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पार्क में टहलते और बोटिंग करते हुए बातचीत करेंगे पीएम मोदी और शी जिनपिंग, ऐसे बनेगा दोस्‍ताना माहौल

गौतम बंबावले ने बताया कि पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के एमओयू या समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं होंगे.

पार्क में टहलते और बोटिंग करते हुए बातचीत करेंगे पीएम मोदी और शी जिनपिंग, ऐसे बनेगा दोस्‍ताना माहौल
पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता में बातचीत का कोई तय एजेंडा नहीं होगा. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार(26 अप्रैल) को अपनी दो दिवसीय चीन यात्रा के लिए रावना होंगे. अपनी इस यात्रा पर पीएम मोदी एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. तय कार्यक्रम के अनुसार इस सम्मेलन की मेजबानी खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करेंगे. यह पहला मौका है जब शी जिनपिंग इस सम्मेलन की मेजबानी करने वाले हैं. 

पीएम की यात्रा पर चीन में भारत के उच्चायुक्त गौतम बंबावले ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए कहा, 'पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता में बातचीत का कोई तय एजेंडा नहीं होगा.' उन्होंने कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को एक ऐसा माहौल देने की कोशिश है, जहां पर वह देशों के हालातों के बारे में स्वतंत्र होकर ना सिर्फ बात कर सके, बल्कि किसी खास योजना पर भी चर्च कर सके. उन्होंने कहा कि दोनों नेता आराम से दोनों देशों के तमाम मुद्दों पर बात कर सके, इसके लिए संभंवत वह पार्क में टहल सकते हैं और बोटिंग कर सकते हैं. 

 

 

एमओयू या समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं
गौतम बंबावले ने बताया कि पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के एमओयू या समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं होंगे.

डोकलाम विवाद पर होगी चर्चा!
कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन की इस यात्रा पर पीएम मोदी चीन के साथ डोकलाम मामले पर बात कर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में भारत के साथ चीन का सीमा विवाद लगातार मुखर होता गया है. पिछले साल तो सिक्किम क्षेत्र में डोकलाम में 73 दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं. उस वक्‍त तो चीन में राष्‍ट्रपति चुनावों के मद्देनजर उसने अपने रुख में नरमी बरतते हुए पीछे हटने का फैसला किया था लेकिन अब चीन में एक ताकतवर स्‍थायी राष्‍ट्रप्रमुख होने के कारण भविष्‍य में इस तरह की सूरतेहाल में चीन से किसी भी प्रकार की नरमी की उम्‍मीद नहीं की जा सकती.