Granth Kutir: राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ग्रंथ कुटीर का उद्घाटन किया. ग्रंथ कुटीर में भारत की 11 क्लासिकल भाषाओं की किताबों का एक बड़ा कलेक्शन है. आइए जानते हैं कि इसका मकसद क्या है.
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President Droupadi Murmu: देशभर में कई तरह की भाषाएं बोली जाती हैं. अन्य-अन्य भाषाओं के बावजूद भी लोगों को आपस में तालमेल बैठाने में कोई दिक्कत नहीं होती है और यही हिंदुस्तान की खूबसूरती है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ग्रंथ कुटीर का उद्घाटन किया. ग्रंथ कुटीर में भारत की 11 क्लासिकल भाषाओं, तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया सहित मैन्युस्क्रिप्ट्स और किताबों का एक बड़ा कलेक्शन है. आइए जानते हैं कि आखिर ग्रंथ कुटीर क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
कितनी किताबों का है कलेक्शन
ग्रंथ कुटीर में भारत की 11 क्लासिकल भाषाओं तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली में मैन्युस्क्रिप्ट्स और किताबों का एक बड़ा कलेक्शन है. यह भारत की समृद्ध और अलग-अलग तरह की कल्चरल, फिलॉसॉफिकल, लिटरेरी और इंटेलेक्चुअल विरासत को दिखाता है. इस कुटीर में 11 भारतीय क्लासिकल भाषाओं में लगभग 2,300 किताबों का कलेक्शन है. भारत सरकार ने 03 अक्टूबर, 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाओं को 'क्लासिकल भाषा' का दर्जा दिया था. इससे पहले, छह भाषाओं को क्लासिकल भाषाओं का दर्जा मिला हुआ था.
कई तरह के सब्जेक्ट हैं शामिल
ग्रंथ कुटीर कलेक्शन में कई तरह के सब्जेक्ट शामिल हैं, जैसे एपिक, फिलॉसफी, लिंग्विस्टिक्स, हिस्ट्री, गवर्नेंस, साइंस और भक्ति साहित्य, साथ ही इन भाषाओं में भारत का संविधान भी है. इस कलेक्शन में करीब 50 मैन्युस्क्रिप्ट भी हैं. इनमें से कई मैन्युस्क्रिप्ट ताड़ के पत्ते, कागज, छाल और कपड़े जैसी पारंपरिक चीजों पर हाथ से लिखी गई हैं. ग्रंथ कुटीर को केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टीट्यूशन, कल्चरल ऑर्गनाइज़ेशन और देश भर के अलग-अलग डोनर के साथ मिलकर बनाया गया है. मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन, मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर और उनसे जुड़े इंस्टीट्यूशन ने इस पहल में मदद की है.
क्या है मकसद
ग्रंथ कुटीर को बनाने का मकसद भारत की रिच कल्चरल और लिटरेरी विरासत के बारे में लोगों में अवेयरनेस बढ़ाना है. कॉलोनियल सोच के निशान मिटाने के देश के इरादे के मुताबिक, ग्रंथ कुटीर को खास कामों के जरिए रिच विरासत को दिखाने और डायवर्सिटी में एकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है. ग्रंथ कुटीर, ज्ञान भारतम मिशन के विज़न को सपोर्ट करने की एक कोशिश है. यह भारत की बड़ी मैन्युस्क्रिप्ट विरासत को बचाने, डिजिटाइज करने और फैलाने की एक नेशनल पहल है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए परंपरा को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ती है.
पुरानी साहित्यिक रचना
इन भाषाओं को क्लासिकल भाषा का दर्जा दिलाने में जिन पुरानी रचनाओं ने योगदान दिया है, उनमें संस्कृत में वेद, पुराण और उपनिषद, गाथासप्तशती, जो मराठी की सबसे पुरानी साहित्यिक रचना है. पाली में विनय पिटक जिसमें बौद्ध भिक्षुओं के मठ के नियम बताए गए हैं, जैन आगम और प्राकृत शिलालेख जो जरूरी ऐतिहासिक रिकॉर्ड के तौर पर काम करते हैं, चर्यापद, असमिया, बंगाली और ओडिया में प्राचीन बौद्ध तांत्रिक ग्रंथ. तिरुक्कुरल, जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर क्लासिक तमिल ग्रंथ, तेलुगु में महाभारत कविराजमार्ग, कन्नड़ में वक्तृता, कविता और ग्रामर पर सबसे पुरानी उपलब्ध रचना और मलयालम में रामचरितम शामिल हैं.
पहले क्या था
ग्रंथ कुटीर के पहले, 'ए कैटलॉग ऑफ द ओरिजिनल वर्क्स ऑफ विलियम होगार्थ', 'स्पीचेस ऑफ लॉर्ड कर्जन ऑफ केडलस्टन', 'समरी ऑफ द एडमिनिस्ट्रेशन, लॉर्ड कर्जन ऑफ केडलस्टन', 'लाइफ ऑफ लॉर्ड कर्जन', 'पंच मैगजीन्स' और दूसरी किताबें यहां रखी जाती थीं. अब इन्हें राष्ट्रपति भवन एस्टेट के अंदर एक अलग जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है. आर्काइवल कलेक्शन का हिस्सा ये किताबें डिजिटाइज कर दी गई हैं और रिसर्च स्कॉलर्स इन्हें ऑनलाइन एक्सेस कर सकेंगे. ANI