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PM मोदी ने लॉन्च की 'स्टार्टअप इंडिया' योजना; बताया एक्शन प्लान, 3 साल तक आयकर और निरीक्षण से होगी छूट

युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और जमीनी स्तर पर उन्हें सुविधाएं जुटाने में सहायता करने लिये केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'स्टार्ट अप इंडिया' का शनिवार को आगाज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में योजना की विधिवत शुरुआत कर इसका एक्शन प्लान लॉन्च किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के लिये स्टार्ट अप्स के लिये कई योजनाओं की घोषणा की।

PM मोदी ने लॉन्च की 'स्टार्टअप इंडिया' योजना; बताया एक्शन प्लान, 3 साल तक आयकर और निरीक्षण से होगी छूट
'स्टार्ट अप इंडिया' का हुआ आगाज, प्रधानमंत्री ने लॉन्च किया एक्शन प्लान (फोटो सौजन्यः वीडियो स्टिल)
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नई दिल्ली : शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नये उद्योगों के लिये प्रोत्साहित करने के अपने महत्वाकांक्षी 'स्टार्टअप इंडिया अभियान' का एक्शन प्लान जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई घोषणाएं कीं। इस दौरान मोदी ने युवाओं से एक बार फिर 'नौकरी मांगने की बजाय नौकरी देने' का माद्दा रखने का आह्वान किया।

70 साल में हमने बहुत किया और अब कहां हैं?

इन उद्यमों को देश में संपत्ति और रोजगार सृजन करने वाले अहम क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। एक्शन प्लान रिलीज करते हुए प्रधानमंत्री ने कई बार चुटीले अंदाज में भी बातें कीं। उन्होंने कहा- '70 सालों में हमने बहुत कुछ किया है और हम कहां पहुंचे। अब आप ये बताएंगे कि सरकार को क्या नहीं करना है। फिर आप देश को कहां से कहां ले जाएंगे।' उन्होंने कहा कि सरकार बीच में ना आएं तो बहुत कुछ किया जा सकता है।

स्टार्ट अप्स के लिये ये है मोदी का एक्शन प्लान

- तीन साल तक स्टार्ट अप यूनिट से होने वाली आय पर टैक्स छूट
- ऐसे उद्यमों में वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिये किये गये निवेश के बाद अपनी संपत्ति बेचने पर 20 फीसदी की दर से लगने वाले पूंजीगत लाभ पर टैक्स से छूट होगी।
- यह छूट सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त उद्यम पूंजीकोषों के निवेश पर भी उपलब्ध होगी।
- स्टार्टअप में टैक्स छूट उचित बाजार मूल्य के ऊपर निवेश पर दी जाएगी। आयकर कानून के तहत कंपनी के उचित बाजार मूल्य से उपर मिलने वाले वित्तपोषण पर प्राप्तकर्ता को टैक्स देना होता है।
- उद्यमों को तीन साल तक निरीक्षण से मुक्ति मिलेगी।
- वित्तपोषण के लिये 10 हजार करोड़ रुपये का कोष स्थापित होगा।
- नौ श्रम और पर्यावरण कानूनों के अनुपालन के लिये स्व:प्रमाणन का ऐलान हुआ।
- स्व-प्रमाणन आधारित अनुपालन व्यवस्था से स्टार्टअप पर नियामकीय बोझ कम होगा। यह व्यवस्था कर्मचारियों को ग्रेच्युटी भुगतान, ठेका कर्मचारी, कर्मचारी भविष्य निधि कोष, पानी और वायु प्रदूषण कानूनों के मामले में उपलब्ध होगी।
- देश में इनोवेटिव सोच के साथ आने वाले तकनीक आधारित उद्यमों के लिये उदार पेटेंट व्यवस्था होगी।
- पेटेंट पंजीकरण में इन उद्यमों को पंजीकरण शुल्क में 80 फीसदी की छूट दी जायेगी।
- इन उद्यमों को सरकारी खरीद, ठेके आदि के कई मानदंड में भी छूट मिलेगी।
- स्टार्ट अप उद्यमों को सरकारी ठेकों में अनुभव और कारोबार सीमा के मामले में छूट दी जाएगी।
- प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दिवाला कानून में स्टार्ट अप उद्यमों को कारोबार बंद करने के लिये सरल निर्गम विकल्प देने का प्रावधान भी किया जाएगा। इसके तहत 90 दिन की अवधि में ही स्टार्ट अप अपना कारोबार बंद कर सकेंगे।
- वैश्विक स्तर पर पहचाने बनाने लायक स्टार्ट अप्स को चयनित कर सरकार 10 करोड़ रुपये की मदद देगी।
- वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये 10 हजार करोड़ के डेडिकेटेड फंड की व्यवस्था होगी।
- कोष का प्रबंधन निजी क्षेत्र के पेशेवर करेंगे जबकि जीवन बीमा निगम इस कोष में सह-निवेशक होगा।
- स्टार्ट अप के लिये बनाए गये ऋण गारंटी कोष से बैंकिंग प्रणाली से भी स्टार्टअप के लिये उद्यम ऋण का प्रवाह होगा। इस कोष से जोखिम के बदले गारंटी उपलब्ध हो सकेगी।
- सरकार की ओर से एक राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्ट कंपनी बनाने का प्रस्ताव है जिसमें अगले चार साल तक सालाना 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया जायेगा।
- स्टार्ट अप की फीस में 80 फीसदी कम होगी। सरकारी खरीद में स्टार्ट अप को छूट मिलेगी।
- 1 अप्रैल से स्टार्ट अप का फॉर्म मोबाइल एप्लीकेशन पर उपलब्ध होगा। साथ ही आईपीआर स्कीम भी लॉन्च की जाएगी।

भारत में स्टार्टअप पर खास जानकारी

- दुनियाभर में स्टार्टअप की तीसरी बड़ी संख्या भारत में है। 
- साल 2010 में भारत में 480 स्टार्ट अप थे।
- साल 2014 में स्टार्ट अप के जरिये 65 हजार लोगों को रोजगार मिला।
- स्टार्टअप में कर्नाटक, राजस्थान और आंध्र प्रदेश सबसे आगे हैं।

नये स्टार्ट अप्स के लिये प्रधानमंत्री का आइडिया

- साइबर सिक्योरिटी आज दुनिया की सबसे बड़ी चिंता है। भारत को इस क्षेत्र में काम करना चाहिये।
- हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के लिये भी एप्लीकेशन तैयार करना चाहिये, ताकि इन उत्पादों का निर्माण करने वालों से सीधे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी।
- स्टार्टअप की दुनिया सिर्फ तकनीकी से नहीं इसके अलावा भी बहुत कुछ किया जा सकता है।
- आईटी के दायरे से बाहर निकल कर भी इनोवेशन करना होगा। भारत जैसा 'जुगाड़' दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा। लेकिन हम जुगाड़ से सिर्फ अपनी समस्या का समाधान करते हैं, सबके लिये समाधान पर काम करना होगा।
- बड़ी मात्रा में अनाज, फल-फूल, सब्जियां खराब हो जाती हैं। हमें ऐसी टेक्नोलॉजी पर ध्यान देना होगा जिससे इनका संरक्षण किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो दुनियाभर में करोड़ों लोगों का पेट भर जाएगा।

'स्टार्ट अप' पर क्या बोले दिग्गज

राष्ट्रपति बोले देरी के लिये मैं भी जिम्मेदार

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी स्टार्ट अप अभियान का स्वागत करते हुए कहा कि यह बहुत पहले ही होना चाहिए था। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इस देरी के लिए मैं भी जिम्मेदार हूं क्योंकि मैं भी काफी समय तक प्रशासन में रहा हूं।  भारत को अगले 10-15 वर्षों तक 10 फीसदी की दर से विकास करने की जरूरत है ताकि देश को गरीबी रेखा से ऊपर लाया जा सके और शिक्षा, स्वास्थ्य, ढांचागत सुविधा और नौकरियों जैसी न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

बजट में होगी अनुकूल कर प्रणाली की घोषणा-जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार सुबह स्टार्ट अप इंडिया अभियान की शुरुआत करते हुए कहा- 'स्टार्ट अप मूवमेंट के तहत ज़मीनी स्तर पर उद्यमों और युवा उद्यमियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। सरकार अगले महीने बजट में एक अनुकूल कर प्रणाली की घोषणा करेगी, जिससे देश में स्टार्ट अप स्थापित करने को प्रोत्साहन मिलेगा। हमने उद्योगों के अनुकूल कर प्रणाली पर काम किया है।' जेटली ने स्टार्ट अप यूनिट्स को बैंकिंग प्रणाली और सरकार दोनों के माध्यम से संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया और कहा कि इस खंड के कारोबारी या मैनुफेक्चरिंग कंपनियों (विनिर्माण प्रतिष्ठान) के वित्तपोषण से अगले दो साल में तीन लाख से ज्यादा नये उद्यमी तैयार होंगे। साथ ही उन्होंने इसे लाइसेंस राज के खात्मे की ओर आखिरी कदम बताया।

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