PIB ने बनाया पोर्टल, कोरोना वायरस से जुड़ी मिलेगी सटीक जानकारी

कोविड-19 फैक्‍ट चेक यूनिट नाम से ये पोर्टल 2 अप्रैल की सुबह शुरू हो जाएगा.

PIB ने बनाया पोर्टल, कोरोना वायरस से जुड़ी मिलेगी सटीक जानकारी

नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर चल रही कई फर्जी खबरों के बीच जनता को सटीक जानकारी देने के लिए सरकार ने बुधवार को कई फैसले लिए हैं. इसके तहत सूचना-प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने कोरोना वायरस के संबंध में एक पोर्टल बनाया है. कोविड-19 फैक्‍ट चेक यूनिट नाम से ये पोर्टल 2 अप्रैल की सुबह शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही लोग ई-मेल के माध्‍यम से इसके जरिये कोरोना वायरस के संबंध में जानकारी जुटा सकेंगे. इसके साथ ही कोरोना वायरस से जुड़ी लोगों की किसी भी शंका के समाधान के लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने AIIMS के पेशेवरों का एक टेक्निकल ग्रुप बनाया है.

इसी तरह कैबिनेट सेक्रेट्री ने राज्‍य सरकारों को डिजास्‍टर मैनेजमेंट एक्‍ट के तहत 11 एम्‍पावर्ड ग्रुप्‍स के गठन के बारे में सूचित किया है. कोरोना वायरस से निपटने और विभिन्‍न प्रकार के प्रबंधन के लिए इन ग्रुप्‍स को अधिकार दिए गए हैं. राज्‍यों से भी इसी तरह के तंत्र को विकसित करने को कहा गया है. 

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने माइग्रेंट पर कोरोना वायरस के असर के मनोवैज्ञानिक प्रभावों से निपटने के लिए एक विस्‍तृत गाइडलाइंस जारी की है. इस सिलसिले में राज्‍य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे वालंटियर्स के माध्‍यम से माइग्रेंटस के कल्‍याण के लिए उनको सुपरवाइज करें.

पीआईबी कोरोना वायरस के बारे में सरकार के फैसलों और ताजा प्रगति के बारे में सूचना देने के लिए रोजाना शाम आठ बजे नियमित रूप से एक बुलेटिन भी जारी करेगा. इसके साथ ही पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने कोरोना वायरस की खबर देते समय मीडिया को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश को बुधवार को रेखांकित किया. इसमें प्रिंट, इलेक्‍ट्रॉनिक और सोशल मीडिया सहित मीडिया को जिम्‍मेदारी की प्रबल भावना बरकरार रखने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि ऐसे अप्रमाणित समाचारों का प्रसार न होने पाए, जिनसे दहशत फैल सकती हो.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले पत्र सूचना कार्यालय ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ध्‍यान दिया है कि शहरों में काम करने वाले कामगारों के बड़ी संख्‍या में पलायन का कारण इस फेक न्यूज (फर्जी खबर) के कारण फैली दहशत थी कि लॉकडाउन तीन महीने से ज्‍यादा अवधि तक चलने वाला है.

बयान में कहा गया कि कोर्ट ने गौर किया है कि इलेक्‍ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया द्वारा प्रसारित की जाने वाली फर्जी खबर की अनदेखी कर पाना उसके लिए संभव नहीं है क्‍योंकि इनसे फैली दहशत के कारण पलायन से लोगों की तकलीफें बढ़ गईं. इसके कारण कुछ लोगों को जान तक गंवानी पड़ी.

बयान के मुताबिक, न्‍यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि वह महामारी के बारे में निष्‍पक्ष चर्चा पर दखल नहीं देना चाहता, लेकिन साथ ही कोर्ट ने मीडिया को घटनाक्रमों के बारे में आधिकारिक विवरण का संदर्भ लेने और प्रकाशन करने का निर्देश दिया है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोरोना वायरस की वजह से कामगारों के पलायन को रोकने और 24 घंटे के भीतर इस महामारी से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए एक पोर्टल बनाने का भी केंद्र को निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा कि इस पोर्टल पर महामारी से संबंधित सही जानकारी जनता को उपलब्ध करायी जाए, ताकि फर्जी खबरों के जरिए फैल रहे डर को दूर किया जा सके.