सीमा से समुद्र तक सब पर रहेगी CDS की पैनी नजर, एक साथ तीनों सेना करेगी दुश्मनों पर वार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनने के दो महीने के अंदर ही भारतीय सेनाएं नए युग में प्रवेश की तैयारी में लग गई हैं.

सीमा से समुद्र तक सब पर रहेगी CDS की पैनी नजर, एक साथ तीनों सेना करेगी दुश्मनों पर वार
सीडीएस जनरल बिपिन रावत.फाइल फोटो

नई दिल्ली: तीनों सेनाओं का एक सेनाध्यक्ष यानि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनने के दो महीने के अंदर ही भारतीय सेनाएं नए युग में प्रवेश की तैयारी में लग गई हैं. तीनों सेनाओं की पहली एयर डिफेंस कमांड इस साल के आखिर तक बन जाने की उम्मीद है. दक्षिण भारत की सुरक्षा एक पेनिनसुलर कमांड (PENINSULAR COMMAND) करेगी. जिसकी जिम्मेदारी पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा भी होगी. थिएटर कमांड बनाने की तैयारियां भी शुरू हो गई है. पूरे जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए एक अलग थिएटर कमांड बनाने के साथ ही साझा ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक कमांड बनाने पर भी प्लान शुरू हो गया है.

सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने बताया कि ये सारे कदम रक्षा बजट को बेहतर ढंग से इस्तेमाल करने में मददगार होंगे. तीनों सेनाओं के पास मौजूद हवाई हमले से सुरक्षा देने वाले उपकरणों को अब एक कमांड के नीचे लाया जाएगा, जिसके मुखिया वायुसेना के उपाध्यक्ष होंगे. ये कमांड पूरे देश को हवाई हमले से सुरक्षा देगी.

हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की सुरक्षा नौसेना की दो कमान पश्चिमी और पूर्वी कमान संभालती है. अब इन्हें एक पेनिनसुलर कमांड (PENINSULAR COMMAND) के तहत लाया जाएगा और इनकी जिम्मेदारी दक्षिण भारत की सुरक्षा की भी होगी. इस कमांड के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम 31 मार्च से शुरू हो जाएगा और एक साल के अंदर कमांड बननी शुरू हो जाएगी. 

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पिछले महीने तमिलनाडु के तंजावुर में ब्रह्मोस से लैस पहली सुखोई की स्क्वाड्रन तैनात की जा चुकी है. जिसकी जिम्मेदारी समुद्र में ऑपरेशन की होगी. इसे नौसेना के उपप्रमुख के नियंत्रण में रखा जाएगा. नौसेना प्रमुख अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सैनिक साझेदारियों की ज़िम्मेदारी पर ज्यादा ध्यान देंगे. 

इस साल के आखिर तक और ज्यादा साझा कमांड के लिए रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू हो जाएगा, जिससे 2021-22 तक थिएटर कमांड शुरू की जा सके. पूरे देश को 2 से लेकर 5 थियेटर कमांड में बांटा जा सकता है. जिनके पास जरूरत के मुताबिक नौसेना, वायुसेना और सेना तीनों ही अंगों की कमान होगी. इससे साझा ऑपरेशनों का नया दौर शुरू हो जाएगा और एक-दूसरे के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो पाएगा. 

चीन और अमेरिका सहित दुनिया की कई महाशक्तियां थिएटर कमांड के तहत ही काम करती हैं. चीन ने भी कुछ समय पहले थिएटर कमांड बनाई हैं. भारतीय सीमा की जिम्मेदारी चीनी सेना की पश्चिमी थिएटर कमांड संभालती है. सबसे संवेदनशील जम्मू-कश्मीर को एक थियेटर के तहत लाया जा सकता है जिसमें नियंत्रण रेखा( LOC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा( IB) दोनों की तरह की सीमा होगी. रसद, आपूर्ति, सप्लाई  के काम के लिए साझा लॉजिस्टिक कमांड की तैयारी भी शुरू हो गई है.

फिलहाल गुवाहाटी, मुंबई और अंडमान में ऐसे लॉजिस्टिक बेस बनाए गए हैं. जहां से तीनों सेनाओं के लिए साझा लॉजिस्टक मुहैया कराए जा रहे हैं. बाद में तीनों सेनाओं को एक ही कमांड से सारे लॉजिस्टिक मिलेंगे. विदेशों में भी लॉजिस्टिक बेस बनाने पर विचार किया जा रहा है जिससे समुद्र में लंबी तैनाती के दौरान जहाज़ों को मरम्मत और रसद के लिए वापस अपने बेस पर न आना पड़े. जनरल रावत ने कहा कि साझा ऑपरेशनों में आसानी के लिए साथ ही ट्रेनिंग होगी जिससे एक-दूसरे के काम करने के तरीकों की जानकारी शुरुआत से ही रहेगी.  

ड्रोन, हेलीकॉप्टर जैसे उपकरण तीनों ही सेनाएं इस्तेमाल करती हैं इसलिए उनकी साझा ट्रेनिंग से खर्च में बचत के अलावा तालमेल बेहतर होगा. इसके लिए एक साझा डॉक्टरिन एंड ट्रेनिग कमांड (COMMON DOCTRINE AND TRAINING COMMAND ) बनाई जाएगी. इस कमांड की जिम्मेदारी ट्रेनिंग के अलावा भविष्य की रणनीति बनाना और उसकी तैयारी करना होगी. वायुसेना अपने फाइटर पायलट्स की ट्रेनिंग भी एक ही बेस में करेगी. इसके लिए ग्वालियर एयरबेस को चुना गया है.