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PM मोदी ने चला कूटनीति का ब्रह्सास्त्र, भारत-चीन की वार्ता से छूटे पाकिस्तान के पसीने

आतंकी साज़िशों पर पाकिस्तान को अब चीन का भी कोई कूटनीतिक समर्थन नहीं मिलने वाला है. 

PM मोदी ने चला कूटनीति का ब्रह्सास्त्र, भारत-चीन की वार्ता से छूटे पाकिस्तान के पसीने
महाबलीपुरम अध्याय में पीएम मोदी ने कूटनीति का ब्रह्सास्त्र चलकर उस समर्थन का अंत कर दिया है.

चेन्नई: भारत-चीन की वार्ता से पाकिस्तान के पसीने छूट गए हैं. आतंकवाद पर पाकिस्तान को चीन से अब तक जो समर्थन मिलता रहा है, महाबलीपुरम अध्याय में पीएम मोदी ने कूटनीति का ब्रह्सास्त्र चलकर उस समर्थन का अंत कर दिया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी पीएम मोदी के स्वागत सत्कार की जमकर तारीफ की.  उन्होंने कहा कि वह भारत में मिले सम्मान से अभिभूत हैं

इसके बाद दोनों नेताओं में व्यापार और संस्कृति पर बात हुई. फिर सबसे बड़े मुद्दे की बारी आई जिसपर खास तौर से भारत-चीन से गंभीर वार्ता करना चाहता था. ये मुद्दा था आतंकवाद का. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों ही वर्ल्ड लीडर इस बात पर सहमत हुए कि मौजूदा दुनिया में आतंकवाद और कट्टरपंथ सबसे बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के उपाय तलाशना भारत चीन दोनों के लिए बहुत ज़रूरी है. 

यकीन मानिए, आतंकवाद पर बात यहीं पर खत्म नहीं हुई. इसके बाद मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने पहली बार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकवादी संगठन लश्कर और जैश की साज़िशों का मुद्दा भी उठाया. चीन के सामने पाकिस्तान के आतंकी चेहरे की पोल खोलकर रख दी. 

विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि ISI और लश्कर जैसे वैश्विक ख़तरे के बारे में बात हुई, लेकिन अन्य दूसरे मुद्दों की वजह से इस पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं हुई. मुख्य रूप से दोनों देश कट्टरपंथ को नहीं बढ़ने देने पर सहमत हैं. 

कोव रिजॉर्ट में मोदी-जिनपिंग की इस बातचीत से पाकिस्तान यकीनन परेशान हो उठा होगा क्योंकि ये वही पाकिस्तान है, जिसके हर आतंकी हरकतों पर चीन अब तक संयुक्त राष्ट्र तक पर्दा डालता रहा है और जिनपिंग के भारत दौरे से पहले पाकिस्तान के पीएम इमरान खान बाकायदा बीजिंग भी हो आए थे. जिसके बारे में खुद जिनपिंग ने आज पीएम मोदी को बताया. 

भारत-चीन के बीच आतंकवाद के खिलाफ जो बातें हुईं हमने आपको सबसे बड़ी कवरेज में उसकी पूरी जानकारी दी, लेकिन इसका मतलब भारत के लिए क्या है, चीन के लिए क्या है, और पाकिस्तान के लिए इस बातचीत में क्या सबक छिपा है, ये भी हमें और आपको समझना होगा. पहली बड़ी बात- आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में चीन अब भारत का साथ दे सकता है.

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दूसरी बड़ी बात- आतंकी साज़िशों पर पाकिस्तान को अब चीन का भी कोई कूटनीतिक समर्थन नहीं मिलने वाला है. और तीसरी बड़ी बात- पाकिस्तान ने अगर भारत में फिर से पुलवामा जैसा आतंकी हमला कराया, तो इस बार खुद चीन पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखा सकता है, इसकी उम्मीद इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि महाबलीपुरम में सदी के दो सबसे बड़े साझेदारों ने पहली बार मिलकर आतंकवाद पर सबसे बड़ा प्रहार किया है और इस सबसे बड़े प्रहार के बाद पाकिस्तान को हद में रहना ही होगा.