भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों के मार्च को पुलिस ने इजाजत देने से किया इनकार

भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के खिलाफ मंगलवार को विपक्षी दलों की ओर से निकाले जाने वाले मार्च को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। पुलिस ने कांग्रेस और विपक्ष के इस मार्च को इजाजत देने से इनकार कर दिया है। गौर हो कि संसद और राष्‍ट्रपति भवन के पास धारा 144 लागू है और कांग्रेस समेत विपक्षी दल आज संसद भवन से राष्‍ट्रपति भवन तक मार्च निकालने वाले हैं।

भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों के मार्च को पुलिस ने इजाजत देने से किया इनकार

नई दिल्ली : भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के खिलाफ मंगलवार को विपक्षी दलों की ओर से निकाले जाने वाले मार्च को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। पुलिस ने कांग्रेस और विपक्ष के इस मार्च को इजाजत देने से इनकार कर दिया है। गौर हो कि संसद और राष्‍ट्रपति भवन के पास धारा 144 लागू है और कांग्रेस समेत विपक्षी दल आज संसद भवन से राष्‍ट्रपति भवन तक मार्च निकालने वाले हैं। पुलिस ने मार्च को रोकने की खातिर बैरिकेडिंग और वाटर केनन का इंतजाम भी किया है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने कांग्रेस को मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी है। जबकि कांग्रेसी नेता मार्च निकालने पर आमादा हैं।

गौर हो कि भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर कांग्रेस विरोध में सड़कों पर उतर चुकी है और इस लड़ाई को लंबा खींचने के लिए तैयार है। इससे पहले सोमवार को भी कांग्रेसी नेताओं ने सरकार के खिलाफ सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया था।

इससे पहले, यह खबर आई कि व्यापक विपक्ष की एकता का संदेश देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित कम से कम 10 राजनीतिक दलों के नेता मंगलवार को संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे और नए भूमि विधेयक के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपेंगे। मार्च का समन्वय जदयू अध्यक्ष शरद यादव द्वारा किया जा रहा है। उधर, सरकार की मंशा है कि भूमि विधेयक को राज्यसभा में लाने से पहले विपक्ष के साथ एक और दौर की बातचीत की जाए क्योंकि कांग्रेस एवं विपक्ष सहित कई राजनीतिक दलों ने इस विधेयक के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे का अधिकार तथा पारदर्शिता, पुनर्वास एवं पुनर्स्‍थापन (संशोधन) विधेयक 2015 को लोकसभा में नौ संशोधनों के साथ 24 फरवरी को पारित किया था। उच्च सदन में इस विधेयक को कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है जहां सरकार के पास बहुमत नहीं है तथा अधिकतर विपक्षी दलों ने पहले ही यह घोषणा कर दी है कि वे इसका भारी विरोध करेंगे।

विपक्ष के सूत्रों ने बताया कि इस प्रदर्शन में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है जिसमें उस ज्ञापन को अंतिम रूप देना शामिल है जिसे मंगलवार की शाम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपा जाएगा। इस मार्च में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जदएस प्रमुख एचडी देवेगौड़ा, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी, सपा के रामगोपाल यादव, द्रमुक की कनिमोई, इनेलो के दुष्यंत चौटाला और राजद के प्रेम चंद गुप्ता के शामिल होने की उम्मीद है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद मसौदे को अंतिम रूप देने में कांग्रेस की ओर से समन्वय कर रहे हैं।

सोनिया का आज के मार्च में शामिल होना महत्वपूर्ण है क्योंकि न तो वह और न ही राहुल गांधी ने सोमवार को यहां जंतर मंतर पर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस प्रदर्शन का आयोजन भट्टा परसौल से कांग्रेस की चार दिन पहले शुरू हुई पदयात्रा के समापन पर आयोजित किया गया था। इसके साथ ही इस मार्च में मनमोहन सिंह का हिस्सा लेना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा तब हो रहा है जब कुछ दिनों पहले कांग्रेस प्रमुख ने पार्टी मुख्यालय से पूर्व प्रधानमंत्री सिंह के आवास तक एक मार्च का नेतृत्व किया था। वह मार्च सिंह के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए किया गया था जिन्हें एक कोयला घोटाला मामले में सम्मन किया गया है।

इस बीच, राकांपा ने कहा कि वह भूमि अधिग्रहण विधेयक का राज्यसभा में समर्थन करने को तैयार है बशर्ते सरकार तीन मुद्दों को लेकर उसकी चिंताओं पर गौर करे जिसमें सहमति क्लाज को शामिल करना और सामाजिक प्रभाव आकलन शामिल है जिसे हटा दिया गया है। राकांपा महासचिव डीपी त्रिपाठी ने कहा कि हम चाहते हैं कि किसानों की सहमति वाला क्लाज विधेयक का हिस्सा हो यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की जाती है। दूसरा सरकार सुनिश्चित करे कि सामाजिक प्रभाव आकलन क्लाज बरकरार रहे जिसे सरकार ने हटा दिया है।महिला कांग्रेस ने मनमोहन के आवास तक ऐसा ही मार्च किया था। सिंह से एकजुटता व्यक्त करने के लिए एनएसयूआई कल ऐसा ही एक मार्च आयोजित कर रहा है। कांग्रेस द्वारा कल मार्च में सोनिया के साथ सिंह को उतारना पार्टी का यह दिखाने का एक और प्रयास है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री के पीछे मजबूती से खड़ी है। भूमि अधिग्रहण कानून में परिवर्तन करने के लिए भाजपा नीत सरकार पर हमला बोलते हुए जदयू नेता शरद यादव ने कहा कि अध्यादेश ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना कानून 2013 में पूर्ववर्ती उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिकार को काफी कमजोर किया है जो किसानों के हितों के खिलाफ है।

लोकसभा ने इस विवादास्पद विधेयक को पिछले सप्ताह कुल नौ संशोधनों के साथ पारित किया था लेकिन सरकार राज्यसभा में मुश्किल का सामना कर रही है जहां उसे बहुमत प्राप्त नहीं है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना विरोध देश के हर हिस्से में करने का संकल्प जताया और भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पार्टी के उन कार्यकर्ताओं पर ‘ज्यादती’ और ‘बेरहमी से लाठीचार्च’ करवाया जो भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सरकार इसे नजरंदाज नहीं कर सकती। यह कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है, विरोध राजग के कुछ सहयोगी दलों तक भी फैल गया है। यह दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत के सभी हिस्से में फैलेगा।