पीएम मोदी देश में घृणा फैलाते हैं, लोगों को बांटते हैं: सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर विदेश दौरों के दौरान बड़े बड़े बयान देने और देश में घृणा फैलाने का आरोप लगाया, साथ ही असम में मतदाताओं को सचेत किया कि भाजपा की कथित साम्प्रदायिक राजनीति का नियंत्रण नागपुर से होता है।

पीएम मोदी देश में घृणा फैलाते हैं, लोगों को बांटते हैं: सोनिया गांधी

सारूखेतरी (असम) : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर विदेश दौरों के दौरान बड़े बड़े बयान देने और देश में घृणा फैलाने का आरोप लगाया, साथ ही असम में मतदाताओं को सचेत किया कि भाजपा की कथित साम्प्रदायिक राजनीति का नियंत्रण नागपुर से होता है।

निचले असम के बारपेटा जिले में सारूखेतरी क्षेत्र में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि मोदीजी जब विदेश जाते हैं तब सबको गले लगाते हैं और आवाम को लेकर बड़ी बड़ी बातें करते हैं पर देश में वापस आकर नफरत फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि असम में सांप्रदायिकता का खतरा बढ़ रहा है क्योंकि भाजपा साम्प्रदायिकता फैलाने और समाज को बांटने में लगी हुई है जो सदियों से प्रेम, शांति और सौहार्द के सिद्धांत से रह रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि असम सौहार्द का जगमगाता उदाहरण है जहां के लोग शंकरदेव और अजान फकीर के उपदेशों का अनुसरण करते हैं। मोदीजी और उनके मंत्री राज्य में झूठे वादे कर रहे हैं और लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा की साम्प्रदायिक राजनीति का नियंत्रण नागपुर से होता है और यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस की विकास की योजना में हमेशा सभी धर्मो, जातियों और पंथों के लोगों को शामिल किया जाता था और सभी दलों को साथ लेकर चला जाता था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जोड़ने का काम करती है, भाजपा तोड़ने का काम। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का संविधान और लोकतंत्र में विश्वास नहीं है और असम में कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने और अरूणाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड की चुनी हुई सरकारों को हटाने से स्पष्ट होता है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री हमारी आवाज दबाने को उत्सुक हैं और संविधान पर हमला करने वालों को नहीं रोक रहे हैं। वे हमारे देश की परंपराओं को भूल गए हैं। वे हमारी गंगा जमुनी तहजीब को भूल गए हैं। और हमारी परंपराओं का माखौल उड़ा रहे हैं।