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NSA अजीत डोभाल ने कहा- FATF ने पाकिस्तान की पकड़ रखी है गर्दन, भारत का है ये प्लान

एटीएस/एसटीएफ के प्रमुखों की वार्षिक एनआईए बैठक में डोभाल ने कहा, "आज पाकिस्तान पर जो सबसे ज्यादा दवाब है वह एफएटीएफ की कार्रवाई के कारण है. एफएटीएफ ने बहुत दवाब बनाया हुआ है.. 

NSA अजीत डोभाल ने कहा- FATF ने पाकिस्तान की पकड़ रखी है गर्दन, भारत का है ये प्लान
.(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है और इस बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने सोमवार को कहा कि एफएटीएफ की कार्रवाई के कारण पाकिस्तान पर दवाब है. यह संस्थान दुनियाभर में टेरर फंडिंग (आतंकवाद का वित्तपोषण) और धनशोधन पर निगरानी रखती है. एटीएस/एसटीएफ के प्रमुखों की वार्षिक एनआईए बैठक में डोभाल ने कहा, "आज पाकिस्तान पर जो सबसे ज्यादा दवाब है वह एफएटीएफ की कार्रवाई के कारण है. एफएटीएफ ने बहुत दवाब बनाया हुआ है.. अगर आपने (एनआईए और अन्य खुफिया एजेंसियां) सही और सतत जानकारी इकट्ठी की होतीं, तो आप उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी रूप से रख सकते हैं."

उन्होंने कहा कि हर कोई जानता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को सहयोग कर रहा है और वित्तीय मदद कर रहा है. उन्होंने कहा, "लेकिन मुद्दा ये है कि ऐसे (एफएटीएफ जैसे) मंचों पर सिर्फ सबूत पेश किए जा सकते हैं. और यह आप कर सकते हैं, क्योंकि आप इस मामले को जानते हैं और यह जानते हैं कि सूचना को सबूत में कैसे बदला जा सकता है."

डोभाल ने देशभर के जांचकर्ताओं को सहयोग करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि एनआईए उन्हें (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) उन्हें सबूत में बदल सकती है. डोभाल ने कहा कि तथ्यों को कोई नहीं नकार सकता. उन्होंने कहा, "हम किसी विशेष देश को निशाना नहीं बना रहे."

उन्होंने कहा, "हमारा कर्तव्य तथ्यों को सही स्थान पर और सही मंच पर पेश करना है. हमें अपने प्रयास जारी रखने होंगे, जिससे तथ्यों के आधार पर, उन्हें संरक्षित किया जाए और नष्ट ना किया जाए. इन सबूतों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रखें."

उन्होंने कहा, "अगर हम कहते हैं को पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो भी हमें सबूतों की जरूरत है तो सबूत नष्ट ना करें." उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद में संलिप्त पाकिस्तानी लोगों की पहचान और उनकी योजना मीडिया से साझा करने में कोई नुकसान नहीं है.

उन्होंने कहा, "इन सूचनाओं को सिर्फ सरकारी अभिलेखों में रखने से सिर्फ पाकिस्तान का फायदा होगा.. ऐसी रणनीतियां अपनाकर हम आतंकवाद को हरा सकते हैं." एशिया-प्रशांत समूह (एपीजी) उप समूह ने हालांकि सिफारिश की है कि टेरर फंडिंग (आतंकवाद का वित्तपोषण) के खिलाफ कार्रवाई में खराब प्रदर्शन करने के कारण पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया जाना चाहिए, लेकिन एफएटीएफ के उसे ग्रे लिस्ट में रखने की संभावना सबसे ज्यादा है.

एफएटीएफ का प्रमुख वर्तमान में चीन है और मलेशिया, तुर्की के साथ-साथ सऊदी अरब उसके सदस्य हैं. चीन, मलेशिया और तुर्की को पाकिस्तान को काली सूची में डाले जाने के खिलाफ वोट देने की संभावना भी है. एफएटीएफ की बैठक के दौरान काली सूची में डाले जाने से बचने के लिए पाकिस्तान को कम से कम तीन वोट लेने होंगे.

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