प्रणब मुखर्जी रहे बेहद सख्त, 3 बड़े आतंकियों सहित कई की फांसी को दी थी मंजूरी!

राष्ट्रपति के रूप में एक प्रमुख दायित्व होता है जघन्य अपराध करने वाले दोषियों की क्षमा याचिका पर विचार करना और उस पर फैसला सुनाना. प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति के रूप में कई अपराधियों की फांसी की सजा को मंजूरी दी.

प्रणब मुखर्जी रहे बेहद सख्त, 3 बड़े आतंकियों सहित कई की फांसी को दी थी मंजूरी!
प्रणब मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति रहे (फाइल फोटो)

प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल मंगलवार को खत्म हो गया. उनकी जगह रामनाथ कोविंद ने देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. प्रणब दा ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से एक दिन पहले सोमवार को एक भावुक ट्वीट किया और देश की जनता का शुक्रिया अदा किया. वैसे प्रणव मुखर्जी के कार्यकाल पर नजर डालें, तो वह सबसे सख्त राष्ट्रपति नजर आते हैं. खासतौर से आतंकियों के प्रति तो वह बिल्कुल निर्मम रहे और तीन बड़े आतंकियों सहित कई अपराधियों की फांसी को मंजूरी दे दी. आइए जानते हैं कि उन्होंने किन मुख्य अपराधियों की कड़ी सजा को स्वीकृति दी...

सबसे पहले प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति के रूप में विदाई ट्वीट के बारे में बात करते हैं. उन्होंने लिखा, 'आपके स्नेह और समर्थन के लिए धन्यवाद. कल (मंगलवार) जब मैं आपसे मिलूंगा, तो ऐसा एक राष्ट्रपति के रूप में नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में होगा.' उनके इस भावुक ट्वीट को हजारों लोगों ने रीट्वीट किया, जिनमें कई राजनेता भी शामिल हैं.

 राष्ट्रपति के रूप में एक प्रमुख दायित्व होता है जघन्य अपराध करने वाले दोषियों की क्षमा याचिका पर विचार करना और उस पर फैसला सुनाना. प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति के रूप में कई अपराधियों की फांसी की सजा को मंजूरी दी. इसीलिए उनको काफी कठोर राष्ट्रपति भी कहा जाता है.

आतंकी कसाब, अफजल और याकूब की फांसी पर मुहर
प्रणब दा ने अपने कार्यकाल में मुंबई के 26/11 हमले के दोषी अजमल कसाब और संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु और 1993 में हुए मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब मेनन की फांसी की सजा को मंजूरी देने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई. उनकी मंजूरी के बाद कसाब को 2012 में, अफजल गुरु को 2013 में और याकूब मेनन को 2015 में फांसी पर लटका दिया गया.  

लगभग 37 दया याचिकाओं पर किया फैसला
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पूरे कार्यकाल में लगभग 37 क्षमायाचिकाओं पर फैसला हुआ. उन्होंने ज्यादातर में कोर्ट की सजा को बरकरार रखा. प्रणव दा ने 28 अपराधियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा. इतना ही नहीं इसी साल मई में भी रेप के दो मामलों में दोषियों को क्षमा नहीं दी और कोर्ट की ओर से दी गई फांसी की सजा को बनाए रखा. इनमें से एक मामला इंदौर का था और दूसरा पुणे का.

4 मामलों में फांसी को उम्रकैद में बदला
प्रणब मुखर्जी ने चार दया याचिकाओं पर फांसी को उम्रकैद में बदल दिया. ये सभी बिहार में साल 1992 में अगड़ी जाति के 34 लोगों की हत्या के मामले में दोषी थे. उन्होंने साल 2017 में नए साल के अवसर पर कृष्णा मोची, नन्हेलाल मोची, वीर कुंवर पासवान और धर्मेन्द्र सिंह उर्फ धारू सिंह की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया.

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