परमाणु सुरक्षा को लेकर मोदी ने दुनिया को बताईं भारत की प्राथमिकताएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परमाणु तस्करी रोकने और परमाणु आतंकवाद प्रतिरोधी प्रौद्योगिकी को तैनात करने सहित परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के क्षेत्रों में अपनी सरकार द्वारा उठायी गई कई पहलों की घोषणा की।

परमाणु सुरक्षा को लेकर मोदी ने दुनिया को बताईं भारत की प्राथमिकताएं

वाशिंगटन : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परमाणु तस्करी रोकने और परमाणु आतंकवाद प्रतिरोधी प्रौद्योगिकी को तैनात करने सहित परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के क्षेत्रों में अपनी सरकार द्वारा उठायी गई कई पहलों की घोषणा की।

मोदी ने यहां आयोजित परमाणु सुरक्षा सम्मेलन के दूसरे एवं अंतिम दिन ये घोषणाएं कीं। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के नेताओं ने शिरकत की थी। भारत 2017 में ‘परमाणु आतंकवाद से मुकाबला के लिए वैश्विक पहल’ की बैठक की मेजबानी करेगा। इसके तहत परमाणु तस्करी से मुकाबले पर इंटरपोल के साथ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की भी योजना है। 

इसके अलावा, भारत परमाणु सुरक्षा कोष में 10 लाख अमेरिकी डॉलर का योगदान करके परमाणु सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करेगा। आईएईए के विशेषज्ञों के साथ ‘अंतरराष्ट्रीय भौतिक संरक्षण आकलन सेवा’ (आईपीपीएएस) पर भारत में एक कार्यशाला भी आयोजित होगी।

दुनिया के नेताओं को अपने द्वारा किए गए उपायों के बारे में सूचित करते हुए मोदी ने बताया कि भारत मजबूत संस्थागत ढांचा, स्वतंत्र नियामक एजेंसी और प्रशिक्षित एवं विशेषीकृत कर्मियों के जरिए परमाणु सुरक्षा को शीर्ष राष्ट्रीय प्राथमिकता प्रदान करता रहेगा। इस योजना में विकास एवं परमाणु आतंकवाद को रोकने एवं उससे रक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल शामिल है।

उन्होंने कहा कि इनमें ढांचागत एवं साइबर अवरोधकों, प्रौद्योगिकीय दृष्टिकोण, निम्न परिष्कृत यूरेनियम और सीजियम 137 जैसे अतिसंवेदनशील रेडियो आईसोटॉप के इस्तेमाल के लिए मेडिकल ग्रेड ‘मोली-99’ के लिए सुविधाओं की स्थापना राष्ट्रीय योजना में शामिल है। रेडियो आईसोटॉप ‘सीजियम 137’ का इस्तेमाल कैंसर के उपचार के लिए मेडिकल थेरेपी, औद्योगिक रेडियोथेरेपी, विकिरण मापने, खाद्य विकिरण और मृदा परीक्षण में होता है।

मोदी ने कहा कि भारत परमाणु तस्करी का मुकाबला और राष्ट्रीय स्तर पर परमाणु एवं रेडियोधर्मी सामग्री का पता लगाने वाले संस्थान को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए एक समर्पित परमाणु तस्करी-रोधी टीम का गठन किया गया है। राष्ट्रीय कार्य योजना के मुताबिक, भारत की निर्यात नियंत्रण सूची और दिशानिर्देशों को परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) के नियमों के अनुरूप बनाया गया है और भारत निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं की सदस्यता के जरिए साझा परमाणु अप्रसार उद्देश्यों के लिए अपने योगदान को मजबूत करने की दिशा में आशान्वित है।

इसके तहत, देश में परमाणु सुरक्षा ढांचा को मजबूत किया जा रहा है और भारत वैश्विक स्तर पर सुरक्षा ढांचा को मजबूती प्रदान करने में हिस्सा ले रहा है। इसके अनुसार, भारत ने 2005 में ‘सामूहिक विनाश के हथियार एवं वितरण प्रणाली अधिनियम, 2005’ को लागू किया, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) प्रस्ताव 1540 के तहत भारत के दायित्वों को प्रभावी करता है।

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