SCO बैठक में भाग लेने के लिए अस्ताना पहुंचे PM मोदी, भारत को मिलेगी सदस्यता

SCO बैठक में भाग लेने के लिए अस्ताना पहुंचे PM मोदी, भारत को मिलेगी सदस्यता
SCO बैठक में भाग लेने के लिए अस्ताना पहुंचे PM मोदी, भारत को मिलेगी सदस्यता (फोटोः pmo)

अस्तानाः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ)  में भाग लेने के लिए आज (गुरुवार को) दो दिन की यात्रा पर यहां पहुंचे. कजाकिस्तान की राजधानी में आयोजित इस सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान को औपचारिक रूप से पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा. वर्ष 2001 में इस संगठन की स्थापना के बाद पहली बार इसका विस्तार किया जा रहा है. चीनी प्रभुत्व वाले इस समूह में भारत के प्रवेश को एक बडी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि ऐसी उम्मीद है कि इससे क्षेत्रीय भू.राजनीतिक और व्यापार वार्ताओं में समूह का महत्व बढ़ेगा तथा इसका अखिल एशियाई दायरा बढ़ेगा.

पीएम मोदी शुक्रवार को SCO सम्मेलन को संबोधित करेंगे

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के शामिल होने से समूह में चीन के व्यापक प्रभाव में कमी आ सकती है. प्रधानमंत्री कल (शुक्रवार को) समूह के सम्मेलन को संबोधित करेंगे और उनके चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात करने की भी संभावना है. उनकी मुलाकात ऐसे समय होगी जब कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच के मतभेदों में वृद्धि हुयी है. इन मुद्दों में चीन.पाकिस्तान आर्थिक गलियारा और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता का प्रयास शामिल हैं.

अगर दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो यह पिछले महीने संपन्न चर्चित ‘‘बेल्ट एंड रोड फोरम’’ का भारत द्वारा बहिष्कार किए जाने के बाद उनकी यह पहली भेंट होगी. उस बैठक में विश्व के 29 नेताओं ने भाग लिया था. भारत ने 50 अरब डालर की चीन.पाकिस्तान आर्थिक गलियारा को लेकर अपनी चिंताओं को रेखांकित करने के लिए उस सम्मेलन में भाग नहीं लिया था. यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरती है.

पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ से हो सकती है मुलाकात

ऐसी अटकलें हैं कि इस सम्मेलन से इतर दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच मुलाकात हो सकती है. हालांकि भारत का कहना है कि मोदी-शरीफ मुलाकात के लिए न तो पाकिस्तान की ओर से अनुरोध किया गया है और न ही भारत की ओर से.

चीनी राष्ट्रपति कल यहां पहुंचे जबकि मोदी आज पहुंचे. प्रधानमंत्री के कई विदेशी नेताओं से भी मिलने की संभावना है. इनमें कजाक राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरवायेव शामिल हैं प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा से पहले कहा, ‘‘मैं एससीओ के साथ भारत के जुड़ाव को और गहरा बनाने के प्रति आशावान हूं जिससे हमें आर्थिक, संपर्क और आंतकवाद विरोधी सहयोग के साथ अन्य चीजों में भी मदद मिलेगी.’’ 

एससीओ के महासचिव राशिद अलीमोव ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के प्रवेश से मौजूदा चुनौतियों से निपटने तथा क्षेत्र में व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने में एससीओ के प्रभाव में वृद्धि होगी भारत और पाकिस्तान का समूह में प्रवेश होने का अर्थ अन्य 1.45 अरब लोगों का इससे जुड़ना होगा. इससे समूह का दायरा वैश्विक आबादी के 40 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच जाएगा.

क्या शंघाई सहयोग संगठन यानि SCO

एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने की थी. भारत, ईरान और पाकिस्तान को 2005 के अस्ताना सम्मेलन में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया गया था. 2010 में ताशकंद में संपन्न सम्मेलन में नयी सदस्यता पर लगी रोक हटा ली गयी थी. इससे समूह के विस्तार का रास्ता साफ हो गया था.

SCO में बढ़ेगा भारत का कद !

भारत का मानना है कि एससीओ सदस्य के रूप में वह क्षेत्र में आतंकवाद के खतरे से मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. भारत एससीओ तथा उसके क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढांचे :आरएटीएस: के साथ अपने सुरक्षा संबंधी सहयोग को भी आगे बढ़ाने को लेकर उत्सुक है. आरएटीएस विशेष रूप से सुरक्षा एवं रक्षा से संबंधित मुद्दों से निपटता है. भारत 2005 से समूह में पर्यवेक्षक रहा है और वह आमतौर पर समूह की मंत्री.स्तरीय बैठकों में भाग लेता रहा है जो मुख्य रूप से क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर जोर देता रहा है. रूस एससीओ में भारत की सदस्यता का हामी रहा है जबकि चीन समूह में पाकिस्तान को शामिल किए जाने पर बल देता रहा है.