सीबीआई निदेशक की नियुक्ति संबंधी विधेयक को संसद की मंजूरी

सीबीआई के वर्तमान निदेशक के कार्यकाल पूरा होने के करीब एक सप्ताह पहले संसद ने आज उस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें एजेंसी का अगला प्रमुख नियुक्त करने वाली समिति में किसी सदस्य के अनुपस्थित होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया को अमान्य करार नहीं दिया जा सकेगा।

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति संबंधी विधेयक को संसद की मंजूरी

नई दिल्ली : सीबीआई के वर्तमान निदेशक के कार्यकाल पूरा होने के करीब एक सप्ताह पहले संसद ने आज उस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें एजेंसी का अगला प्रमुख नियुक्त करने वाली समिति में किसी सदस्य के अनुपस्थित होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया को अमान्य करार नहीं दिया जा सकेगा।

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति समिति में तीन में से किसी एक सदस्य के अनुपस्थित होने पर नियुक्ति अवैध नहीं होने के विधेयक के प्रावधान का बचाव करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए की गयी है कि किसी भी सदस्य की बैठक से अनुपस्थिति से नियुक्ति प्रक्रिया में विलंब न हो।

राज्यसभा द्वारा आज ध्वनिमत से पारित किये गये दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (संशोधन) विधेयक में तीन सदस्यीय चयन समिति में लोकसभा में मान्यता प्राप्त विपक्ष का नेता नहीं होने की स्थिति में सदन की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। चयन समिति में प्रधानमंत्री के अलावा उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अन्य सदस्य हैं। तीसरे सदस्य के रूप में लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के नेता होंगे।

लोकसभा ने इस विधेयक को कल ही मंजूरी प्रदान की थी। उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने सीबीआई निदेशक की नियुक्ति समिति की बैठक में तीनों सदस्यों की उपस्थिति की अनिवार्यता को समाप्त करने के प्रावधान का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इसका मकसद उसे प्रक्रिया से दूर रखना है।

विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में जेटली ने कहा, ‘भारत को एक पेशेवर, स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं संतुलित सीबीआई की जरूरत है। हमारा अनुभव अच्छा नहीं रहा है। हमें नियुक्ति समिति के अंग में विपक्ष का प्रतिनिधित्व रखना चाहिए। यह कदम सीबीआई के सुधार के तहत है। सीबीआई को पक्षपातपूर्ण एजेंसी नहीं होनी चाहिए। यह निष्पक्ष होनी चाहिए और इसमें विपक्ष की भागीदारी होनी चाहिए।’

प्रख्यात वकील एवं मनोनीत सदस्य के टी एस तुलसी सहित कुछ सदस्यों ने ध्यान दिलाया कि लोकपाल कानून में लोकपाल के अध्यक्ष एवं उसके सदस्यों की चयन समिति में रिक्ति का उल्लेख किया गया है। उसमें अनुपस्थिति का उल्लेख नहीं किया गया है। उनकी आपत्तियों के जवाब में जेटली ने कहा कि एक राज्य में विपक्ष के नेता ने इसी प्रकार की एक बैठक में वर्षों तक हिस्सा नहीं लिया जिससे संगठन के लिए चयन प्रक्रिया में काफी विलंब हुआ।

उन्होंने इन आशंकाओं को निर्मूल बताया कि इस प्रकार की बैठक का नोटिस ही विपक्ष के नेता को नहीं भेजा जाये। वित्त मंत्री ने कहा, ‘क्या हम इस प्रकार की स्थिति की कल्पना कर सकते हैं जिसमें प्रधानमंत्री एवं भारत के प्रधान न्यायाधीश इस प्रकार का ‘प्रेषित मान लिया गया नोटिस’ भेजें, क्या भारत के प्रधान न्यायाधीश इसकी मंजूरी दे सकते हैं। मैं आपको आश्वास्त करना चाहता हूं कि इसका मकसद व्यवस्था को मजबूत बनाना है।’

जेटली ने कहा कि सरकार समिति के सदस्यों के प्रति पूरी गरिमा बरतेगी और बैठक आयोजित करने में उनकी सहूलियतों का ध्यान रखा जाएगा। परंपरा के अनुसार सीबीआई निदेशक के पद के लिए छांटे गये नामों की सूची को सदस्यों के पास पहले से ही भेजवा दिया जाएगा।