैं, जिससे आने वाले लोग फूल चढ़ा सकें, मोमबत्तियां जला सकें और प्रार्थना कर सकें. पहलगाम घूमने आने वाले पर्यटक अब इस 'शहीदी स्मारक' पर रुकना जरूरी समझते हैं. जब वे उन खोए हुए लोगों के नाम पढ़ते हैं, तो उनका मन मौज-मस्ती से हटकर गहरी सोच और शांति की ओर मुड़ जाता है.

शहीद सामरिक पर आए श्रद्धांजलि देने पर्यटक अरुण गोयल ने कहा, 'हम ने यहां देखा तो पता चला कि यह पहलगाम हमले में शहीदों की समारक है, हम यहां आए और उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस स्मारक के यहां होने से वह लोग हमेशा जीवित रहेंगे यह बड़ा समान है उनके लिए.'

पर्यटन को बढ़ावा देते हुए, सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले एक महीने में ही 2.5 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने श्रीनगर के मशहूर 'इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन' का दौरा किया है. यह भारी भीड़ इस बात को उजागर करती है कि कश्मीर आज भी घूमने के लिए एक बेहद आकर्षक और जरूरी जगह पर्यटकों के लिए है. अधिकारियों और स्थानीय लोगों की ओर से इस भारी भीड़ की मौजूदगी को उन आतंकवादियों और उनके सीमा पार बैठे आकाओं को एक करारा जवाब माना जा रहा है, जिनका मकसद यहां की शांति और पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था. 

बड़ी संख्या में वापस लौटे पर्यटक सुरक्षा बलों पर अपना पूरा भरोसा जता रहे हैं. कई पर्यटकों ने बताया है कि उनका यहां आने का फैसला पिछली घटनाओं के बजाए मौजूदा जमीनी हकीकतों पर आधारित है. कई लोगों ने इस इलाके को सुरक्षित बताते हुए यहां के लोगों की  मेहमाननवाजी को सराहा. अगर पर्यटकों के आने के डेटा की तुलना करें, तो पिछले साल अप्रैल में हमले के बाद पहलगाम में 0% बुकिंग थी, और आज अप्रैल में पहलगाम में 90% बुकिंग है. पर्यटकों का कहना है कि माहौल डर से पूरी तरह बदलकर भरोसे वाला हो गया है.

ऑस्ट्रेलिया से आने वाली उरुषा जामवाल ने कहा,'यह इत्तेफाक है हम उन दिनों में यहां पर हैं, जिन दिनों यहां पिछले साल हमला हुआ था. वह काफी गलत था. मगर सच बताएं तो हम चार दिनों से यहां हैं, हमे एहसास भी नहीं हुआ कि यह कश्मीर है और यहां कुछ हुआ था. प्रशासन तो सतर्क है ही मगर स्थानीय लोग काफी सहयोगी दिखे. हम केवल दो महिलाएं आई हैं और हमें कभी नहीं लगा हम अकेले हैं.'

भरोसा बनना और सुरक्षित महसूस होना प्रशासन और स्थानीय समुदाय का भरोसे की कमी को दूर करने और सुरक्षा पक्की करने के लिए उठाए गए कदम का परिणाम है. पहलगाम में सभी पर्यटन सेवा देने वालों के लिए एक अनोखा डिजिटल पहचान सिस्टम (QR कोड) शुरू किया गया है. टूरिस्ट इन कोड को स्कैन करके पोनी ऑपरेटरों, शॉल वेंडरों और दुकानदार मालिकों के अलावा पर्यटन से जुड़े लोगों की सही पहचान, रजिस्ट्रेशन और पुलिस-क्लियरेंस का स्टेटस तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं.

सुरक्षा और पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए, प्रशासन ने QR कोड-आधारित ट्रैकिंग के तरीके शुरू किए हैं. ये कोड टैक्सी ड्राइवरों, दुकानदारों, होटल स्टाफ और टूरिस्ट गाइडों को दिए गए हैं. यह सिस्टम GPS-आधारित मॉनिटरिंग की भी सुविधा देता है, जिससे सुरक्षा की एक और परत जुड़ जाती है. 

पोनी एसोसिएशन अध्यक्ष एजाज अहमद ने कहा,'यह बहुत अच्छा कदम है. पर्यटक खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे. जब उन्हें कोड से मिली जानकारी से पता चलेगा कि जिसके साथ वह जा रहे हैं, वो रजिस्टर्ड है और पुलिस वेरिफाइड भी है. इससे गलत लोग भी दूर रहेंगे और हमारा काम भी बढ़ेगा.'

वहीं, पर्यटक भी मानते हैं कि उन्हें इससे फायदा होगा. साथ ही घूमने-फिरने में भी आजादी होगी. महाराष्ट्र से आए राकेश मनहास ने कहा, 'इससे हम सुरक्षित महसूस करेंगे और खुलकर इस जन्नत का आनंद ले सकते हैं. हमें पता होगा कि हम जिसके साथ हैं, वो पुलिस की तरफ से वेरिफाइड किया गया है और यह हमारी सुरक्षा के एहसास को और बढ़ा देगा.'

हमले के बाद, लगभग 48 पर्यटन स्थलों को सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था. इनमें से ज्यादातर जगहें अब धीरे-धीरे फिर से खुल गई हैं, और सरकार का लक्ष्य है कि  2026 आखिर तक सभी जगहें पूरी तरह से चालू हो जाएं. लेकिन कुछ जगहें, जो घने जंगलों वाले इलाकों में हैं, अभी भी बंद हैं.

बैसरन घाटी, जिसे अक्सर 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहा जाता है, अभी भी आम लोगों के लिए आधिकारिक तौर पर बंद है. जबकि पहलगाम शहर और आस-पास के दूसरे इलाकों में पर्यटन फिर से बढ़ रहा है. यह मैदान, जहां 22 अप्रैल, 2025 को वह दुखद आतंकी हमला हुआ था, सुरक्षा कारणों से अभी भी 'नो-एंट्री जोन' माना जाता है, ऐसा सुरक्षा बलों का कहना है.

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बैसरन की तरफ जाने वाला रास्ता अभी एक ऐसे मोड़ पर रुक जाता है, जहां जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने एक बैरिकेड लगा रखा है, ताकि कोई भी ऊपर की तरफ न जा सके. जो टूरिस्ट कीचड़ भरे रास्ते पर आगे जाने की कोशिश करते हैं, उन्हें पुलिस और CRPF के जवान वापस भेज देते हैं. सुरक्षा कारणों से, इस सुरक्षा बैरिकेड पर फोटो खींचने या शूट करने की भी इजाजत नहीं है. हालांकि, आस-पास की दूसरी जगहें, जैसे बेताब घाटी और अरु घाटी खुली हैं और वहां कड़ी सुरक्षा के बीच पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.

22 अप्रैल, 2025 को हुए उस आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले पहलगाम और कश्मीर घाटी के दूसरे पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बहुत ज्यादा बढ़ा दी गई है. अधिकारी इस बरसी को एक बहुत ही संवेदनशील मौके के तौर पर देख रहे हैं, और किसी भी संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए मल्टी टायर  सुरक्षा व्यवस्था तैनात की है.

QR कोड सिस्टम के अलावा, सुरक्षा बलों ने दिन-रात गश्त बढ़ा दी है. मुख्य टूरिस्ट जगहों पर निगरानी और भी कड़ी कर दी गई है. खुफिया रिपोर्टों के बाद सुरक्षा एजेंसियां ​​हाई अलर्ट पर हैं; इन रिपोर्टों में पर्यटन सेक्टर को फिर से पटरी से उतारने की नई धमकियों की आशंका जताई गई है. जिसके चलते विदेशियों और इमिग्रेशन एक्ट को लागू करने में भी सख्ती बरती जा रही है.

पहलगाम आने वाले पर्यटक को यहां काफी सुरक्षित महसूस हो रहा है. वे इसका श्रेय वहां तैनात सुरक्षा बलों की मौजूदगी और टूरिस्ट जगहों के मुख्य स्थानों पर लगाए गए CCTV कैमरों और FRS (चेहरा पहचानने वाले सिस्टम) कैमरों को देते हैं. चाहे पहलगाम में एंट्री हो या दूसरे पर्यटन स्थल पर, हर जगह चेकिंग पॉइंट्स बनाए गए हैं.

अधिकारी पर्यटन में आई इस तेज़ी को सिर्फ एक आर्थिक रिकवरी के तौर पर ही नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश के तौर पर भी देख रहे हैं. जैसे-जैसे हजारों लोग इस जन्नत की कुदरती खूबसूरती का लुत्फ उठाने के लिए यहां लौट रहे हैं, पहलगाम अब रिकवरी के एक प्रतीक के तौर पर खड़ा है, जहां अब यादें और नई शुरुआत, दोनों साथ-साथ चल रही हैं.

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