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GST से जुड़े चार विधेयकों को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश में वस्तु एवं सेवाकर (GST) व्यवस्था लागू करने से संबंधित चार विधेयकों को मंजूरी दे दी है, इसके साथ ही देश में एक जुलाई से एक-देश-एक कर-व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य और करीब आ गया है.राष्ट्रपति ने जिन विधेयकों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई है उनमें --केन्द्रीय जीएसटी कानून 2017, एकीकृत जीएसटी कानून 2017, जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) विधेयक, 2017, संघ शासित प्रदेश जीएसटी कानून 2017-शामिल हैं. अब राज्य विधानसभाओं में राज्य-जीएसटी विधेयक को पारित किया जाना शेष है.

GST से जुड़े चार विधेयकों को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी
GST से जुड़े चार विधेयकों को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी

नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश में वस्तु एवं सेवाकर (GST) व्यवस्था लागू करने से संबंधित चार विधेयकों को मंजूरी दे दी है, इसके साथ ही देश में एक जुलाई से एक-देश-एक कर-व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य और करीब आ गया है.राष्ट्रपति ने जिन विधेयकों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई है उनमें --केन्द्रीय जीएसटी कानून 2017, एकीकृत जीएसटी कानून 2017, जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) विधेयक, 2017, संघ शासित प्रदेश जीएसटी कानून 2017-शामिल हैं. अब राज्य विधानसभाओं में राज्य-जीएसटी विधेयक को पारित किया जाना शेष है.

राष्ट्रपति ने जिन विधेयकों को मंजूरी दी है उन्हें संसद के कल समाप्त हुये बजट सत्र में पारित किया गया है. सरकार का इरादा देश में एक जुलाई से जीएसटी व्यवस्था लागू करने का है.जीएसटी व्यवस्था लागू करने के लिये गठित जीएसटी परिषद ने जीएसटी प्रणाली के विभिन्न नियमों को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा जीएसटी की चार दरें पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत तय की गई हैं. अब इन दरों में वस्तुओं एवं सेवाओं को रखने का काम किया जा रहा है.

अब सभी राज्‍यों को स्‍टेट जीएसटी विधेयक अपनी-अपनी विधानसभाओं में पारित कराना होगा इसके बाद ही नया जीएसटी कानून लागू किया जा सकेगा.राज्‍य सभा ने पिछले हफ्ते 6 अप्रैल को चार विधेयकों को बिना किसी संशोधन के अपनी मंजूरी दे दी थी.

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सेंट्रल जीएसटी बिल 2017, केंद्र शासित प्रदेश जीएसटी बिल 2017, एकीकृत जीएसी बिल 2017 और जीएसटी (राज्‍यों को मुआवजा) विधेयक 2017 को राज्‍य सभा ने चर्चा के बाद मंजूरी दे दी थी.

लोक सभा ने इन विधेयकों को 29 मार्च को पारित कर दिया था

आठ घंटे चली लंबी परिचर्चा के बाद वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने जवाब देते हुए यह स्‍पष्‍ट किया कि जीएसटी लागू होने से मुद्रास्‍फीति नहीं बढ़ेगी, जैसा कि कुछ वर्गों द्वारा आशंका जताई जा रही है. उन्‍होंने कहा‍ कि इससे पूरे देश में एक समान टैक्‍स व्‍यवस्‍था की शुरुआत होगी.

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जीएसटी रेट पर 18-19 मई को जीएसटी काउंसिल चर्चा करेगी. जेटली ने कहा कि एक बार नई व्‍यवस्‍था लागे हो जाए उसके बाद विभिन्‍न विभागों द्वारा कारोबारियों को परेशान करने की समस्‍या स्‍वत: ही समाप्‍त हो जाएगी. पूरे देश में एक वस्‍तु या सेवा के लिए एक जैसा टैक्‍स होगा.

इससे पहले वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा, कुछ व्यवसायों की ओर से की गई देरी की मांग के बावजूद भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून का शुभारंभ 1 जुलाई को ही किया जाएगा जैसा कि पहले से निर्धारित है ताकि आर्थिक विकास और राज्य के राजस्व को बढ़ाया जा सके.

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राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि केंद्रीय और राज्य सरकारें जीएसटी को लाने को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं, उन्होंने कहा कि सिर्फ फर्मों के चलते उस कर को और नहीं टाला जाना चाहिए जिसके बनने में एक दशक से भी अधिक का समय लगा है.

आजादी के बाद भारत का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है

आजादी के बाद भारत का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाने वाला जीएसटी कानून 2 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था को बदल देगा और 1.3 अरब की अर्थव्यवस्था को एक अप्रत्यक्ष कर के साथ सिंगल इकोनॉमिक जोन में तब्दील कर देगा.

कहा जा रहा है कि जीएसटी के लागू होने से आम आदमी को सस्ता सामान मिलेगा. भारत में वर्ष 2006-07 के आम बजट में पहली बार इसका जिक्र किया गया था. वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले अधिकतर करों को जीएसटी के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव है.

GST लागू होते ही केंद्र को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स सब खत्म हो जाएंगे. राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लक्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स, चुंगी वगैरह भी खत्म हो जाएगी.