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पवन हंस हेलीकॉप्टर दुर्घटना : दो चालक अब भी लापता

मुंबई तट के निकट अरब सागर में एक पवन हंस हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद भी नौसेना और तटरक्षक बल को खराब दृश्यता के कारण तलाश और बचाव अभियान में बाधा उत्पन्न होने की वजह से दो लापता चालकों का पता लगाने में कोई खास सफलता नहीं मिली है लेकिन उन्हें कुछ मलबा मिला है।

मुंबई: मुंबई तट के निकट अरब सागर में एक पवन हंस हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद भी नौसेना और तटरक्षक बल को खराब दृश्यता के कारण तलाश और बचाव अभियान में बाधा उत्पन्न होने की वजह से दो लापता चालकों का पता लगाने में कोई खास सफलता नहीं मिली है लेकिन उन्हें कुछ मलबा मिला है।

एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा, ‘ हमें दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में सवार दो चालकों का अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन हमें हेलीकॉप्टर का दरवाजा और कुछ मलबा मिला है।’ प्रवक्ता ने बताया कि सुबह धुंध छाए रहने की वजह से खराब दृश्यता के कारण तलाश एवं बचाव अभियान बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। रात में कार्य करने में सक्षम सीकिंग 42 सी हेलीकॉप्टर को दुर्घटना के बाद सेवा में लगाया गया था लेकिन वह बिना किसी परिणाम के आज सुबह लौट आया।

पायलटों की पहचान कैप्टन ई सैमुएल और टी के गुहा के तौर पर हुई है। वर्ष 2001 में बना 14 सीटों वाला वीटीपीडब्ल्यूएफ डाउफिन हेलीकॉप्टर कल शाम सात बज कर 12 मिनट पर ओएनजीसी के एक प्रतिष्ठान से रवाना हुआ और आठ मिनट बाद ही इसका संपर्क टूट गया। दुर्घटना रात को हेलीकॉप्टर को लैंड करने के अभ्यास के दौरान हुई।  

लापता पायलटों एवं मलबे का पता लगाने के लिए खोज एवं बचाव अभियान में जुटी नौसेना और तटरक्षक बल ने कल रात हेलीकॉटर का एक दरवाजा देखा था। दक्षिण मुंबई तट से 82 समुद्री मील की दूरी पर स्थित दुर्घटनास्थल पर नौसेना के दो ‘इमीजिएट सपोर्ट वेसल’ और ओएनजीसी के पोत सेवा में लगाए गए हैं।

हेलीकॉप्टर किसी क्रू ड्यूटी पर नहीं था इसलिए उसमें कोई यात्री नहीं था। ओएनजीसी अपने अधिकारियों को मुंबई से तटीय तेल क्षेत्र लाने- ले जाने के लिए इन हेलीकॉप्टरों को किराये पर लेता है। तलाश एवं बचाव अभियान में मदद करने के लिए ‘डिस्ट्रॉयर आईएनएस मुंबई’ को भी सेवा में लगाया गया है।

तटरक्षक ने कल रात अपने बयान में कहा था कि उसके पोतों को हेलीकॉप्टर का मलबा मिला है लेकिन उन्हें पायलटों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। उसने कहा था कि निगरानी के काम में लगे तट रक्षक डोरनियर से दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद तीन पोतों को बचाव अभियान के लिए सेवा में लगाया गया था।