ISIS का चोला पहने कश्‍मीरी युवकों का आतंकी कर रहे 'बलि के बकरे' की तरह इस्‍तेमाल

कश्‍मीर में पाकिस्‍तानी आतंकी तब-तक जिंदा हैं, जब-तक कश्‍मीरी युवक इनके बहकावे में आकर अपनी कुर्बानी देते रहेंगे.

ISIS का चोला पहने कश्‍मीरी युवकों का आतंकी कर रहे 'बलि के बकरे' की तरह इस्‍तेमाल
गुमराह कश्‍मीरी युवकों का इस्‍तेमाल पाकिस्‍तानी आतंकी अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए करते हैं. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

नई दिल्‍ली: ISIS का चोला पहनकर जम्‍मू और कश्‍मीर में आतंक का पर‍चम लहराने निकले चार आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है. सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए आतंकियों में कोई भी ऐसा नहीं था, जो ISIS का गढ़ कहे जाने वाले सीरिया या किसी दूसरे देश से आया हो. ये सभी आतंकी हम सब की तरह हमारी ही सरजमी के हिस्‍सा थे. अंतर बस इतना था कि कश्‍मीर की आजादी और धर्म के नाम पर इन सब को बरगला कर आतंक के रास्‍ते पर भेज दिया गया था. दरसअल, 'कश्‍मीर की आजादी' के शगूफे के साथ आतंक के रास्‍ते में कूदे ये नौजवान पाकिस्‍तान से आए आतंकियों के लिए बलि के बकरे से ज्‍यादा अहमियत नहीं रखते हैं. कश्‍मीर में एक बकरे (आतंक के रास्‍ते में कूदे नौजवान) की बलि से पाकिस्‍तानी आतंकी को न केवल कई तरह से फायदा होता ही है, बल्कि कश्‍मीर में उनके द्वारा लगाई गई आग पहले से अधिक धधकने लगती है.

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कश्‍मीर की आग में अपने लड़ाकों को नहीं झोंकना चाहते पाक आतंकी
सुरक्षाबल से जुड़े एक वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार पाकिस्‍तानी आतंकियों के लिए घुसपैठ कर भारत आना अब आसान नहीं रहा है. बीते कुछ सालों के दौरान आतंकियों के घुसपैठ की ज्‍यादातर कोशिशें नाकाम रही हैं. वहीं जो पाक आतंकी घुसपैठ कर भारत आने में सफल भी हो गए हैं, वे लगातार मुठभेड़ों में मारे जा रहे हैं. ऐसी स्थिति में पाक समर्थित आतंकी कम से कम पाकिस्‍तानी लड़ाकों को घाटी की आग में झोंकना चाहते हैं. वहीं घाटी में आतंकी गतिविधियों को जारी रखने के लिए विदेशी आतंकियों को स्‍थानीय युवकों में अपना 'बलि का बकरा' नजर आने लगा. जिसके बाद, इन युवकों को कभी आजादी और शोहरत, तो कभी जन्‍नत, हूर और लड़कियों के नाम पर बरगलाया जाने लगा. विदेशी आतंकी अपनी इन कोशिशों में काफी हद तक कामयाब भी रहे. जिसका असर, आजकल हमें घाटी में नजर आ रहा है.

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कश्‍मीरी लड़कों की मौत घाटी में आतंक को रखेगी जिंदा
सुरक्षाबल के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, कश्‍मीर में पाकिस्‍तानी आतंकी तब-तक जिंदा हैं, जब-तक कश्‍मीर युवक इनके बहकावे में आकर अपनी कुर्बानी देते रहेंगे. दरअसल, मुठभेड़ या आतंकी गतिविधि के दौरान स्‍थानीय युवकों के मरने से पाक आतंकियों को दो तरह के फायदे होते हैं. पाकिस्‍तानी आतंकियों का पहला और सीधा फायदा यह है कि आतंकी वारदातों में उनको अपने लड़ाकों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती है. दूसरा फायदा यह है कि कश्‍मीरी युवक की मौत से स्‍थानीय स्‍तर पर आक्रोश फैलता है. इस आक्रोश और संवेदना का भावनात्‍मक फायदा उठाकर पाकिस्‍तानी आतंकी दूसरे स्‍थानीय युवकों को बड़ी आसानी से आतंक के रास्‍ते पर चलने के लिए तैयार कर लेते हैं. बीते दिनों यह देखने को मिला है कि मुठभेड़ में मारे गए कश्‍मीरी मूल के आतंकी का जनाजा उठने से पहले दो स्‍थानीय युवक आतंक का रास्‍ता पकड़ लेते हैं.

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ISIS के चोले से खुश हैं कश्‍मीरी आतंकी
सुरक्षाबल के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, आतंक के रास्‍ते पर निकल चुके कश्‍मीरी युवकों का फायदा ISIS ने भी उठाना शुरू कर दिया है. अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए ISIS इन गुमराह नौजवानों को इंटरनेट के जरिए अपना भड़काऊ साहित्‍य परोसता है. विदेश में बैठे ISIS इंटरनेट कॉल पर इन गुमराह नौजवानों का ब्रेनवाश करते हैं. जिसके बाद इन्‍हें जिंदा बम बनाकर अपने मंसूबों के लिए इस्‍तेमाल करना शुरू कर दिया जाता है. जिंदा बम बन चुके इन स्‍थानीय आतंकियों का रिमोट कंट्रोल पाक समर्थित आतंकियों को सौंप दिया जाता है. जिसके बाद पाक समर्थित आतंकी अपनी मर्जी से इन जिंदा बमों का इस्‍तेमाल करते हैं. ऐसा करने से ISIS का नाम आतंक की दुनिया में कुख्‍यात होता है और बदले में मोटी रकम भी मिलती है.

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ISIS की भर्ती के लिए लड़कियों का भी होता है इस्‍तेमाल
सुरक्षाबल के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि ISIS के इस षड़यंत्र का खुलासा बीते माह फिलीपींस से ISIS के लिए भर्ती करने वाली एक महिला से NIA की पूछताछ में हुआ था. करेन आएशा नामक यह महिला पहले फेसबुक पर कश्‍मीर के युवकों से दोस्‍ती करती थी. दोस्‍ती के बाद ISIS के प्रति युवक की राय जानने के बाद वह युवक का ब्रेनवॉश शुरू करती है. ब्रेन बॉस के लिए झूठी मार्मिक कहानियों सहित कई तरह के लिट्रेचर का इस्‍तेमाल किया जाता है. युवक का पूरी तरह से ब्रेन वॉश करने के बाद यह युवती भारतीय युवकों को ISIS का लड़ाका बनने के लिए उकसाना शुरू कर देती है. आईएसआईएस के एक्टिव ऑपरेटर के तौर काम करने वाले फिलीपींस मूल की इस महिला को भारत की नेशनल इंवेस्‍टीगेटिव एजेंसी (एनआईए) ने फिलीपींस जाकर सलाखों के पीछे भी पहुंचाया था.