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पश्चिमी यूपी की नदियों में प्रदूषण का मामला: NGT ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन

ये कमेटी एनजीटी के 8 अगस्त के आदेश का पालन कैसे हो रहा है, इसकी निगरानी करेगी.दरअसल, एनजीटी ने 8 अगस्त को अपने आदेश में इन नदियों को दूषित कर रही 124 उद्योगों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.

पश्चिमी यूपी की नदियों में प्रदूषण का मामला: NGT ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन

नई दिल्ली: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हिंडन, कृष्णा और काली नदियों में प्रदूषण के मामले में एनजीटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस एसयू खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी में रिटायर जज के अलावा एक पर्यावरण मंत्रालय के वैज्ञानिक और एक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक शामिल होंगे. ये कमेटी एनजीटी के 8 अगस्त के आदेश का पालन कैसे हो रहा है, इसकी निगरानी करेगी.दरअसल, एनजीटी ने 8 अगस्त को अपने आदेश में इन नदियों को दूषित कर रही 124 उद्योगों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. इसके अलावा एनजीटी ने प्रदूषण फैला रही इंडस्ट्रीज को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी आदेश दिया था. कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा था कि इन नदियों के प्रदूषण का शिकार हुए लोगों के लिए तुरन्त हेल्थ बेनीफिट स्कीम तैयार करे और प्रदूषित पानी निकालने वाले हेडपंपों को बंद किया जाए. एनजीटी ने राज्य सरकार से 5 मार्च 2019 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था.

इससे पहले एनजीटी ने एक महीने के अंदर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में प्रदूषित पानी देने वाले सभी हैंडपंप और बोरवेल सील करने का आदेश दिया था. इसमें गाजियाबाद, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गौतमबुद्धनगर शामिल हैं. एनजीटी ने राज्य सरकारको आदेश में कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिंडन, कृष्णी और काली नदी की वजह से भूजल प्रदूषित हो रहा है. इसमें सल्फेट, फ्लोराइड, कैडमियम, कॉपर, लेड, आयरन, निकल और मरकरी जैसे विषैले तत्व मिल रहे हैं. इसलिए प्रदूषित पानी देने वाले सभी बोरवेल और हैंडपंप तत्कालप्रभाव से सील किए जाएं.उन्होंने इन छह जिलों के डीएम को निर्देश दिया है कि स्पेशल कमिटी की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई करके एनजीटी को जानकारी दी जाए. 

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आपको बता दें कि एनजीटी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के काली, कृष्णा और हिंडन नदियों के गहन सर्वेक्षण के आदेश दिए थे और 316 उद्योगों के निरीक्षण का निर्देश दिया था जो कथित तौर पर जलाशयों को दूषित कर रहे हैं. आपको बता दें कि एनजीटी एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैंसर से 50 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है. एनजीटी ने एक समिति का गठन किया था, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तरप्रदेश जल निगम के अधिकारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संयुक्त रूप से नदियों और जलाशयों का सर्वेक्षण करेंगे. एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि वे नमूने एकत्रित करेंगे, इस तरह के नमूनों का विश्लेषण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशाला में किया जाएगा.