प्रधानमंत्री मोदी की Startup India योजना, सिर्फ 6 साल में कितना बदला इंडिया?
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प्रधानमंत्री मोदी की Startup India योजना, सिर्फ 6 साल में कितना बदला इंडिया?

Startup India Scheme: स्टार्ट-अप्स एक तरह से रिस्क भी हैं, लेकिन ये आपके लिए मालिक बनने का रास्ता भी खोलते हैं. स्टार्ट-अप्स में आप नौकरी मांगने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी की Startup India योजना, सिर्फ 6 साल में कितना बदला इंडिया?

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Startup India योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में दिल्ली के विज्ञान भवन से हुई थी. Startup India का लक्ष्य है देश के युवाओं को इतना सशक्त बनाना जिससे वो नौकरी खोजने की जगह नौकरी दे सकें. आज से ठीक तीन महीने बाद Startup India के 6 वर्ष पूरे हो जाएंगे. वर्ष 2016 तक भारत में लगभग 500 Startups थे. लेकिन आज 50 हजार से ज्यादा Startups हैं. सोचिए 504 से ये संख्या 50 हजार हो गई है.

Startups से लाखों लोगों को मिला रोजगार

Department For Promotion Of Industry And Internal Trade की एक रिपोर्ट के अनुसार, 14 जुलाई 2021 तक देश में 52 हजार 391 नए Startups खुल चुके हैं, जिनसे 5 लाख 70 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है. नए Startups में 53 यूनिकॉर्न बन चुके हैं, जिनका बाजार मूल्य 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये है. यूनिकॉर्न का मतलब ऐसे Startups से है, जिसका बाजार मूल्य कम से कम एक Billion Dollar यानी साढ़े सात हजार करोड़ रुपये हो.

हैदराबाद में इस Startup ने मचाया धमाल

हैदराबाद के अमीन ख्वाजा, दिल्ली के सौरव कुमार और संदीप अग्रवाल, ये लोग Startup India के दूत हैं. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से करीब 220 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के कुरनूल शहर के पास मोबाइल एसेसरीज तैयार की जाती हैं. ईयरफोन, हेडफोन, ब्लूटूथ और स्पीकर्स जैसे प्रोडक्ट हर रोज हजारों की संख्या में यहां तैयार होते हैं.

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खास बात ये है कि इन्हें बनाने वाली कंपनी पहले सारा माल चीन से खरीद कर भारत में बेचती थी. लेकिन साल 2019 से यहीं असेंबल कर रही है. यहां अब हर महीने 70 हजार से 80 हजार प्रोडक्ट बनते हैं और वो भी मेड इन इंडिया प्रोडक्ट. इस लक्ष्य को पूरा करने में मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया का क्या योगदान रहा, अमीन ख्वाजा से जानते हैं. इस स्टार्ट-अप कंपनी में 280 लोग काम करते हैं यानी 280 लोगों को इस एक कंपनी से रोजगार मिल रहा है. इनमें पुरुष भी हैं और महिलाएं भी. पिछले साल इस कंपनी का टर्नओवर 105 करोड़ रुपये था और इस साल तकरीबन 200 करोड़ पार करने की उम्मीद है.

इस आइडिया ने बदल दिया गाड़ियां बेचने के तरीका

स्टार्ट-अप्स रिस्क भी है और आपको मालिक बनाने का रास्ता भी. स्टार्ट-अप्स सुविधा भी है और रोजगार देने का जरिया भी. हर स्टार्ट-अप्स से नए रोजगार भी मिलते हैं और लोगों को नई सुविधाएं मिलती हैं. अब संदीप अग्रवाल को ही देखिए. ये ड्रूम टेक्नोलॉजी के फाउंडर और सीईओ हैं. इन्होंने वर्ष 2014 में अपने स्टार्ट-अप से लोगों को ऑनलाइन गाड़ियां खरीदने और बेचने की सुविधा दी.

पहले सेकेंड हैंड गाड़ियां सिर्फ ऑफलाइन ही बिकती थीं. चाहे नई गाड़ी हो या सेकंड हैंड, हर कोई बिना टच और फील के गाड़ी नहीं खरीदता, ये मेजर चैलेंज था. भारत की Used कार मार्केट काफी Unorganised थी. लोगों को फेवरेट सेकंड हैंड कार नहीं मिलती थी. सबसे बड़ा चैलेंज था कि कैसे लोगों को बताएं कि बिना गाड़ी को देखे या टच करे और ड्राइव करे गाड़ी बेची जाए. सप्लायर को यह समझना मुश्किल था कि लोग ऑनलाइन गाड़ी कैसे खरीदेंगे. Droom पर अब हर साल 1.5 लाख गाड़ियां बिकती हैं.

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वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री मोदी की स्टार्ट-अप इंडिया योजना शुरू होने के बाद उनका काम और आसान हो गया. इस समय इनके स्टार्ट-अप से 300 लोगों को रोजगार मिला है. पहले स्टार्ट-अप को Ignore और Dismiss किया जाता था. 2016 में स्टार्ट-अप इंडिया ने सब बदल दिया, पैसे Easily उपलब्ध हुए. पिछले 1.5 साल में स्टार्ट-अप में इतना पैसा आया है जो पिछले 25 साल में नहीं आया.

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखकर जिस समय लोग अपने बच्चों को मास्क पहनाकर स्कूल भेजने लगे थे, उस दौरान सौरव कुमार को दिल्ली के प्रदूषण में स्टार्ट-अप्स का आइडिया दिख रहा था. उन्होंने उस आइडिया को जमीन पर उतारा और आज Euler Motors (ओइलर मोटर्स) के जरिए 600 लोगों को रोजगार मिल रहा है.

Euler Motors जो EV कंपनी है, उसे स्टार्ट करने का मोटीवेशन दिल्ली में बढ़ते हुए प्रदूषण को देख के आया. बाहर इतने साल रहने के बाद दिखा कि देश EV में पीछे है इसलिए EV को लेकर आगे बढ़ा. 2W और कमर्शियल वेहिकल से ज्यादा प्रदूषण होता है इसलिए आइडिया आया कि कमर्शियल वेहिकल भी EV में लाया जाए. सौरव की कंपनी इलेक्ट्रिकल वेहिकल्स बनाती है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार की योजना स्टार्ट-अप्स इंडिया से कितनी मदद मिली.

स्टार्ट-अप इंडिया आने से फाइलिंग, रजिस्ट्रेशन आसान हुआ. सरकार से काफी टेंडर बढ़े. एंजेल टैक्स का इश्यू भी रेसॉल्व हुआ. स्टार्ट-अप्स फ्यूचर है. मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया के बाद से बैंक्स से पैसा मिलना आसान हुआ.

Department For Promotion Of Industry And Internal Trade यानी DPIIT की ओर से मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स की बात करें तो वर्ष 2016 में सिर्फ 504 स्टार्ट-अप्स खुले, 2017 में 5 हजार से ज्यादा, 2018 में करीब 9 हजार, 2019 में 11 हजार से ज्यादा, 2020 में 14 हजार से ज्यादा और 2021 के पहले 7 महीने में 11 हजार से ज्यादा स्टार्ट-अप्स खुले.

पूरी दुनिया में Startups की संख्या के मामले में भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर है और भारत Startups का सबसे बड़ा Eco System बना रहा है. जिस समय Lockdown में दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों की आर्थिक हालत खराब हो गई उस दौरान भी भारत में Unicorn Startup की संख्या लगातार बढ़ी और अकेले इस साल इनमें 33 नए Unicorn Starup जुड़ गए. एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2025 तक भारत में 100 Unicorn Startups होंगे. जिनका कुल मूल्य 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा.

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