प्राइवेट कंपनियों को दी जाएगी समन भेजने का जिम्मा, पुलिस से छिनेगा यह अधिकार

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय ने फैसला किया है कि समन भेजने की इस प्रकिया में बदलाव कर इसे आउटसोर्स करेगा यानि, पुलिस की जगह प्राइवेट एजेंसियों समन भेजने की जिम्मेदारी दी जायेगी. इससे पुलिस बलों पर बढ़ रहे दवाब को कम किया जा सके. 

प्राइवेट कंपनियों को दी जाएगी समन भेजने का जिम्मा, पुलिस से छिनेगा यह अधिकार
बड़ा फैसला लेने की तैयारी में गृह मंत्रालय.

नई दिल्ली: पुलिस के पास जहां राज्य की कानून व्यवस्था को बनाये रखने की जिम्मेदारी होती है वहीं अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई के दौरान कोर्ट में भी उपस्थित रहना होता है. मुकदमें की सुनवाई के दौरान पुलिस सरकारी वकील के जरिये आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत रखने की जिम्मेदारी होती है, जिससे आरोपी कानून की गिरफ्त से बच न सके. पुलिस इसके साथ-साथ थानों और कोर्ट की तरफ से भेजे जाने वाले समन के काम में शामिल रहती है. इससे उन पर काम का दवाब बेहद बढ़ जाता है. 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय ने फैसला किया है कि समन भेजने की इस प्रकिया में बदलाव कर इसे आउटसोर्स करेगा यानि, पुलिस की जगह प्राइवेट एजेंसियों समन भेजने की जिम्मेदारी दी जायेगी. इससे पुलिस बलों पर बढ़ रहे दवाब को कम किया जा सके. 

ZEE न्यूज के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक गृह मंत्रालय के इस प्रस्ताव पर जहां हिमांचल प्रदेश, मध्य प्रदेश ने पहले ही काम शुरू कर दिया है. वहीं तमिलनाडु, नागालैंड, उत्तराखंड, त्रिपुरा, सिक्क्म, मणीपुर, चंडीगढ़, पंजाब और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों ने गृह मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है. भरोसा दिलाया है कि वह जल्द ही समन की इस प्रकिया की आउटसोर्ससिंग करेंगे. हैरानी की बात ये है कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों मे आउटसोर्ससिंग (Outsourcing) की इस पहल पर असहमति जताई है.

गृह मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक आउटसोर्ससिंग की इस कवायद के पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि पुलिस बल राज्य की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से संभाल सके. अगर सभी राज्य गृह मंत्रालय के इस प्रस्ताव पर राजी हो जाते हैं तो ये एक बड़ा सकारात्मक बदलाव होगा.

गृह मंत्रालय पुलिस सुधार के लिए बनी मूसाहारी कमेटी की 49 सिफारिशों को लागू कराने की लिए लंबे समय से प्रयासरत है. कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक राज्यों की पुलिस बलों पुलिस थानों में सुविधा, पुलिस कंप्लेट बोर्ड, पुलिस ट्रेनिंग और हाउसिंग की बेहतर सुविधा मुहैया कराने की सिफारिश की गई है. गृह मंत्रालय इन्ही सिफारिशों के आधार पर राज्यों की तरफ से लिए गये फैसलों की समीक्षा करता है और उसी आधार पर राज्यों की रेटिंग तय की जाती है.

ये भी देखें-: