मलेशिया को साइडलाइन करने की तैयारियां, सभी आयात की भारत कर रहा समीक्षा

दरअसल, मलेशिया के भारत के अंदरूनी मामले (जम्मू-कश्मीर) पर दखल और जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण मामले से भारत और मलेशिया के रिश्ते में आई खटास इसकी वजह मानी जा रही हैं.

मलेशिया को साइडलाइन करने की तैयारियां, सभी आयात की भारत कर रहा समीक्षा
फाइल फोटो...

नई दिल्‍ली : भारत (India) द्वारा मलेशिया (Malaysia) को साइडलाइन करने की तैयारियां शुरू हो चुकी है. मलेशिया से पाम आयल (Palm Oil) इंपोर्ट पूरी तरह खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई हैं. दरअसल, मलेशिया के भारत के अंदरूनी मामले (जम्मू-कश्मीर) पर दखल और जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण मामले से भारत और मलेशिया के रिश्ते में आई खटास इसकी वजह मानी जा रही हैं.

इसके तहत भारत की तरफ से मलेशिया से आने वाले सारे इंपोर्ट की समीक्षा हो रही है. पाम ऑयल पर कंट्रोल लगाने के बाद अब माइक्रो प्रोसेसर, तांबा, एल्युमिनियम वायर कंप्यूटर और टेलीकॉम प्रोडक्ट, टरबोजेट, लिक्विड नेचुरल गैस पर कंट्रोल लगाने की पूरी तैयारी है.

मलेशिया से आने वाले पाम आयल पर 5% सेफगार्ड ड्यूटी मार्च के बाद भी जारी रखी जा सकती है. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के नियमों के मुताबिक भी वहां से आने‌वाले सभी माल की क्वालिटी के नियमों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए गए हैं. मलेशिया से सालाना लगभग 10.8 अरब डॉलर का इंपोर्ट होता है जबकि दोनों देशों के बीच कारोबार 16.5 अरब डॉलर का है.

वहीं, पाम ऑयल पर कुछ ही दिन पहले सरकार ने कुछ पाबंदियां लगाई थी, उसके पहले ऑइल एक्सट्रेक्शन एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को एडवाइज़री जारी की थी कि मलेशिया से पाम ऑइल पर कंट्रोल लगा ले. पाम ऑइल के बारे में स्वास्थ को लेकर जागरुक लोग लगातार सरकार को इसके साइट इफेक्टस के बारे में आगाह करते रहे हैं कि ये हमारे पर्यावरण और इंसानी शरीर पर बहुत बुरा असर डालता है. ऐसे में सरकार पाम ऑइल को हतोत्साहित करने की नीति पर चलती हुई दिख रही है.

मलेशिया से सालाना 44 लाख टन का पाम ऑइल भारत में आता है ऐसे में क्रुड पाम आइल का इंपोर्ट 1009 मिलियन डॉलर का होता है, जबकि RBD पामोलिन 425 मिलियन डॉलर का इंपोर्ट होता है. यानि अगर मलेशिया से पाम आइल आना बंद होता है तो मलेशिया को बहुत बुरी तरह नुकसान होगा और पाम आइल की खपत कम होने से लोगों पर इसके साइड इफेक्ट कम होने से उनकी सेहत सुधरेगी.

मलेशिया के पीएम महातिर बिन मोहम्मद ने अभी हाल ही में CAA की आलोचना की. अगर मेलशिया लगातार भारत के अंदरुनी मामले में दखलंदाज़ी करता रहा तो भारत और मलेशिया के बीच ट्रेड वॉर गहरा सकता है, जिसका बुरा असर मलेशिया पर ही होगा.