Amit Shah-Rahul Gandhi Debate: अमित शाह ने कहा कि बिहार में सिर्फ एक ही वोटर की उम्र में गलती थी. चुनावों में सुधार पर चर्चा के लिए सत्र की शुरुआत में दो दिन गतिरोध भी हुआ. इससे एक प्रकार की गैरसमझ, गलत धारणा जनता पर पड़ी कि हम लोग ये चर्चा नहीं चाहते हैं.
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Amit Shah Parliament Speech: चुनाव सुधारों को लेकर लोकसभा के शीतकालीन सत्र में बहस हुई. आठवें दिन गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के तमाम आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश में SIR को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है और कांग्रेस सदन को गुमराह कर रही है.
अमित शाह ने कहा कि बिहार में सिर्फ एक ही वोटर की उम्र में गलती थी. चुनावों में सुधार पर चर्चा के लिए सत्र की शुरुआत में दो दिन गतिरोध भी हुआ. इससे एक प्रकार की गैरसमझ, गलत धारणा जनता पर पड़ी कि हम लोग ये चर्चा नहीं चाहते हैं.
'हम कभी चर्चा से नहीं भागते'
शाह ने कहा, मैं साफ कर देना चाहता हूं कि संसद इस देश की चर्चा का सबसे बड़ी पंचायत है, और हम भाजपा-एनडीए वाले चर्चा से कभी नहीं भागते. कोई भी मुद्दा हो, संसद के नियमों के अनुसार चर्चा के लिए हम तैयार रहते हैं.
गृहमंत्री ने आगे कहा, हमने दो दिन तक विपक्ष से चर्चा की कि इसको दो सत्र बाद किया जाए, लेकिन नहीं माने, तो हमने हां कर दी. इस चर्चा के लिए न बोलने के दो कारण हैं. पहला, वो (विपक्ष) चर्चा SIR के नाम पर चर्चा मांग रहे थे. SIR पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि SIR की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है. भारत का चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त, ये सरकार के तहत काम नहीं करते हैं. अगर चर्चा होती, और कुछ सवाल किए जाएंगे तो इसका जवाब कौन देगा.
'चार महीने से फैलाया गया झूठ'
उन्होंने कहा, चर्चा तय हुई थी चुनाव सुधारों के लिए, लेकिन ज्यादातर विपक्ष के सदस्यों ने SIR पर ही चर्चा की. SIR पर एकतरफा चार महीने से झूठ फैलाया गया और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया. देश के संविधान के अनुच्छेद 324 से चुनाव आयोग की रचना हुई, एक प्रकार से चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है.
संविधान में चुनाव आयोग का गठन, उसकी शक्तियां, चुनावी प्रक्रिया, मतदाता की परिभाषा और मतदाता सूची को तैयार करने और उसे सुधारने का प्रावधान किया गया और प्रावधान जब किया गया तब हमारी पार्टी बनी ही नहीं थी.
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का गठन, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, इन सभी चुनावों का संपूर्ण नियंत्रण चुनाव आयोग को दिया गया है. और चुनाव आयुक्त एक से अधिक हों तो यह नियंत्रण इलेक्शन कमिश्नर को दिया है.
'2004 तक तो किसी ने नहीं किया विरोध'
अमित शाह ने आगे कहा, साल 2004 तक, किसी भी पॉलिटिकल पार्टी ने SIR का विरोध नहीं किया. यह प्रोसेस साफ-सुथरी इलेक्टोरल रोल और एक हेल्दी डेमोक्रेसी बनाए रखने के लिए जरूरी है. अगर इलेक्टोरल रोल, जो चुनाव की नींव है सही और अप-टू-डेट नहीं हैं, तो हम चुनाव प्रोसेस के ट्रांसपेरेंट और फेयर होने की उम्मीद नहीं कर सकते. इसलिए, इलेक्टोरल रोल की समय-समय पर SIR जरूरी हैं. इसी के हिसाब से, इलेक्शन कमीशन ने 2025 में एक SIR करने का फैसला किया है.
'क्या घुसपैठिए तय करेंगे कौन होगा पीएम-सीएम'
गृहमंत्री ने कहा, क्या किसी भी देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है, अगर उस देश का प्रधानमंत्री और राज्य का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह घुसपैठिए तय करें?
एक मतदाता का एक से ज़्यादा जगह वोट नहीं होना चाहिए.
जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनका नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए. ये SIR, मतदाता सूची का शुद्धिकरण है.
इससे कुछ दलों के राजनीतिक स्वार्थ आहत होते हैं. मुझे उन दलों के प्रति एक प्रकार की अनुकंपा भी है, क्योंकि देश के मतदाता तो वोट देते नहीं हैं, कुछ विदेशी देते थे, वो भी चले जाएंगे.