Tamil Nadu elections: 2026 में असम, बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में चुनाव हैं. बीजेपी का फोकस असम और बंगाल जीतने पर ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु पर भी है. पीएम मोदी को उम्मीद है कि 12 ज्योतिर्लिगों में से पहले 'सोमनाथ' में आयोजित 'स्वाभिमान पर्व' से तमिलनाडु के रामेश्वरम तक भगवा लहराएगा, इससे तमिलनाडु में बीजेपी की स्थिति मजबूत हो सकती है.
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PM Modi Somnath Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन के गुजरात के दौरे पर हैं. पीएम मोदी के गुजरात प्रवास का सबसे बड़ा कार्यक्रम 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' है. यह उत्सव सोमनाथ की गाथा को आज की युवा पीढ़ी के सामने रखने और सोमनाथ की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद करने का एक प्रयास है. इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर प्रधानमंत्री मोदी एक बड़ा राजनीतिक लक्ष्य भी साध रहे हैं. गुजरात का दौरा करके प्रधानमंत्री मोदी सीधा दक्षिण में स्थित तमिलनाडु पर निशाना साध रहे है. ये दौरा देश के पश्चिम क्षेत्र से दक्षिण क्षेत्र के लोगो को कनेक्ट करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
टूटा फिर खड़ा हुआ...
आज भव्य और दिव्य दिखने वाला यह सोमनाथ मंदिर कई बाधाओं का सामना कर, कई बार खंडित होकर फिर से उठकर खडा हुआ है. यह स्थान भारत की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है. सोमनाथ के इसी इतिहास को जनता तक पहुंचाने और मंदिर की रक्षा करते हुए शहीद हुए सपूतों को श्रद्धांजलि देने के लिए 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन किया गया है. इस आयोजन में खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो रहे हैं.
1000 साल पहले महमूद गजनवी ने लूटा
1026 में महमूद गजनवी ने इस मंदिर और हिंदुओं की आस्था पर आक्रमण किया. गजनवी ने मंदिर को तो क्षतिग्रस्त किया, लेकिन वह हिंदुओं की आस्था को नहीं तोड़ सका. इसी अटूट आस्था का परिणाम है कि तमाम आक्रमणों के बावजूद आज सोमनाथ के शिखर पर धर्म की ध्वजा शान से लहरा रही है.
सोमनाथ की शरण में मोदी
प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की शरण में खुद देश के प्रधानमंत्री आए हैं, जिससे इस उत्सव का महत्व समझा जा सकता है. लेकिन पीएम मोदी के इस सोमनाथ प्रवास का एक राजनैतिक उद्देश्य भी है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, ऐसे में पीएम मोदी इस दौरे के जरिए उन गुजरातियों को आकर्षित करना चाहते हैं जो तमिलनाडु में बस गए हैं. गुजरातियों के तमिलनाडु में बसने का इतिहास बहुत दिलचस्प है और सोमनाथ से जुड़ा हुआ भी है.
तमिलनाडु के 12 लाख 'गुजरातियों' पर फोकस!
तमिलनाडु में 12 लाख गुजराती रहते हैं. इन गुजरातियों ने खासकर सौराष्ट्र के निवासियों ने 11वीं शताब्दी में दक्षिण भारत की ओर पलायन किया था. यह वह समय था जब महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर आक्रमण कर मंदिर को भारी नुकसान पहुंचाया था. जब गजनवी ने गुजरात में कहर बरपाना शुरू किया, तब खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए सौराष्ट्र के अनगिनत ब्राह्मणों ने दक्षिण भारत की ओर रुख किया और वे तमिलनाडु के मदुरै, तंजावुर और सलेम में जाकर बस गए.
कौन हैं सौराष्ट्रियन तमिल?
सदियों पहले सौराष्ट्र से कई लोग तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में जाकर बस गए थे. ये लोग आज भी 'सौराष्ट्रियन तमिल' के रूप में जाने जाते हैं. गुजरात सरकार ने कुछ समय पहले 'सौराष्ट्र तमिल संगम' कार्यक्रम के जरिए तमिलनाडु और गुजरात के बीच संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया था. इस कार्यक्रम के दौरान गुजरात के नेताओं ने तमिलनाडु में रोड शो भी किए थे.
तमिलनाडु में बसे गुजरातियों को उनकी मातृभूमि से जोड़ने के लिए सरकार ने करीब ढाई साल पहले 'सौराष्ट्र-तमिल संगमम' का आयोजन किया था. उस समय तमिलनाडु से कई लोग सोमनाथ की धरती पर आए थे. तब उन्होंने अपनी मातृभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया था. प्रधानमंत्री मोदी के सोमनाथ प्रवास को भी इसी प्रयास की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
बीजेपी का लक्ष्य सिर्फ बंगाल और असम पर नहीं तमिलनाडु भी
2026 में असम, बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में चुनाव हैं. बीजेपी का फोकस असम की सत्ता बरकरार रखने और बंगाल जीतने पर ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु और केरल पर भी है. भारतीय जनता पार्टी, तमिलनाडु में पैठ बनाकर खुद को मजबूत करना चाहती है.
बीजेपी को उम्मीद है कि भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिगों में से पहले 'सोमनाथ' धाम में हो रहे 'स्वाभिमान पर्व' के कार्यक्रम से तमिलनाडु में स्थित सातवें ज्योतिर्लिंग रामनाथस्वामी यानी रामेश्वरम धाम तक हिंदुत्व, सनातन और भगवा की बयार बहेगी. ऐसे में सौराष्ट्र के सोमनाथ में आयोजित हो रहा कार्यक्रम तमिलनाडु में बीजेपी की स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है. (इनपुट: फाल्गुनी लाखाणी)