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Ka 226T हेलीकॉप्टर डील में 'भुगतान' कोई मुद्दा नहीं, अगले सप्ताह तक हो सकता है फाइनलः रूस

ऐसा माना जा रहा है कि अगले सप्ताह पीएम मोदी के रूस दौरे के दौरान KA 226T रूसी हेलीकॉप्टर अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.

Ka 226T हेलीकॉप्टर डील में 'भुगतान' कोई मुद्दा नहीं, अगले सप्ताह तक हो सकता है फाइनलः रूस

मॉस्कोः भारत और रूस के बीच होने वाली डिफेंस डील के लिए भुगतान की प्रक्रिया कोई मु्द्दा नहीं है, साथ रूस ने उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह तक KA 226 टी-रूसी हेलीकॉप्टर अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. डायरेक्टर ऑफ इंटनेश्नल कोऑपरेशन एंड रिजनल पॉलिसी ऑफ रशियन स्टेट और रोस्टेक (Rostec) के विक्टर एन कल्दोव ने कहा, "यह डील बहुत सफलतापूर्वक रही है, पेमेंट का तरीका कोई अधिक मुद्दा नहीं है. हमें बैंकिंग प्रतिबंधों के कारण शुरुआत में कुछ कठिनाइयां थीं. लेकिन फिर हमने G2G (गवर्मेंट टू गवर्मेंट) लेवल पर इसे सुलझा लिया है और हम एक अलग मुद्रा का उपयोग करते हैं." 

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रोस्टेक के कल्दोव ने कहा, "हां, हम उम्मीद कर रहे हैं कि राष्ट्रपति पुतिन और प्रधान मंत्री मोदी के बीच यह मुलाकात K 226 T प्रोजेक्ट में नया विकास लाएगी.यह डील आगे बढ़ेगी." बता दें कि K 226T के बारे में सभी तकनीकी और वाणिज्यिक वार्ता पहले ही समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं. कल्दोव ने कहा, "कोई देरी नहीं है, हमें भारत के रक्षा मंत्रालय से अंतिम हां इंतजार है. सब कुछ तैयार है"बता दें कि रोस्टेक (Rostec)रूस की सभी रक्षा कंपनियों के लिए एक छत्रप के रूप में काम करता है.

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ऐसा माना जा रहा है कि अगले सप्ताह पीएम मोदी के रूस दौरे के दौरान कामोव का -226 या का 226 टी - रूसी हेलीकॉप्टर अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.

भारत रूस ने पिछले साल S400 सौदे की घोषणा की और बाद में अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए भुगतान एक मुद्दा था. भारत को अप्रैल 2023 तक रूसी एस 400 मिल जाएगा. कल्दोव ने कहा, भारत एक शक्तिशाली बड़ा देश है, जो समान रूप से अमेरिका से बात करता है..और जब S400 की बात आती है तो भारतीय सरकार ने अमेरिकी समकक्ष को समझाया कि यह राष्ट्रीय रक्षा के लिए आवश्यक है "

कमोव हेलीकाप्टर वायुसेना और थल सेना दोनों को दिए जाएंगे. वर्ष 2015 में हुए प्रारंभिक समझौते के अनुसार पहले 60 कमोव-226टी हेलीकाप्टर रुस से तैयार हालत में आएंगे. बाकी 140 का विनिर्माण भारत में किया जाएगा.