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पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में किया गिलहरी का जिक्र, जानिए क्या है कथा

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में किया गिलहरी का जिक्र, जानिए क्या है कथा
स्वतंत्रता दिवस पर देश के नाम संबोधन के बाद स्कूली बच्चों से मिले पीएम नरेंद्र मोदी (फोटोः पीआईबी)

नई दिल्लीः स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए देश के विकास में प्रत्येक नागरिक के योगदान का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सामूहिक संकल्‍प शक्ति, हमारा सामूहिक पुरुषार्थ, हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता और परिश्रम की पराकाष्‍ठा, 2022 में आजादी के दीवानों के सपनों के अनुरूप भारत बनाने के लिए काम आ सकती है और इसलिए न्यू इंडिया का संकल्‍प लेकर के हमें देश को आगे बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि हम जानते हैं सामूहिकता की शक्ति क्‍या होती है. भगवान कृष्‍ण कितने ही सार्मथ्‍यवान थे लेकिन जब ग्‍वाले अपनी लकड़ी लेकर खड़े हो गए, एक सामूहिक शक्ति थी गौवर्धन पर्वत उठा लिया था. प्रभु रामचंद्र जी को लंका जाना था वानर सेना के छोटे-छोटे लोग लग गए, रामसेतु बन गया, रामजी लंका पहुंच गए. पीएम ने अपनी इस बात के संदर्भ में एक कहानी याद दिलाई.

उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़े काम संभव हो पाते हैं. हर किसी बड़े काम में छोटे से लेकर बड़े का योगदान अहम होता है. कोई छोटा नहीं होता, कोई बड़ा नहीं होता, अरे एक गिलहरी का उदाहरण हमें मालूम है, एक गिलहरी भी परिवर्तन की प्रक्रिया की हिस्‍सेदार बनती है, वो कथा हम सब जानते हैं और इसलिए सवा सौ करोड़ देशवासियों में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है. 

पीएम मोदी ने जिस गिलहरी की कहानी का जिक्र किया है उस कहानी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं...

यह कथा उस समय की है जब भगवान राम की सेना माता सीता को लंका से लाने के लिए समुद्र पर सेतु निर्माण के कार्य में जुटी थी. इस कार्य में वानर सेना के साथ-साथ हर कोई योगदान दे रहा था. इस बीच लक्ष्मण ने भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देखा तो उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने भगवान राम से प्रश्न किया,  ‘भैया क्या देख रहे हैं.’ तब भगवान राम ने इशारा करते हुए लक्ष्मण से कहा ‘उस तरफ देखो लक्ष्मण एक गिलहरी बार-बार समुद्र के किनारे जाती है और रेत पर लोट करके उसे अपने शरीर पर चिपका लेती है. फिर वह निर्माणाधीन सेतु पर जाकर अपनी सारी रेत झाड़ आती है. ऐसा वह काफी देर से कर रही है. लक्ष्मण बोले ‘प्रभु वह समुद्र में क्रीड़ा कर रही होगी और कुछ नहीं. लेकिन भगवान राम ने गिलहरी के प्रयास को समझ लिया था और उन्होंने अपने अनुज से कहा ‘नहीं लक्ष्मण तुम उस गिलहरी के भाव को समझने का प्रयास करो. आओ, गिलहरी से ही पूछ लेते हैं कि वह क्या कर रही है.’

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इसके बाद भगवान राम और लक्षमण उस गिलहरी के पास गए. भगवान राम ने गिलहरी से पूछा कि ‘तुम क्या कर रही हो? तब गिलहरी ने उत्तर दिया कि कुछ नहीं प्रभु बस इस पुण्य कार्य में थोड़ा योगदान दे रही हूं. भगवान राम को उत्तर देकर गिलहरी फिर से अपने कार्य में जुट गई. लेकिन भगवान राम ने उसे टोकते हुए पूछा ‘तुम्हारी रेत के कुछ कण डालने से क्या होगा?’ गिलहरी ने कहा ‘प्रभु आपका कथन सत्य है. लेकिन मैं इतनी छोटी हूं कि इस महान कार्य में इससे अधिक योगदान मैं क्या दे सकती हूं. प्रभु मैं यह कार्य किसी आकांक्षा से नहीं कर रही हूं. यह कार्य तो धर्म की अधर्म पर जीत का कार्य है. ऐसे में भला मैं कैसे पीछे रहती. मैं अपनी ओर से इस कार्य में निस्वार्थ योगदान देना चाहती हूं. 

गिलहरी की बात सुनकर भगवान राम भाव-विभोर हो गए. उन्होंने गिलहरी को अपनी हथेली पर बैठा लिया और उस पर प्यार से हाथ फेरने लगे. गिलहरी के इस छोटे से प्रयास से प्रसन्न होकर प्रभु श्रीराम ने उसकी प्रजाति को अपना प्रिय जीव बना लिया था.  

लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन के दौरान राष्ट्रनिर्माण में हर एक व्यक्ति के योगदान की बात करते हुए पीएम मोदी ने इसी तरह से भागीदारी निभाने की अपील की. उनका कहने का आशय यही था कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता है. मायने यह रखता है कि हम अपनी तरफ से इसके लिए क्या कर रहे हैं. देशवासी जितना हो सके नि:स्वार्थ भाव से राष्ट्रहित का कार्य करें’.अपनी इस बात को उन्होंने गिलहरी की इसी कथा की ओर इशारा करते हुए समझाया. 

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