Corona: सांस की तकलीफ के संकेतों को कैसे पहचानें, जानें कब जाएं अस्पताल

पूरे देश में कोरोना महामारी (Coronavirus) अपने चरम पर है. सभी अस्पताल कोरोना मरीजों से खचाखच भरे हुए हैं. वहीं जो लोग बचे हुए हैं, वे इस बीमारी के नाम से ही डर रहे हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | May 16, 2021, 19:02 PM IST

नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर में लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. इसकी वजह से देश में ऑक्सीजन (Oxygen) की डिमांड बहुत बढ़ गई है. ऐन मौके पर ऑक्सीजन खत्म हो जाने पर अस्पतालों में मौतों के कई मामले भी सामने आए हैं. ऐसे में आपको उन संकेतों को पहचानना (Sign of Shortness of Breath) जरूरी है. जिनसे आप तय कर सकें कि आपको कब मदद की जरूरत है. 

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लोगों में बढ़ती सांस की तकलीफ

Increased shortness of breath in people

सांस की तकलीफ एक ऐसी स्थिति है, जब पीड़ित को लगता है कि वह सामान्य रूप से सांस ले या छोड़ नहीं पा रहा है. मेडिकली बात की जाए तो ऐसी स्थिति को डिस्पेनिया या सांस फूलना कहा जाता है. ऐसी स्थिति में पीड़ित महसूस करता है कि वह अपने फेफड़ों में पर्याप्त हवा नहीं खींच पा रहा है या उसकी छाती में दर्द महसूस हो रहा है. इससे उसे घबराहट बढ़ने लगती है.

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कोरोना महामारी में सांस फूलना खतरनाक

Breathlessness is dangerous in the corona epidemic

कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण होने पर शरीर के सभी अंगों पर असर पड़ता है लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान श्वसन प्रणाली यानी गले और फेफड़ों को होता है. ऐसे में अगर आपकी सांस फूलने लगे तो ये संकेत हो सकता है कि आप वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. अगर आप कोरोना की गिरफ्त में आ चुके हैं तो सांस (Breath) फूलने की तकलीफ के लिहाज से आप हाई रिस्क में आ जाते हैं. वहीं पहले से बीमार, बुजुर्ग, मोटापा या डायबिटीज के रोगियों को भी इसका खतरा ज्यादा होता है. 

 

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हल्की या गंभीर हो सकती है तकलीफ

Trouble may be mild or severe

कोरोना (Coronavirus) संक्रमण में सांस की तकलीफ (Shortness of Breath)) होना एक सामान्य सा लक्षण बन गया है लेकिन यह हमेशा चिंता वाली बात नहीं होती. हालांकि अगर मरीज कोरोना से संक्रमित होने के साथ निमोनिया से भी ग्रसित हो जाए तो फिर परेशानी वाली बात बन जाती है. ऐसे में बीमारी के प्रारंभिक चरण में फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और दूसरे जरूरी अंग भी काम करना कम कर देते हैं. जिससे मरीज को सांस की दिक्कत बढ़ जाती है. 

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बोलने के बीच में रुकना पड़ता है

Have to stop in between

अगर आप कोई वाक्य बोलने के दौरान बीच-बीच में सांस लेने के लिए रुकते हैं तो सांस की तकलीफ (Shortness of Breath) का संकेत हो सकता है. अमूमन कोई व्यक्ति एक वाक्य पूरा बोलने के बाद ही रुकता है. अगर आप हर 2-3 शब्द के बाद रुक रहे हैं तो इसका मतलब ये हुआ कि आपको सांस की दिक्कत हो रही है. ऐसी हालत में मरीजों को सांस से जुड़े व्यायाम करके फायदा हो सकता है. इसके साथ ही शरीर में ऑक्सीजन को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सकीय रूप से स्वीकृत प्रोनिंग विधि को भी अस्थाई राहत के लिए आजमाया जा सकता है. 

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मेंटल कंफ्यूजन, लो बीपी या छाती में दर्द

Mental Confusion, Low BP or Chest Pain

कोरोना (Coronavirus) बीमारी में लोगों को मेंटल कंफ्यूजन, लो बीपी या छाती में दर्द की शिकायत हो सकती है. इसके साथ ही शरीर में ऑक्सीजन का गिरता स्तर, सीने में दर्द, बेचैनी, भ्रम की स्थिति बनना, तेज बुखार या खांसी होना की शिकायत भी हो सकती हैं. अगर आपको ये संकेत दिखाई दें तो समझ जाएं कि मामला गड़बड़ है और तुरंत नजदीकी डॉक्टर को दिखाएं. किसी भी तरह की तकलीफ में मेडिकल हेल्प लेने से परहेज न करें. अगर हालत बिगड़ती दिखाई दे तो मेडिकल ऑक्सीजन लें.