पूर्व विदेश सचिव का बड़ा खुलासा, डोकलाम विवाद सुलझने के बाद भी पीछे नहीं हटे थे चीनी सैनिक

चीनी सैनिकों के डोकलाम में मौजूद होने की संभावना थी, लेकिन उस समय मेरे पास इसकी वास्तविक संख्या नहीं थी: एस. जयशंकर

पूर्व विदेश सचिव का बड़ा खुलासा, डोकलाम विवाद सुलझने के बाद भी पीछे नहीं हटे थे चीनी सैनिक
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच यूं तो सीमा विवाद काफी पुराने समय से चला आ रहा है. लेकिन पिछले साल 16 जून को अरुणाचल प्रदेश के पास डोकलाम क्षेत्र में चीन के सैनिकों द्वारा सीमा क्षेत्र में सड़क निर्माण करने की कोशिश ने दोनों देशों के सैनिकों को आमन-सामने खड़ा कर दिया था. भारतीय सेना के कड़े विरोध और साहस की वजह से चीन के सैनिकों को पीछे हटना पड़ गया था. लेकिन, एक संसदीय समिति को सौंपी गई रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है. इसमें पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर ने संसदीय समिति को दी जानकारी में बताया है कि अरुणाचल प्रदेश में चीन से सटी सीमा के पास डोकलाम में चीनी सैनिकों की मौजूदगी बाद में भी थी. 

नई दिल्ली और बीजिंग में सैनिकों को डोकलाम से हटाने को लेकर हुई सहमति के दो महीने से भी कम समय हुए थे, कि इस बीच पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर ने विदेश मामलों पर बनी संसदीय समिति को यह जानकारी दी, हालांकि उन्होंने यह भी कहा  कि उस समय मेरे पास चीन के सैनिकों की वास्तविक संख्या नहीं थी. बाद में उनके उत्तराधिकारी विजय गोखले ने भी समिति को बताया कि चीनी सैनिकों ने सीमा क्षेत्र में निर्माण कार्य किए हैं. यह भूटान और चीन की सीमा पर किया गया है, जहां भारतीय सीमा काफी बड़े हिस्से में सटी है.

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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने गोखले, जयशंकर, रक्षा सचिव संजय मित्रा और पूर्व थलसेना अध्यक्ष (सेवानिवृत) दीपक कपूर द्वारा समिति को सैौंपे गए मसौदे के आधार पर यह खबर दी है. समिति को डोकलाम सहित सिनो-इंडिया रिलेशन और सीमा की स्थिति संबंधी रिपोर्ट सौंपी गई है. मसौदा की रिपोर्ट को सदस्यों के बीच टिप्पणी के लिए वितरित किया गया था, जिस पर गुरुवार को समिति ने चर्चा की. शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति में राहुल गांधी, वरुण गांधी, स्वप्न दासगुप्ता, रिचर्ड हे, राघव लखनपाल, विष्णु दयाल राम, रामस्वरूप शर्मा, शरद त्रिपाठी, चुनीभाई गोहेल, सुगाता बोस, कनिमोझी, मोहम्मद सलीम और सुप्रिया सुले सदस्य के रूप में शामिल हैं. 

उत्तरी डोकलाम को लेकर जयशंकर ने 18 अक्टूबर 2017 को समिति को बताया कि जब चीनी सैनिकों ने डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की तो भारतीय सैनिकों द्वारा इसे रोका गया था. बीते साल 28 अगस्त को डोकलाम क्षेत्र से दोनों देशों के बीच सैनिकों को हटाने पर सहमति हुई थी. लेकिन अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परस्पर सहमति के बावजूद चीनी सैनिक विवाद वाले क्षेत्र में मौजूद रहे.

जब जयशंकर से पूछा गया कि चीनी सैनिक चीनी क्षेत्र में थे या भूटान के क्षेत्र में, उन्होंने कहा कि उनके पास वास्तविक संख्या नहीं है. उनका कहना था कि हो सकता है चीनी सैनिक बटंग्ला-मेरुगला-सिन्चेला क्षेत्र में रहे होंगे. इस साल 22 फरवरी को गोखले ने भी चीनी सैनिकों को लेकर भारतीय रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि यह क्षेत्र भूटान और चीन के बीच विवादित है. उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण कार्य भारत-चीन सीमा के बड़े क्षेत्र में दोनों तरफ किया गया. रक्षा सचिव संजय मित्रा ने 30 अक्टूबर 2017 को समिति को बताया कि चीन ने बटंग्ला-मेरुगला-सिन्चेला क्षेत्र में 15 साल पहले सड़क बनाई थी. जयशंकर ने भी माना कि सड़क अचानक से नई नहीं बनाई गई है. समिति को बताया गया कि बीजिंग में भारतीय राजदूत की अगुवाई में चीन से 13 बार कूटनीतिक बातचीत हुई थी, ताकि डोकलाम विवाद का समाधान हो सके. समिति को यह भी बताया गया कि जब पर्याप्त संख्या में भारतीय सैनिक भी सीमा पर मौजूद थे.