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याचिका में की गई मांग-महिला को अपनी मर्जी से जनन का अधिकार होना चाहिए, SC करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि महिला को अपनी मर्जी से जनन का अधिकार होना चाहिए और एबॉर्शन के लिए सजा के प्रावधान को खत्म किया जाना चाहिए.

याचिका में की गई मांग-महिला को अपनी मर्जी से जनन का अधिकार होना चाहिए, SC करेगा सुनवाई

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि महिला को अपनी मर्जी से जनन का अधिकार होना चाहिए और एबॉर्शन के लिए सजा के प्रावधान को खत्म किया जाना चाहिए. फिलहाल केवल महिलाओं की जीवन को खतरा होने की स्थिति में ही 20 हफ्ते के बाद गर्भपात (अबोर्शन) की इजाज़त है. इस मेडिकल टर्मीनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्‍ट में बदलाव की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दरअसल, 3 महिलाओं की याचिका में कहा गया है कि महिला को बच्चे को जन्म देने पर फैसला लेने का अधिकार होना चाहिए. याचिका में कहा गया कि गर्भपात सिर्फ मां के जीवन बचाने के लिए नहीं हो सकता है. याचिकाकर्ता चाहती हैं कि गर्भपात को अपराधीकरण से बाहर किया जाना चाहिए.

आपको बता दें कि पिछले काफी समय से प्रजनन और गर्भपात को लेकर महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा की जा रही है. कुछ समय पहले एक यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के तत्‍कालीन जज न्यायमूर्ति एके सीकरी ने कहा था कि बच्चे पैदा करना या गर्भधारण रोकना ये सब महिलाओं की पसंद पर निर्भर है और इस पर उनका पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि देश में जब हम प्रजनन अधिकारों की बात करते हैं तो इसका चुनाव करना महिलाओं के पास कम ही होता है. जज जस्टिस एके सीकरी ने आगे कहा कि 21वीं सदी में भी हम मानवता का फल दिलाने में सक्षम नहीं हो सके हैं.

जस्टिस एके सीकरी ने कहा था कि प्रजनन अधिकार असल में मानवाधिकार है और यह व्यक्ति के मान-सम्‍मान पर आधारित है. जब हम प्रजनन के अधिकारों की बात करते हैं तब इससे महिलाओं का अन्य एक अधिकार जुड़ता है और वह है सेक्सुअल अधिकार. भारत में पति या बुजुर्गों के कहने पर बच्चा पैदा होता है. साथ यह भी तय किया जाता है कि लड़का हो लड़की. जज ने आगे कहा कि अगर हम समानता की बात करते हैं तो महिला को पार्टनर के साथ इन सभी पर मिलकर फैसला लेने का अधिकार होना चाहिए.

(इनपुट: सुमित कुमार के साथ)