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फूलपुर: 'बाहुबली' अतीक अहमद के चुनावी मैदान में उतरने से BJP को होगा फायदा?

अतीक अहमद 2004 में फूलपुर सीट से सपा के प्रत्‍याशी के रूप में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं.

फूलपुर: 'बाहुबली' अतीक अहमद के चुनावी मैदान में उतरने से BJP को होगा फायदा?
अतीक अहमद पिछले साल फरवरी से देवरिया जेल में बंद हैं.(फाइल फोटो)

इलाहाबाद से सटे फूलपुर में 11 मार्च को होने जा रहे लोकसभा उपचुनाव सपा-बसपा की 'दोस्‍ती' और बाहुबली अतीक अहमद के चुनावी मैदान में उतरने के कारण बेहद रोचक हो गए हैं. देवरिया जेल में बंद अतीक अहमद ने यहां से निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में अपना पर्चा भरा है. अतीक अहमद 2004 में फूलपुर सीट से सपा के प्रत्‍याशी के रूप में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. इस बार उनके चुनावी मैदान में उतरने से सपा के वोट बैंक में सेंधमारी के कयास लगाए जा रहे हैं.

दरअसल पहले सपा यह मान रही थी कि फूलपुर में उसका सीधा मुकाबला बीजेपी से होगा लेकिन अतीक अहमद के कारण सपा को लगता है कि उसके अल्‍पसंख्‍यक वोटों का कुछ नुकसान हो सकता है. इलाहाबाद-फूलपुर के मुस्लिम इलाकों में अतीक की अच्‍छी पकड़ के कारण सपा चिंतित है. वो उसको ऐसे 'वोटकटवा' प्रत्‍याशी के रूप में देख रही है जिसका खामियाजा अंतत: सपा को झेलना पड़ेगा. सपा और बीजेपी दोनों ने इस सीट से कुर्मी प्रत्‍याशी उतारे हैं.

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तुरुप का पत्‍ता
सपा और कांग्रेस यह भी आरोप लगा रहे हैं कि वास्‍तव में बीजेपी ने अतीक अहमद को मैदान में उतारा है? उनका तर्क है कि जिस तरह से जेल में बंद अतीक की एकाएक उम्‍मीदवारी सामने आई है, वह बिना सत्‍ताधारी दल के सहयोग के बिना संभव नहीं है. हालांकि अतीक खेमा इस तरह के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे सियासी साजिश करार देता है.

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अतीक अहमद
पिछले साल फरवरी से देवरिया जेल में बंद अतीक अहमद उससे पहले पांच बार एमएलए रहे हैं. उसके ऊपर हत्‍या, हत्‍या के प्रयास, अपहरण जैसे 40 से अधिक केस हैं. उनके ऊपर गैंगस्‍टर एक्‍ट भी लग चुका है. वह और उसके भाई अशरफ बीएसपी एमएलए राजू पाल की हत्‍या के मुख्‍य आरोपी हैं. वह 2004 में सपा के टिकट से फूलपुर से चुने जरूर गए लेकिन अखिलेश यादव के पार्टी की कमान संभालने के साथ ही अतीक की दागी छवि के कारण उनसे नेतृत्‍व ने दूरी बना ली. इस बार निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में अतीक अहमद का चुनाव निशान टेलीविजन है. उल्‍लेखनीय है कि केशव प्रसाद मौर्य के इस्‍तीफे की वजह से यह सीट खाली है.

जाति का गणित
1984-1999 के बीच छह बार लगातार कुर्मी प्रत्‍याशी यहां से जीते हैं. 2004 में अतीक अहमद ने यहां से जीत हासिल कर इस सिलसिले को तोड़ा. इस बार भी सपा ने नागेंद्र पटेल को तो बीजेपी ने वाराणसी के पूर्व मेयर कौशलेंद्र पटेल को यहां से उतारा है. कांग्रेस के प्रत्‍याशी मनीष मिश्रा हैं.