close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

इफ्तार पार्टी में पाकिस्तान के लोगों ने मदमस्त बंदरों जैसी हरकत की: शिवसेना

इस्लामाबाद में शनिवार की शाम को इस इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था. उसके लिए आए मेहमानों के साथ पाकिस्तानी अधिकारियों ने अशोभनीय बर्ताव किया. आमंत्रित मेहमानों को होटल के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया. कई लोगों को धमकाकर वापस लौटा दिया गया.

इफ्तार पार्टी में पाकिस्तान के लोगों ने मदमस्त बंदरों जैसी हरकत की: शिवसेना
सामना में शिवसेना पाकिस्तान को निशाने पर लिया है.
Play

मुंबई: पाकिस्तान में इफ्तार पार्टी के दौरान भारतीय अफसरों के साथ हुई बदसलूकी की घटना को शिवसेना ने आड़े हाथों लिया है. शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में छपे आलेख में कहा गया है कि पाकिस्तान की अवस्था शराब पीकर मदमस्त हुए बंदर के समान हो गई है. इस्लामाबाद में हिन्दुस्तानी उच्चायुक्त की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी में मदमस्त बंदरों की ओर से मचाया गया कोलाहल असहनीय है. 

'पाकिस्तान की पूछ कुचलने की जरूरत है'
इस्लामाबाद में शनिवार की शाम को इस इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था. उसके लिए आए मेहमानों के साथ पाकिस्तानी अधिकारियों ने अशोभनीय बर्ताव किया. आमंत्रित मेहमानों को होटल के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया. कई लोगों को धमकाकर वापस लौटा दिया गया. बालाकोट हवाई हमले के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तानियों के डंक को तो कुचला ही है मगर पूंछ अभी भी छटपटा रही है. उस पूंछ का भी अब बंदोबस्त करना पड़ेगा. पुलवामा हमले का बदला हिन्दुस्तान ने लिया. 

पीएम मोदी के दोबारा सत्ता में आने से टेंशन में पाक
पाकिस्तानियों के घर में घुसकर आतंकवादी मारे, उनके अड्डों को ध्वस्त किया. तबसे पाकिस्तान मुंह दबाकर मुक्के की मार बर्दाश्त कर रहा था. ऊपर से हिन्दुस्तान की राजनीतिक मशीनरी ने जोर लगाते हुए मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराया. फूटा हुआ मुंह लेकर पाकियों के लिए दुनिया के सामने आना कठिन हो गया था. उस पर मोदी सरकार एक बार फिर बहुमत से सत्ता में आ गई. इस झटके से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का संभलना मुश्किल है. 

लाइव टीवी देखें-:

पाकिस्तान बातचीत के योग्य नहीं
इमरान ने मोदी को जीत की शुभकामनाएं दीं. उसी तरह दो देश मिलकर विकास और शांति पर काम करें, ऐसी भावना भी उसने जताई है. मगर हकीकत में शनिवार को इस्लामाबाद की इफ्तार पार्टी के मौके पर जो कुछ कराया गया, उसे शांति प्रक्रिया के लिए उठाया गया कदम मानें क्या? पाकिस्तान का दिखावा एक बार फिर सामने आ गया है. पाकिस्तान किसी भी तरह की चर्चा करने योग्य देश नहीं. हिन्दुस्तानी उच्चायुक्त द्वारा आयोजित की गई इफ्तार पार्टी के लिए जो आमंत्रित थे, वे सभी इस्लामाबाद के ‘जाने-माने’ लोग थे. उसमें वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, विचारक, कलाकार तथा प्रशासनिक अधिकारियों का समावेश था. 

'इफ्तार में मसूद अजहर को नहीं बुलाने पर पाक नाराज'
मुख्य बात ये है कि ये सभी पाकिस्तानी नागरिक थे. इस पार्टी के लिए मसूद अजहर छाप जैसे लोगों को नहीं बुलाया गया. संभवत: पाकिस्तान को इसी बात का गुस्सा आया होगा. इन सभी आमंत्रितों को होटल में प्रवेश करने से रोका गया. इतना ही नहीं, अत्यंत अपमानास्पद तरीके से उनकी जांच की गई. आतंकवाद विरोधी दस्ते ने कार्यक्रम स्थल को घेर लिया और सभी आमंत्रितों के साथ इस तरह व्यवहार किया जैसे वे सभी आतंकवादी हों. पाकिस्तान में जो सही मायनों में असली आतंकवादी हैं, वे इनके लाडले हैं. उनके बारे में पाक का आतंकवाद विरोधी दस्ता कमाल की नरमी बरतता है. लेकिन हिन्दुस्तानी उच्चायुक्त द्वारा आयोजित पार्टी के बारे में वो काफी गरम रुख अपनाता है. 

पाकिस्तान से चीन ने भी बनाई दूरी
पठानकोट हमला, उरी का हमला और पुलवामा हमले के सबूत पाक में पाले-पोसे गए आतंकवादियों के पास होने का सबूत देने के बावजूद नवाज शरीफ से लेकर इमरान खान तक किसी ने भी किसी तरह की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.  पठानकोट हमले के बाद दोनों देशों के बीच सभी तरह की चर्चा और व्यवहार बंद है, व्यापार बंद है. खेल तथा सांस्कृतिक संबंध टूट गया है. पाकिस्तान के बारे में चीन भी आज बाड़ पर खड़ा है, यह बात अजहर मसूद के मामले से स्पष्ट है. 

पाकिस्तानी बंदरों ने तमाशा किया
पाकिस्तान कर्ज के बोझ तले कुचला गया है और आतंकवादियों के नंगे नाच के कारण वहां एक तरह की अराजकता पै'ली हुई है. पाकिस्तान देश नहीं बल्कि वैश्विक आतंकवाद की ‘पै'क्ट्री’ बन चुका है. आईएसआई तथा पाकिस्तानी फौज मिलकर पाकिस्तान पर नियंत्रण रख रहे हैं. इमरान खान लोकतंत्र की राह चुनकर आए प्रधानमंत्री हैं, यह भ्रम है. पाकिस्तान के पास नेतृत्व नहीं है, न ही दिशा है इसीलिए इस्लामाबाद में शनिवार को जो कुछ भी घटित हुआ वैसे मामले घटित होते रहते हैं. 

दिल्ली के पाक उच्चायुक्त की इफ्तार पार्टी पर हिंदुस्तान की सरकार ने नियंत्रण लगाया क्योंकि उस पार्टी में कश्मीर के अलगाववादियों के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था. हिंदुस्तान की सार्वभौम स्वतंत्रता को चुनौती देनेवाले पाक उच्चायुक्त को दिल्ली में बुलाकर शीर-कुरमा खिलाने वाले होंगे तो उन्हें रोकना ही पड़ेगा क्योंकि इस्लामाबाद के हिन्दुस्तानी उच्चायुक्त ने ऐसा कुछ भी नहीं किया था. इसीलिए हम कहते हैं पाकिस्तानी बंदरों ने शराब पीकर तमाशा किया है. सरकार इस तमाशे को न भूले.