DNA ANALYSIS: कश्मीर के मार्तंड सूर्य मंदिर की 500 साल पुरानी गवाही, मुस्लिम शासकों ने ऐसे तोड़ा मंदिर

आज जब धर्म परिवर्तन की बात हो ही रही है तो हम आपको एक कड़वे सच के बारे में भी बताना चाहते हैं. हम कश्मीर के अनंतनाग में स्थित मार्तंड मंदिर की तस्वीरों की बात करेंगे. इस मंदिर का वैभव सदियों पहले सोने जैसा चमकता था, लेकिन बाद में मुस्लिम शासकों ने इस मंदिर को नुकसान पहुंचाया और कश्मीर में बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन किया गया. यानी धर्म परिवर्तन की ये कोशिशें नई नहीं है, बल्कि इसका इतिहास काफी पुराना है और इसे समझाने के लिए आज हम आपको अनंतनाग के मार्तंड मंदिर में लेकर चलना चाहते हैं.

सुधीर चौधरी | Jun 23, 2021, 10:03 AM IST
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14वीं सदी आते आते हिंदू राजाओं का पतन

martand sun temple kashmir

7वीं से 8वीं शताब्दी के मध्य जब कश्मीर में कार्कोट राजवंश के हिन्दू कायस्थ सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड का शासन था, तब कश्मीर में बड़े स्तर पर मंदिरों का निर्माण हुआ और प्राचीन मंदिरों की रूपरेखा बदली गई. मार्तंड मंदिर, जिसे सूर्य मंदिर भी कहते हैं, उसका निर्माण भी इसी समय में हुआ. हालांकि जिस जगह मंदिर बनाया गया, वहां पहले से सूर्यदेव की पूजा अर्चना होती थी. कार्कोट राजवंश के बाद उत्पल राजवंश के सम्राट अवंतिवर्मन ने कश्मीर पर शासन किया और उनके दौर में भी मार्तंड मंदिर के वैभव को सुरक्षित रखा गया. हालांकि 14वीं सदी आते आते हिंदू राजाओं का पतन होना शुरू हो गया और इस पतन का कारण था मुस्लिम प्रचारकों पर विश्वास करना. 14वीं सदी की शुरुआत में कश्मीर के शासक राजा सहदेव थे और उनके दो विश्वासपात्र थे- एक थे लद्दाख में बौद्ध धर्म के राजकुमार रिंचन शाह और दूसरे थे स्वात घाटी से आए मुस्लिम प्रचारक सिकंदर शाहमीर. ये वही समय था जब मंगोल आक्रमणकारी डुलचू ने 70 हज़ार सैनिकों के साथ कश्मीर पर हमला किया और अपनी जान बचाने के लिए राजा सहदेव को जम्मू के किश्तवाड़ जाना पड़ा और डुलचू ने कश्मीर में हिंदुओं को अपना गुलाम बनाना शुरू कर दिया. हालांकि ऐसा कहा जाता है कि उस समय आई एक प्राकृतिक आपदा में वो अपने कई सैनिकों के साथ मारा गया. मुस्लिम आक्रमणकारियों के लिए कश्मीर पर कब्जा करने का ये बिल्कुल सही समय था और उन्होंने ऐसा किया था. 

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बौद्ध धर्म छोड़ अपना लिया इस्लाम धर्म

martand temple history

बड़ी बात ये है कि उस समय कश्मीर के राजा रामचंद्र को सिंहासन से हटाने के लिए शाहमीर ने लद्दाख के राजकुमार रिंचन शाह के साथ मिल कर षड्यंत्र रचा और उन्हें ये लालच दिया कि अगर वो कश्मीर पर कब्जा करने में उनकी मदद करते हैं तो वो सिर्फ लद्दाख के नहीं, बल्कि कश्मीर के भी राजकुमार नियुक्त होंगे. शाहमीर के इस लालच में लद्दाख के राजकुमार फंस गए और राजा रामचंद्र का कत्ल कर दिया गया. यही नहीं बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले रिंचन शाह का इस कदर हृदय परिवर्तन हुआ कि उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम रिंचन शाह से मलिक सदरुद्दीन रख लिया और इस तरह वो कश्मीर के पहले मुस्लिम शासक बने. सोचिए शाहमीर की बातों से प्रभावित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म छोड़ दिया और इस्लाम धर्म अपना लिया. 

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हिंदुओं के धर्मांतरण और मंदिरों को तोड़ने का काम

martand sun temple forced conversion

हालांकि इस समय तक कश्मीर में हिंदुओं का ज्यादा दमन नहीं होता था और मार्तंड मंदिर की विरासत भी सुरक्षित थी, लेकिन इस दौरान कोई शाहमीर के षड्यंत्र को नहीं समझा और एक दिन शाहमीर ने लद्दाख के राजकुमार को भी कश्मीर की गद्दी से हटा दिया और उस पर खुद बैठ गया और इस तरह शाहमीर के वंशजों ने हजारों वर्षों तक कश्मीर पर शासन किया और यहीं से हिंदुओं के धर्मांतरण और मंदिरों को तोड़ने का काम बड़े पैमाने पर शुरू हुआ. वर्ष 1417 में जब सिकंदर जैनुल आबिदीन इस गद्दी पर बैठा तो उसने हिंदुओं के सामने तीन शर्तें रख दीं-पहली शर्त ये थी कि हिंदू इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लें, दूसरी शर्त थी इस्लाम धर्म नहीं अपनाने पर कश्मीर छोड़ कर भाग जाएं और तीसरी शर्त ये थी कि पहली दो शर्तों को नहीं मानने पर मरने के लिए तैयार हो जाएं और उस समय बहुत से हिंदुओं ने तय किया कि वो मर जाएंगे लेकिन न तो कश्मीर को छोड़ेंगे और न ही इस्लाम धर्म स्वीकार करेंगे. इसी के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर मंदिरों को तोड़ा गया और हिंदुओं को इस्लाम धर्म मानने के लिए उनका दमन किया गया. इस नरसंहार के लिए सिकंदर जैनुल आबिदीन को बुतशिकन भी कहा गया, जिसका अर्थ होता है, मूर्तिभंजक, मूर्ति तोड़ने वाला, मूर्ति पूजा का विरोध करने वाला. जैनुल आबिदीन ने मार्तंड मंदिर पर कई बार हमला किया और 15वीं सदी में इस मंदिर को तोड़कर इसमें आग लगा दी गई.

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खंडहर में तब्दील हुआ मंदिर

martand sun temple ruins

कहा जाता है कि उस समय मंदिर को लकड़ियों से भर दिया गया था और मंदिर दो वर्षों तक जलता रहा था और आज ये मंदिर खंडहर हो चुका है. उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे धर्म परिवर्तन के रैकेट और इतिहास की इस घटना में कुछ और समानताएं भी मिलती हैं. भारत में मुस्लिम शासन पर कई भागों में राजतरंगिणी नाम से पुस्तकें लिखी गई हैं. इनमें द्वितीय राजतरंगिणी पुस्तक लिखने वाले जोनराज ने इसमें सिकंदर जैनुल आबिदीन के शुरुआती शासन का वर्णन किया है जबकि उनके शिष्य शिरावर ने उनके शासन के अंतिम वर्षों का उल्लेख किया है.

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कश्मीर में तोड़े गए ऐसे मंदिरों की संख्या 50 हजार

martand temple history

इन किताबों से एक और किरदार के बारे में पता चलता है, जिसका नाम था सुहा भट्ट. सुहा भट्टा पहला हिन्दू था, लेकिन सिकंदर शाहमीर ने उसे अपने राज्य का प्रधानमंत्री बनाने का लालच दिया और इस लालच के बदले उसका धर्म परिवर्तन कराया. बड़ी बात ये है कि सुहा भट्ट हिंदू से मुसलमान बना और शाहमीर के कहने पर उसने कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार किया और जबरन धर्मांतरण करवाया. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है. जिस व्यक्ति पर धर्म परिवर्तन का रैकेट चलाने का आरोप है, वो पहले हिंदू था, लेकिन फिर इसने इस्लाम धर्म को स्वीकार किया और अब ये धर्मांतरण का रैकेट चलाता है. 17वीं सदी में फारसी भाषा में लिखी गई एक किताब Tarikh-i-Kashmir में भी हिंदुओं पर हुए दमन और मंदिरों के तोड़े जाने की घटनाएं मिलती हैं. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कुछ समय पहले कहा था कि कश्मीर में ऐसे मंदिरों की संख्या 50 हजार है, जिन्हें पूर्व में तोड़ गया और नुकसान पहुंचाया गया और सरकार इन मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है.